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आईईआई जमशेदपुर लोकल सेंटर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया

वर्ष 1920 में स्थापित इंजीनियरों की अग्रणी पेशेवर संस्था इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) [IEI] के जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपने परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “जलवायु कार्रवाई के लिए वैश्विक आह्वान” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में इंजीनियरों, उद्योग विशेषज्ञों, विद्यार्थियों तथा गणमान्य अतिथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया

आईईआई जमशेदपुर लोकल सेंटर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया


जमशेदपुर- वर्ष 1920 में स्थापित इंजीनियरों की अग्रणी पेशेवर संस्था इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) [IEI] के जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अपने परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “जलवायु कार्रवाई के लिए वैश्विक आह्वान” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में इंजीनियरों, उद्योग विशेषज्ञों, विद्यार्थियों तथा गणमान्य अतिथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया

कार्यक्रम का शुभारंभ वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इसके पश्चात इंजि. विनीत कुमार शाह, अध्यक्ष, आईईआई जमशेदपुर लोकल सेंटर एवं चीफ ऑफ मैन्युफैक्चरिंग – लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील, ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मुख्य अतिथि श्री अविरूप सिन्हा, आईएफएस, प्रभागीय वन पदाधिकारी (डीएफओ), सारंडा, पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड तथा विशिष्ट अतिथि सुश्री प्रियंका उपाध्याय, प्रमुख – पर्यावरण, टाटा स्टील लिमिटेड, जमशेदपुर सहित उपस्थित सदस्यों एवं अतिथियों का स्वागत किया।

अपने संबोधन में इंजि. शाह ने विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस वर्ष का विषय “जलवायु कार्रवाई” व्यक्तियों, समुदायों, उद्योगों और सरकारों से जलवायु परिवर्तन से निपटने, उत्सर्जन कम करने तथा अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ भविष्य के निर्माण हेतु सार्थक कदम उठाने का आह्वान करता है। उन्होंने इंजीनियरों से नवाचारपूर्ण एवं उत्तरदायी इंजीनियरिंग पद्धतियों के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।


इंजिनियर शाह ने कहा कि जमशेदपुर लंबे समय से भारत के हरित औद्योगिक नगरों में से एक के रूप में पहचाना जाता रहा है, जहाँ पार्क, हरित पट्टियाँ और सुव्यवस्थित शहरी क्षेत्र उद्योग और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, उन्होंने बढ़ते तापमान, तीव्र शहरीकरण, जल संकट और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी उभरती चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सभी से ऊर्जा संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, कचरे का पृथक्करण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण तथा टिकाऊ परिवहन साधनों को अपनाने जैसे व्यावहारिक उपायों को जीवन में शामिल करने का आग्रह किया।

विशिष्ट अतिथि प्रियंका उपाध्याय ने अपने संबोधन में सतत औद्योगिक विकास के प्रति टाटा स्टील की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया तथा पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया। “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हरित आवरण बढ़ाने, जल संरक्षण, अपशिष्ट पुनर्चक्रण और वायु गुणवत्ता प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के कारण जमशेदपुर जिम्मेदार औद्योगिकीकरण का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, उद्योग, शैक्षणिक संस्थान और इंजीनियरिंग पेशेवर सभी सतत परिवर्तन को आगे बढ़ाने तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे आर्थिक विकास और स्थिरता साथ-साथ आगे बढ़ सकें।
मुख्य अतिथि अविरूप सिन्हा, आईएफएस ने विश्व पर्यावरण दिवस के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र का विषय लोगों को प्रभावी जलवायु समाधानों हेतु प्रकृति की ओर देखने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी जलवायु परिवर्तन के संबंध में गंभीर चेतावनी संकेत दे रही है और इन चुनौतियों का समाधान पारिस्थितिकी तंत्र की सुदृढ़ता पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि झारखंड अपनी समृद्ध और विविध प्राकृतिक संपदा वाले क्षेत्रों में समुदायों को संगठित कर वैश्विक तापवृद्धि से मुकाबला करने के लिए इस वैश्विक आह्वान को स्थानीय स्तर पर क्रियान्वित कर रहा है।
श्री सिन्हा ने झारखंड पर्यावरण मेला 2026 के विषय “हमारी भूमि, हमारा पर्यावरण” का भी उल्लेख किया और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की जानकारी दी। इनमें वर्ष 2030 तक वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी, 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता प्राप्त करना, कुल विद्युत उत्पादन का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करना, वनों के माध्यम से 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बन सिंक विकसित करना तथा वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करना शामिल है।
उन्होंने इंजीनियरों को शून्य-कार्बन डिजाइन, हरित अवसंरचना, सतत खनन पद्धतियों, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तथा प्रकृति संरक्षण के लिए ड्रोन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने नागरिकों को स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने, “कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनः रोपण करें और पुनर्स्थापित करें” के सिद्धांतों का पालन करने, एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचने, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत बनाने, जलाशयों की रक्षा करने तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस कार्यक्रम में जमशेदपुर के अनेक प्रतिष्ठित इंजीनियरों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन आईईआई जमशेदपुर लोकल सेंटर की मानद सचिव डॉ. सीरम माधुरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से यह आयोजन सार्थक एवं सफल रहा।

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