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हड्डियों की मज़बूती का राज़ सही डाइट के साथ सही लाइफस्टाइल भी ज़रूरी -डॉ प्रशांत आर्य ,कंसल्टेंट – ऑर्थोपेडिक एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी , ब्रह्मानंद नारायणा हॉस्पिटल, जमशेदपुर

हड्डियों की मज़बूती को लेकर सबसे आम गलतफहमी यही है कि सही खानपान अकेला इसका पूरा जवाब है। डॉक्टरों के अनुसार, कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर थाली सिर्फ आधी कहानी है, बाकी आधी कहानी लिखी जाती है वेट-बेयरिंग और रेज़िस्टेंस एक्सरसाइज़, नींद की गुणवत्ता और रोज़मर्रा की उन आदतों से, जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है

हड्डियों की मज़बूती का राज़ सही डाइट के साथ सही लाइफस्टाइल भी ज़रूरी -डॉ प्रशांत आर्य ,कंसल्टेंट – ऑर्थोपेडिक एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी , ब्रह्मानंद नारायणा हॉस्पिटल, जमशेदपुर

हड्डियों की मज़बूती को लेकर सबसे आम गलतफहमी यही है कि सही खानपान अकेला इसका पूरा जवाब है। डॉक्टरों के अनुसार, कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर थाली सिर्फ आधी कहानी है, बाकी आधी कहानी लिखी जाती है वेट-बेयरिंग और रेज़िस्टेंस एक्सरसाइज़, नींद की गुणवत्ता और रोज़मर्रा की उन आदतों से, जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
हड्डियां कोई स्थिर ढांचा नहीं हैं, ये जीवित ऊतक हैं जो लगातार टूटते और फिर से बनते रहते हैं। यह प्रक्रिया तेज़ होती है जब हड्डियों पर दबाव पड़ता है। वॉकिंग, जॉगिंग, सीढ़ियां चढ़ना, डांस या वेट ट्रेनिंग जैसी वेट-बेयरिंग और रेज़िस्टेंस एक्सरसाइज़ हड्डियों को सीधा संकेत भेजती हैं कि उन्हें सघन और मज़बूत बने रहना है। आमतौर पर 30 की उम्र तक व्यक्ति की बोन डेंसिटी अपने चरम पर पहुंच जाती है, उसके बाद शरीर इसे बनाए रखने की कोशिश करता है, और यहीं सक्रिय जीवनशैली की भूमिका सबसे ज़्यादा अहम हो जाती है। जो लोग घंटों बैठे रहते हैं, चाहे दफ्तर में हो या स्क्रीन के सामने, उनमें बोन लॉस की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ती देखी गई है।
इसके उलट, कुछ आदतें धीरे-धीरे हड्डियों को भीतर से खोखला करती जाती हैं। धूम्रपान हड्डियों को नया ऊतक बनाने वाली कोशिकाओं की सक्रियता को कम करता है, जबकि अत्यधिक शराब कैल्शियम के अवशोषण में रुकावट डालती है। अधूरी या बाधित नींद हड्डियों के रीमॉडलिंग साइकल को असंतुलित कर देती है, क्योंकि शरीर की अधिकतर हड्डी-मरम्मत गहरी नींद के दौरान ही होती है। वहीं ज़्यादा नमक शरीर से कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ा देता है, और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद फॉस्फेट हड्डियों के संतुलन को और बिगाड़ते हैं। ये सभी आदतें अलग दिखती हैं, लेकिन इनका नतीजा एक जैसा होता है, कमज़ोर, भंगुर और फ्रैक्चर के प्रति संवेदनशील हड्डियां।
डॉक्टरों का कहना है कि सबसे बड़ी चूक तब होती है जब लोग सिर्फ दर्द या फ्रैक्चर के बाद हड्डियों के बारे में सोचना शुरू करते हैं, जबकि बोन डेंसिटी का कमज़ोर होना अक्सर बिना किसी लक्षण के वर्षों तक चलता रहता है। यही वजह है कि हड्डियों की सेहत को किसी एक दिन के प्रयास या सिर्फ डाइट प्लान से नहीं, बल्कि रोज़ की छोटी-छोटी आदतों से बनाना ज़रूरी है, नियमित एक्सरसाइज़, पर्याप्त और गहरी नींद, संतुलित नमक व प्रोसेस्ड फूड का सेवन, और नुकसानदायक आदतों से दूरी।
डॉक्टरों का संदेश साफ है, किचन ज़रूरी है, लेकिन पूरी कहानी नहीं। जो लोग सिर्फ थाली पर भरोसा करके एक्टिव लाइफस्टाइल को नज़रअंदाज़ करते हैं, वे अनजाने में अपनी हड्डियों की उम्र तेज़ी से बढ़ा रहे होते हैं।








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