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राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर्स दिवस-जागरूकता शीघ्र पहचान और सफल उपचार का संदेश डॉ. अमित कुमार, वरिष्ठ सलाहकार मेडिकल ऑन्कोलॉजी, ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल तामोलिया जमशेदपुर

राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर दिवस केवल उन लोगों के साहस का उत्सव नहीं है जिन्होंने कैंसर को मात दी है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में कितनी प्रगति हुई है और जागरूकता आज भी बेहतर परिणामों की सबसे बड़ी कुंजी क्यों बनी हुई है

राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर्स दिवस-जागरूकता शीघ्र पहचान और सफल उपचार का संदेश

डॉ. अमित कुमार, वरिष्ठ सलाहकार मेडिकल ऑन्कोलॉजी ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, टामोलिया, जमशेदपुर

राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर दिवस केवल उन लोगों के साहस का उत्सव नहीं है जिन्होंने कैंसर को मात दी है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में कितनी प्रगति हुई है और जागरूकता आज भी बेहतर परिणामों की सबसे बड़ी कुंजी क्यों बनी हुई है

झारखंड में कैंसर का बोझ लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में हर वर्ष लगभग 35,000 से 40,000 नए कैंसर मामलों की पहचान होती है। पुरुषों में मुंह, फेफड़े और पेट का कैंसर अधिक देखा जाता है, जबकि महिलाओं में स्मृन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर सबसे आम कैंसरों में शामिल हैं। खैनी, गुटखा और जर्दा जैसे तंबाकू उत्पादों का सेवन क्षेत्र में कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि झारखंड में तंबाकू सेवन की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जिससे रोकथाम और जागरूकता अभियान और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर दिवस का महत्व आज इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि कैंसर का सफल उपचार प्राप्त कर सामान्य जीवन में लौटने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैंसर सर्वाइवर उन मरीजों को कहा जाता है जिन्होंने सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट या इन उपचारों के संयोजन से उपचार प्राप्त किया हो। उपचार के बाद अनेक लोग पुनः अपने कार्यस्थल पर लौट रहे हैं, परिवार की जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं और सामान य जीवन जी रहे हैं।

कैंसर से बचाव और बेहतर उपचार परिणामों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय पर पहचान की होती है। शुरुआती अवस्था में पहचाने गए मुंह के कैंसर का उपचार अक्सर सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इसी प्रकार स्मृन और सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच से रोग का पता शुरुआती चरण में लग सकता है, जिससे उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्सवश, कई मरीज तब तक चिकित्सकीय सलाह नहीं लेते जब तक लक्षण गंभीर रूप नहीं ले लेते।

कुछ चेतावनी संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मुंह का ऐसा छाला जो लंबे समय तक ठीक न हो, निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, लगातार खांसी, असामान्य रक्तस्राव, स्मृन में गांठ, मल त्याग की आदतों में बदलाव या लंबे समय तक रहने वाली थकान जैसे लक्षण तुरंत चिकित्सकीय जांच की मांग करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में मुंह के कैंसर के कई मामले शुरुआती लक्षण दिखाई देने के बावजूद उन्नत अवस्था में ही पहचान में आते हैं।

कैंसर की रोकथाम रोजमर्रा की कुछ सरल आदतों से शुरू होती है। सभी प्रकार के तंबाकू से दूरी बनाना, शराब के सेवन को सीमित करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, फलों और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना, आवश्यक टीकाकरण करवाना तथा उम्र और जोखिम के अनुसार कैंसर स्क्रीनिंग करवाना कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

आज कैंसर उपचार का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीजों को उपचार के बाद बेहतर,

स्वस्थ और संतोषजनक जीवन जीने में सक्षम बनाना भी है। राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर दिवस यह संदेश देता है कि जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की मदद से कैंसर की अनेक कहानियाँ निराशा नहीं, बल्कि नई उम्मीद और नए जीवन के साथ आगे बढ़ सकती हैं।

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