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डालसा के न्याय सदन सभागार में विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया

जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशानुसार एवं डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में न्याय सदन सभागार में शुक्रवार को विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया गया

डालसा के न्याय सदन सभागार में विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया

जमशेदपुर – जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशानुसार एवं डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में न्याय सदन सभागार में शुक्रवार को विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया गया । इस कार्यक्रम में वरिष्ठ मध्यस्थ अधिवक्ता के के सिन्हा एवं लीगल एड डिफेंस कौंसिल के चीफ विदेश सिन्हा तथा लीगल कौंसिल के सदस्य राजेश श्रीवास्तव एवं मनोज कुमार सिंह द्वारा विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर विस्तार से प्रकाश डाला गया । इस दौरान बताया गया कि हर वर्ष 12 जून को पूरे विश्व में बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है । मौके पर वरिष्ठ मध्यस्थ अधिवक्ता के के सिन्हा ने जानकारी देते हुए कहा कि इस दिवस का उद्देश्य बालकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के अवसर प्रदान करना है । उन्होंने कहा कि बाल श्रम गरीबी, अशिक्षा, बेरोज़गारी, सामाजिक असमानता और जागरूकता की कमी से उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि इस दिवस की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी।
ILO ने 1999 में ‘Worst Forms of Child Labour Convention (No. 182)’ को अपनाया था।
बाल श्रम की परिभाषा पर अपनी विचार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि बाल श्रम वह कार्य है , जिसे करने के लिए बच्चे को स्कूल छोड़ना पड़ता है और जो उसकी मानसिक, शारीरिक, सामाजिक या नैतिक स्थिति को नुकसान पहुंचाता है तथा जो उसकी आयु के अनुपात में अत्यधिक कठिन, खतरनाक या शोषणकारी होता है।
ILO के अनुसार 5 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चे जब ऐसे कार्यों में संलग्न होते हैं जो उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य या विकास को बाधित करते हैं, तो वह बाल श्रम कहलाता है।
भारत में बाल श्रम की स्थिति जनगणना 2011 के अनुसार भारत में 1.01 करोड़ बाल मजदूर थे (5-14 वर्ष आयु वर्ग)
अधिकांश बाल मजदूर असंगठित क्षेत्र, घरेलू काम, कृषि, मौरंग-बालू ढुलाई और दुकानों में कार्य करते हैं। वहीं लीगल एड डिफेंस कौंसिल के चीफ विदेश सिन्हा ने बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम,1986 पर विस्तार से चर्चा किया । इस दौरान उन्होंने बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए खतरनाक उद्योगों में काम करने पर प्रतिबंध है । राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया है । इसके अलावा पोक्सो एक्ट, 2012 के तहत
यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया गया है । साथ ही
राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP)
पुनर्वास और शिक्षा के लिए विशेष विद्यालयों का संचालन किया जाता है । उन्होंने बालश्रम पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया और लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों से अवगत कराना है , ताकि बालश्रम पर सख्ती से अंकुश लग सके । कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग मौजूद थे

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