परिसीमन देशहित और संविधान के अनुरूप है लेकिन परिसीमन आयोग परिभाषित हो एवं क्षेत्रवार जनजाति समाज पर भेदभाव न हो गारंटी होनी चाहिए – कैलाश यादव
परिसीमन का आधार जनसंख्या आधारित है इसलिए पहले जातीय जनगणना जल्द सुनिश्चित की जाय 150 करोड़ की आबादी वाले देश में परिसीमन होने से सामाजिक उत्थान एवं पंचायत के अंतिम व्यक्ति की आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी मजबूत होगी

परिसीमन देशहित और संविधान के अनुरूप है लेकिन परिसीमन आयोग परिभाषित हो एवं क्षेत्रवार जनजाति समाज पर भेदभाव न हो गारंटी होनी चाहिए – कैलाश यादव
परिसीमन का आधार जनसंख्या आधारित है इसलिए पहले जातीय जनगणना जल्द सुनिश्चित की जाय
150 करोड़ की आबादी वाले देश में परिसीमन होने से सामाजिक उत्थान एवं पंचायत के अंतिम व्यक्ति की आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी मजबूत होगी
रांची- आज झारखंड प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने आगामी दिनों में होने वाले परिसीमन के पक्ष में कहा कि देश में परिसीमन होना जनहित में है
ज्ञातव्य है भारत की आबादी लगभग 150 करोड़ के करीब पहुंच चुका है, स्पष्ट मानना है कि देश में सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए परिसीमन होना चाहिए क्योंकि देशहित में जनसंख्या के हिसाब से हर वर्ग के लोगों का कल्याण हो सकता है
विदित है परिसीमन लंबे समय से लंबित है और इसके पहले देश में कई बार संशोधित बिल के तहत परिसीमन लागू किया गया
केंद्र सरकार द्वारा जनगणना का कार्य भी लंबित है लेकिन आगामी परिसीमन के लिए वर्ष 2011 जनसंख्या का आधार रखा गया है।
यादव ने कहा कि परिसीमन आयोग परिभाषित होनी चाहिए अन्यथा यह पारदर्शिता पर कई सवाल उठेंगे ! विगत दिनों केंद्र सरकार द्वारा चुनाव आयोग द्वारा SIR कराया जा रहा है जो निष्पक्ष नहीं है और कई त्रुटियां देखी गई है !
गौरतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा SIR पारदर्शी नहीं है क्योंकि विगत दिनों कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में औसतन करोड़ो वोटरों के नाम काटे गए और पश्चिम बंगाल में 27 लाख वोटरों को वोट देने से रोक दिया गया !
राजद की ओर से स्पष्ट मानना है कि बगैर परिसीमन आयोग परिभाषित किए डी-लीमिटेशन पारदर्शी नहीं हो सकता क्योंकि मोदी सरकार के कई फैसले सुनियोजित रही है और बहुसंख्यक विरोध के खिलाफ रहा है इसलिए मोदी सरकार के हर निर्णय के नियति पर सवाल खड़ा होता है !
राजद का मानना है कि परिसीमन को दो पक्षों में देखना चाहिए क्योंकि 150 करोड़ की आबादी वाले देश में परिसीमन होने से सामाजिक उत्थान निश्चित है और राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति पर पंचायत के अंतिम व्यक्ति को लाभ मिलेगा !
परिसीमन देशहित और समय की मांग है तथा संविधान के अनुरूप है ! लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि मोदी सरकार पारदर्शी नहीं है क्योंकि इनकी राजनीतिक नीयत पक्ष और विपक्षी दलों के हिसाब से होती है जबकि परिसीमन दो प्रकार से संभव है !
प्रथम घरों की गिनती और दूसरा सम्पूर्ण जनसंख्या आधारित हो सकता है ! बगैर जनसंख्या का मापदंड तय किए परिसीमन पारदर्शी असंभव है !
श्री यादव ने कहा कि परिसीमन होने से छोटे राज्यों में कई भ्रांतियां हैं जिसे दूर करने की जरूरत होनी चाहिए क्योंकि क्षेत्रवार आदिवासी जनजाति परिवार का आकार छोटा किया जा सकता है जिसका असर लोकसभा एवं विधानसभा सीटों की संख्या पर पड़ सकता है इसलिए कोई भेदभाव और अन्याय नही हो इसकी गारंटी तय करनी होगी



