लोधी क्षत्रियों का संस्कृत त्यौहार भोजली शोभायात्रा झारखंड लोधी क्षत्रिय महासभा द्वारा आज जमशेदपुर में बड़े ही धूमधाम से निकाला गया
शोभा यात्रा में शामिल योगेंद्र लोधी ने बताया कि भोजली कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश सहित सभी हिस्सों में मनाया जाता है। यह रक्षाबंधन दिन और उसके बाद दिन आयोजित किया जाता है। मध्य प्रदेश में इसे कजली के नाम से जाना जाता है और छत्तीसगढ़ में भोजली के नाम से यह त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहनों के प्यार, हरियाली, कृषि और मित्रता के लिए जाना जाता है। इस त्यौहार में नवविवाहिता गौना से पहले भोजली ले जाकर नदी में विसर्जन करते है

जमशेदपुर- लोधी क्षत्रियों का संस्कृत त्यौहार भोजली शोभायात्रा झारखंड लोधी क्षत्रिय महासभा द्वारा आज जमशेदपुर में बड़े ही धूमधाम से निकाला गया।

इस अवसर पर शोभा यात्रा में शामिल योगेंद्र लोधी ने बताया कि भोजली कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश सहित सभी हिस्सों में मनाया जाता है। यह रक्षाबंधन दिन और उसके बाद दिन आयोजित किया जाता है। मध्य प्रदेश में इसे कजली के नाम से जाना जाता है और छत्तीसगढ़ में भोजली के नाम से यह त्योहार मनाया जाता है।

यह त्योहार भाई-बहनों के प्यार, हरियाली, कृषि और मित्रता के लिए जाना जाता है। इस त्यौहार में नवविवाहिता गौना से पहले भोजली ले जाकर नदी में विसर्जन करते है।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के सात दिन पहले गेहूं जौ धान आदि भिगोकर 7 दिन तक लगाया जाता है और सातों दिन पूजा किया जाता है। इसकी शुरुआत 15वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान के समय हुई थी। रानी चंद्रबली के उजैना से इसकी शुरुआत हुई थी।
वहीं महिलाओं ने बताया कि भोजली भाई बहनों का त्यौहार है। इसमें उजैना करते हैं। इसमें गेहूं को भीगाया जाता है। उसे सात दिन तक उगाया जाता है और उसे नदी में भाई के द्वारा पूजा करने के बाद अर्पित किया जाता है। भाई द्वारा पूजा के बाद बहन को उपहार भी दिया जाता है।




