स्वस्थ आदतें आज, स्वस्थ भविष्य कलः क्यों बचाव को प्राथमिकता देना ज़रूरी है -डॉ. कल्याण कुमार, कंसल्टेंट, जनरल मेडिसिन, ब्रह्मानंदा नारायणा हॉस्पिटल जमशेदपुर
भारत आज एक स्वास्थ्य क्रांति के दौर से गुज़र रहा है। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ अब पहले लाइलाज मानी जाने वाली कई बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। फिर भी, यह चिंता का विषय है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियाँ अब कम उम्र में ही लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं, और यह प्रवृत्ति बदलनी चाहिए

स्वस्थ आदतें आज, स्वस्थ भविष्य कलः क्यों बचाव को प्राथमिकता देना ज़रूरी है
-डॉ. कल्याण कुमार, कंसल्टेंट, जनरल मेडिसिन, ब्रह्मानंदा नारायणा हॉस्पिटल, जमशेदपुर
भारत आज एक स्वास्थ्य क्रांति के दौर से गुज़र रहा है। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ अब पहले लाइलाज मानी जाने वाली कई बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। फिर भी, यह चिंता का विषय है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियाँ अब कम उम्र में ही लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं, और यह प्रवृत्ति बदलनी चाहिए।
आज बचाव को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाने की ज़रूरत है, और इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने होंगे।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से परहेज़, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन जैसी सामान्य आदतें बीमारियों की आशंका को काफ़ी हद तक कम कर सकती हैं। आइए इन आदतों को विस्तार से समझें कि ये किस तरह बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं।
संतुलित आहार से बेहतर जीवनशैली
फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर आहार एक स्वस्थ जीवनशैली की नींव रखता है। नमक और चीनी का सेवन सीमित करना और प्रोसेस्ह भोजन से यथासंभव दूरी बनाए रखना ज़रूरी है। नियमित समय पर स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट और वसा युक्त भोजन करने से उचित बीएमआई बनाए रखने में मदद मिलती है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सैचुरेटेड और ट्रांस फैट को सीमित करना भी महत्वपूर्ण है।
व्यायामः स्वस्थ जीवन की रोज़ की ज़रूरत
उम्र चाहे जो भी हो, स्वस्थ बीएमआई बनाए रखने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने के लिए सप्ताह में कई बार व्यायाम करना आवश्यक है। व व्यायाम बहुत कठिन होना ज़रूरी नहीं | रोज़ की सैर या बैडमिंटन जैसी गतिविधियाँ भी पर्याप्त हैं। जो गतिविधि पसंद हो उसे चुनना बेहतर है, ताकि उसे नियमित रूप से करने की प्रेरणा बनी रहे। व्यायाम न केवल शरीर को फिट रखता है, बल्कि मूड को भी बेहतर बनाता है और ऊर्जा तथा प्रसन्नता का एहसास कराता है। साथ ही, यह याददाश्त और नींद में भी सुधार लाता है।
पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन
अत्मधिक तनाव और अपर्याप्त नींद शरीर के कई कार्यों पर बुरा असर डाल सकते हैं, जिससे उच्च रक्तचाप, चयापचय में गड़बड़ी और यहाँ तक कि याददाश्त कमज़ोर होने जैसी समस्स्राएँ हो सकती हैं। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को प्रबंधित करना सीखना ज़रूरी है। इसके लिए दिन में छोटी झपकी लेना, विश्राम तकनीकें अपनाना और ध्यान (मेडिटेशन) करना कारगर उपाय हैं। इसके अलावा, परिवार और दोस्तों के साथ पर्याप्त समय बिताना और एक सक्रिय सामाजिक जीवन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
नशे की आदतों से दूरी
तंबाकू के किसी भी रूप में सेवन और अत्पधिक शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ-साथ, स्वस्थ वज़न बनाए रखने और मधुमेह व हृदय रोग जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचने के लिए इन आदतों से दूर रहना बेहद ज़रूरी है।
नियमित जांचः बीमारियों की रोकथाम की एक और अहम कड़ी
स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी आवश्यक है, ताकि किसी भी बीमारी का पता समय रहते चल सके और उसे बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जा सके। उदाहरण के लिए, रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्स्र की नियमित जांच करानी चाहिए, और यदि इनमें कोई असामान्यता पाई जाए तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। यौन संचारित संक्रमणों (एसटीडी) के मामले में भी यही नियम लागू होता है | जोखिम की मात्रा के अनुसार समय-समय पर जांच करानी चाहिए। इसी तरह, उम्र, लिंग और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर कैंसर की नियमित जांच भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि जांच की आवश्यकता हर व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार अलग-अलग होती है, इसलिए यह हमेशा बेहतर होगा कि किस जांच की कितनी बार ज़रूरत है, इस बारे में अपने चिकित्सक से सलाह ली जाए। इन जांच और प्रबंधन तकनीकों से कई छोटी समस्याओं को बड़ी बीमारी बनने से पहले ही रोका जा सकता है।
सामूहिक ज़िम्मेदारी की ज़रूरत
हालांकि हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के लिए स्वयं ज़िम्मेदार होना चाहिए, लेकिन परिवार, संस्थानों और नियोक्ताओं का भी यह दायित्व है कि वे इन उपायों के महत्व को समझाएँ और लोगों के लिए इन्हें अपनाना आसान बनाएँ।
परिवार अपने सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति पर नज़र रख सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे नियमित भोजन करें, व्यायाम करें और जांच कराएं, साथ ही उन्हें स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। परिवार मिलकर भी इन स्वस्थ गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। शैक्षणिक संस्थान भी विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, इससे न केवल वे फ़िट रहेंगे, बल्कि अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग भी बनेंगे। उन्हें नियमित जांच के लिए प्रोत्साहित करना और यौन संचारित रोगों तथा सुरक्षित यौन संबंधों के महत्व के बारे में जागरूक करना भी आवश्यक है। इसी तरह, नियोक्ता भी अपने कर्मचारियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित जांच कराने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। स्वास्थ्यकर्मी भी मरीज़ों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित जांच कराने की सलाह दे सकते हैं, साथ ही उन्हें संभावित जोखिमों के बारे में बताकर आवश्यक सावधानियाँ बरतने के ल िए प्रोत्साहित कर सकते हैं। बीमारियों से बचाव तभी सबसे बड़ी प्राथमिकता बन सकता है जब यह एक सामूहिक प्रयास बने।
स्वस्थ भविष्य संभव है, बशर्ते हम आज से ही शुरुआत करें। हम शायद हर बीमारी को पूरी तरह से रोक न सकें, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और नियमित जांच कराकर कई बीमारियों की आशंका को काफ़ी हद तक कम कर सकते हैं। यह ज़रूरी है कि लोग स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को समझें और स्वस्थ व रोगमुक्त रहने का संकल्प लें।




