जमशेदपुर में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था में हुए भारी भ्रष्टाचार, राजस्व हानि एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जमशेदपुर शहर में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु सरकार एवं प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से सिटी बस सेवा प्रारंभ की गई थी। परंतु वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं शर्मनाक है

जमशेदपुर में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था में हुए भारी भ्रष्टाचार, राजस्व हानि एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जमशेदपुर शहर में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु सरकार एवं प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से सिटी बस सेवा प्रारंभ की गई थी। परंतु वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं शर्मनाक है।
विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों से स्पष्ट होता है कि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति आज कबाड़ में परिवर्तित हो चुकी है तथा जनता को इस योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
समाचार पत्रों में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार
1.लगभग 5.50 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 50 सिटी बसें आज जर्जर एवं अनुपयोगी स्थिति में पड़ी हैं।
2.कई बसों के पार्ट्स, सीटें, गियर बॉक्स तथा अन्य सामान तक चोरी हो चुके हैं।
3.यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार, मिलीभगत एवं सरकारी संपत्ति की खुली बर्बादी को दर्शाती है।
यह अत्यंत गंभीर विषय है कि:
1. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विफल हो गई।
2. सरकारी संपत्ति की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं की गई।
3. वर्षों तक बसें सड़ती एवं चोरी होती रहीं, परंतु जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
4. जनता को बेहतर परिवहन सुविधा देने के नाम पर सरकारी धन की भारी बर्बादी हुई।
5. इस विफलता के कारण निजी एवं अव्यवस्थित यात्री वाहनों का दबाव बढ़ा, जिससे यातायात अव्यवस्था और दुर्घटनाओं की स्थिति उत्पन्न हुई।
यह केवल जमशेदपुर तक सीमित मामला प्रतीत नहीं होता।
संभावना है कि झारखंड के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की योजनाएं भ्रष्टाचार, अनियमितता एवं प्रशासनिक विफलता का शिकार हुई हों।
अतः यह विषय राज्यव्यापी जांच का है।
अतः आपसे सविनय किंतु दृढ़ आग्रह है कि:
जमशेदपुर सिटी बस योजना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
1. योजना से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों एवं संबंधित व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की जाए।
2. जिन अधिकारियों एवं व्यक्तियों की लापरवाही, भ्रष्टाचार अथवा मिलीभगत सामने आए, उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. सरकारी राजस्व को हुई क्षति का आकलन कर दोषियों से वसूली की जाए।
4. राज्य के अन्य शहरों में संचालित ऐसी योजनाओं की भी समीक्षा एवं ऑडिट कराया जाए।
5. भविष्य में सरकारी संपत्तियों एवं जनहित योजनाओं की सुरक्षा एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु ठोस नीति बनाई जाए।
6. जनता के टैक्स के पैसे से संचालित योजनाओं का इस प्रकार बर्बाद होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं अस्वीकार्य है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का विश्वास शासन एवं प्रशासन से पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
आशा है कि जनहित एवं सरकारी राजस्व की रक्षा हेतु आप इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई करेंगे। इस मामले को श्रवण देबुका जमशेदपुर झारखंड ने
मुख्यमंत्री झारखंड सरकार रांची झारखंड से कारवाई की मांग की है




