रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर मिडटाउन और टाटा स्टील फाउंडेशन ने 170 स्कूली बच्चों को बाल सुरक्षा और माहवारी स्वच्छता के प्रति किया जागरूक
बच्चों की सुरक्षा, भावनात्मक स्वास्थ्य और किशोर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर मिडटाउन (आरसीजेएमटी) ने टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से साकची स्थित शारदामणि स्कूल में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। क्लब अध्यक्ष रोटेरियन जी. गोपाल कृष्णा के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र में विद्यालय के लगभग 170 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया

रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर मिडटाउन और टाटा स्टील फाउंडेशन ने 170 स्कूली बच्चों को बाल सुरक्षा और माहवारी स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

जमशेदपुर — बच्चों की सुरक्षा, भावनात्मक स्वास्थ्य और किशोर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर मिडटाउन (आरसीजेएमटी) ने टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से साकची स्थित शारदामणि स्कूल में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। क्लब अध्यक्ष रोटेरियन जी. गोपाल कृष्णा के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र में विद्यालय के लगभग 170 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

यह कार्यक्रम रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3250 के प्रमुख अभियान “गुड टच, बैड टच व समग्र बाल सुरक्षा” के तहत आयोजित किया गया। कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट एवं डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट चेयर रोटेरियन प्रीति सैनी द्वारा परिकल्पित इस दूरदर्शी पहल को रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3250 की गवर्नर अनु नारंग ने आधिकारिक रूप से जिला स्तर पर प्राथमिकता के साथ चुना है। इसके तहत जून 2027 तक क्षेत्र के 50,000 विद्यार्थियों को जागरूक और सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है।

कार्यक्रम का जमीनी समन्वय टाटा स्टील फाउंडेशन के एरिया ऑफिसर नबीन दास द्वारा किया गया, जिन्होंने फाउंडेशन के मैनेजर अभिषेक कश्यप के साथ संस्था का प्रतिनिधित्व किया।
तीन विशेष सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों के विभिन्न आयु वर्गों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता रोटेरियन प्रीति सैनी ने शारीरिक सीमाओं से आगे बढ़कर बाल शोषण के मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला:

कक्षा 1 से 4 के लिए: केवल पारम्परिक “सुरक्षित बनाम असुरक्षित स्पर्श” तक सीमित न रहकर, कहानियों के माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि ग्रूमिंग (बहलाना-फुसलाना) की शुरुआत कैसे होती है और परिचित व्यक्ति किस प्रकार हेरफेर कर सकते हैं। बच्चों को संकट के समय ‘नो–रन–टेल’ (मना करो–भागो–बताओ) सुरक्षा नियम और अपने भरोसेमंद लोगों का दायरा (सर्कल ऑफ ट्रस्ट) पहचानना सिखाया गया।
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कक्षा 5 व 6 के लिए: इस सत्र में शोषण के गहरे ताने-बाने पर चर्चा की गई—जिसमें यह समझाया गया कि अनजाने में बच्चे कैसे पीड़ित या शोषणकर्ता बन जाते हैं, माता-पिता और बच्चों के बीच संवादहीनता से किस प्रकार शोषण को बढ़ावा मिलता है, तथा पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मिलने वाले कानूनी सुरक्षा कवच क्या हैं। इसके साथ ही, माहवारी स्वच्छता पर एक वैज्ञानिक और भ्रांति-मुक्त सत्र लिया गया, जिससे छात्राओं में झिझक दूर हुई और शारीरिक स्वायत्तता व स्वच्छता की समझ विकसित हुई।
सत्र के दौरान सभी 170 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। यह आयोजन रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3250 के 50,000 बच्चों को जागरूक करने के संकल्प की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।


