राग यमन, कथक और भरतनाट्यम ने सजाई गणपति कला उत्सव की शाम, भक्ति और भावनाओं से सराबोर हुआ मंच
आंध्र समिति (ईस्ट जोन) द्वारा आयोजित श्री गणपति फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत “गणपति कला उत्सव 2026” का आयोजन रविवार को बिरसानगर स्थित श्री लक्ष्मी गणपति मंदिर में श्रद्धा, संगीत और शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी छटा के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय कला की विविध विधाओं के साथ आध्यात्मिकता और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला
राग यमन, कथक और भरतनाट्यम ने सजाई गणपति कला उत्सव की शाम, भक्ति और भावनाओं से सराबोर हुआ मंच
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जमशेदपुर- आंध्र समिति (ईस्ट जोन) द्वारा आयोजित श्री गणपति फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत “गणपति कला उत्सव 2026” का आयोजन रविवार को बिरसानगर स्थित श्री लक्ष्मी गणपति मंदिर में श्रद्धा, संगीत और शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी छटा के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय कला की विविध विधाओं के साथ आध्यात्मिकता और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला
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कार्यक्रम की शुरुआत मास्टर आदित्य कुशल सिन्हा (जमशेदपुर) द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के द्वादश अध्याय ‘भक्तियोग’ के श्लोक पाठ से हुई। उन्होंने श्लोकों का सस्वर पाठ करने के साथ उनके हिंदी अर्थ भी प्रस्तुत किए। भक्ति, समर्पण, करुणा, संयम और ईश्वर के प्रति श्रद्धा के संदेश ने कार्यक्रम के आरंभ को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
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इसके बाद रोशनी मुकुंदन (जमशेदपुर) ने भरतनाट्यम की तीन भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को प्रभावित किया। उन्होंने “Maha Ganapati Manasa Smarami” के माध्यम से भगवान गणेश के प्रति भक्ति और मंगलकामना को अभिव्यक्त किया। “Alai Paayuthe Kanna” में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्त के गहरे प्रेम और विरह की अनुभूति को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। वहीं “Om Shambho Om Shiva Shambho Swayambho” में भगवान शिव की आराधना ने मंच को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। उनकी मुद्राओं, भाव-अभिनय और पद संचालन में भरतनाट्यम की शास्त्रीय गरिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
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कार्यक्रम का विशेष आकर्षण तनविषा चक्रवर्ती (कोलकाता) की कथक प्रस्तुति रही। उन्होंने गणेश वंदना से अपनी प्रस्तुति का आरंभ किया। इसके बाद ठाट, उठान, तिहाई, लड़ी, तोड़ा, कविता, गिनती तिहाई और तोड़ा के माध्यम से कथक की लय, ताल और तकनीकी सौंदर्य को प्रस्तुत किया। गणेश भजन के साथ उनकी कथक प्रस्तुति का समापन हुआ।
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तनविषा चक्रवर्ती की प्रस्तुति का अंतिम चरण विशेष रूप से भावपूर्ण रहा। उन्होंने राग यमन पर आधारित पुराने सदाबहार फिल्मी गीतों पर उपशास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति की शुरुआत “मेरी आवाज़ ही पहचान है…” से हुई। इसके बाद “गर याद रहेगा…” ने भावनाओं को और गहराई दी। वहीं “आज जाने की ज़िद न करो” के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ। राग यमन की मधुरता, गीतों की भावनात्मक गहराई और नृत्य की अभिव्यक्ति ने इस प्रस्तुति को शाम के विशेष आकर्षणों में शामिल कर दिया।
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तनविषा चक्रवर्ती भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की CCRT Scholarship Holder हैं। उनकी प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक तकनीक के साथ भाव-अभिनय और संगीत का सुंदर संतुलन देखने को मिला।
पूरे कार्यक्रम में कहीं भगवद्गीता के श्लोकों की आध्यात्मिक गूंज, कहीं भरतनाट्यम की भावपूर्ण मुद्राएं, तो कहीं कथक की लयकारी और राग यमन की सुरलहरियां सुनाई दीं। इस तरह गणपति कला उत्सव भारतीय कला, संस्कृति, संगीत और भक्ति के विविध रंगों को एक मंच पर समेटने वाला सांस्कृतिक आयोजन बनकर सामने आया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आंध्र समिति (ईस्ट जोन) के अध्यक्ष एम. राजा शेखर एवं महासचिव के. राम मोहन राव ने सभी कलाकारों, अतिथियों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारतीय कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने तथा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के लिए मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।




