Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी   Click to listen highlighted text! Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी
Uncategorized

विवर्स डेवलपमेंट एण्ड रिसर्च आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यू.डी.आर.ओ.) के द्वारा माईकल जॉन प्रेक्षागृह बिष्टुपुर में तेरहवां हस्तकरघा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उदघाटन झारखण्ड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया

झारखण्ड के राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की नहीं बल्कि बुनकरों की आय बढ़ानें की है, इसके लिये नये डिजाईन ई.कॉमर्स, कौशल उन्नयन तथा युवाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है यदि हमारी नई पीढ़ी इस क्षेत्र से जुड़ेगी तो हस्तकरघा उद्योग नई उर्जा के साथ आगे बढ़ेगा और रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे

जमशेदपुर- विवर्स डेवलपमेंट एण्ड रिसर्च आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यू.डी.आर.ओ.) के द्वारा माईकल जॉन प्रेक्षागृह बिष्टुपुर में तेरहवां हस्तकरघा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उदघाटन झारखण्ड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया

मुख्य अतिथि के रूप में झारखण्ड के राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की नहीं बल्कि बुनकरों की आय बढ़ानें की है, इसके लिये नये डिजाईन ई.कॉमर्स, कौशल उन्नयन तथा युवाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है यदि हमारी नई पीढ़ी इस क्षेत्र से जुड़ेगी तो हस्तकरघा उद्योग नई उर्जा के साथ आगे बढ़ेगा और रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे राज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, स्वयंसेवी संगठन, उद्योग जगत मिलकर बुनकरों के लिये अनुकूल माहौल बनायेंगे तो यह परंपरागत उद्योग और मजबूती से काम करेगा राज्यपाल ने कहा कि भारत में हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं है बल्कि यह हमारी सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि झारखण्ड के ग्रामीण इलाकों में हस्तशिल्प और हस्तकरघा विकास की प्रचुर संभावना विद्यमान है। क्योंकि उच्च गुणवत्ता के तसर रेशम के कुकून इस इलाके में भारी मात्रा में पाये जाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने बुनकरों की समस्या को नजदीक से देखा-जाना और समझा है। केन्द्र सरकार में जब मेरे जिम्मे कपड़ा मंत्रालय था उसी समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा वर्ष 2015 में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस घोषित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उन लाखों बुनकरों के श्रम, कौशल एवं सृजनशीलता को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने सदियों से भारत की सांस्कृतिक पहचान को अपने हाथों से बुना है। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा एवं आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर यह स्मरण करना भी प्रासंगिक है कि वर्ष 1942 में प्रारम्भ हुए भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा प्रदान की थी। उस दौर में चरखा, खादी और हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण के साधन नहीं थे, बल्कि स्वदेशी, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रतीक बन गए थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी एवं स्वदेशी को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर देशवासियों में आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव की भावना का संचार किया।

राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड की जनजातीय एवं ग्रामीण परंपराओं में हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत विद्यमान है। राज्य का तसर रेशम अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, डिज़ाइन, विपणन तथा डिजिटल माध्यमों से जोड़कर बुनकरों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाना समय की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें बुनकर समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं को निकट से समझने तथा केन्द्र सरकार में वस्त्र मंत्री के रूप में कार्य करते हुए उनके हितों के लिए कार्य करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस मनाने की पहल प्रारंभ हुई, जिसका उद्देश्य देश के बुनकरों के श्रम, कौशल एवं योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना तथा हस्तकरघा क्षेत्र को नई पहचान प्रदान करना था।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘वोकल फॉर लोकल’आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ जैसी अनेक पहलों के माध्यम से बुनकरों, शिल्पकारों एवं पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि विकसित भारत की आर्थिक शक्ति भी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए डिज़ाइन नवाचार, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, ब्रांडिंग, कौशल उन्नयन तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शैक्षणिक संस्थान, उद्योग जगत, स्वयंसेवी संगठन एवं सरकार के संयुक्त प्रयासों से हस्तकरघा उद्योग को नई गति मिलेगी तथा विशेष रूप से महिलाओं एवं ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित होंगे।

राज्यपाल ने सभी नागरिकों से हस्तकरघा उत्पादों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आहवान करते हुए कहा कि जब हम हस्तकरघा से निर्मित कोई उत्पाद खरीदते हैं, तब हम केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि एक बुनकर परिवार की आजीविका को सशक्त करते हैं तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत बनाते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये खादी ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व सदस्य मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आज हस्तकरघा उद्योग से जुड़े बुनकरों को सामने पूंजी का अभाव, तकनीक एवं डिजाईनिंग का अभाव एवं बाजार में सुगम पहुंच जैसी समस्यायें सामने है। बुनकर धीरे-धीरे इस क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन और हुनर छोड़ने का दर्द किसान और बुनकर को है लेकिन इस क्षेत्र में काम करते हुये जीवन यापन भी मुश्किल होने लगा तो वे पलायन करने को मजबूर हुये। आज देश में 50 लाख से ऊपर लोग हस्तकरघा से जुड़े हैं और दुनिया के हस्तकरघा क्षेत्र में उत्पादन का 95 प्रतिशत भारत में होता है जिसका एक बड़ा हिस्सा विदेशों में निर्यात भी होता है। हस्तकरघा से तैयार सूती, रेशम और ऊनी वस्त्रों का घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशों में भी काफी मांग है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर ने कहा कि आज हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों के हुनर को प्रोत्साहित करना है साथ ही सरकार एवं उद्योग जगत मिलकर इस क्षेत्र में आधारभूत संरचना को विकसित करे और ई कॉमर्स के माघ्यम से देश दुनिया में हस्तकरघा के उत्पादों को पहुंचाये कार्यक्रम में मनोज सिंह ने भी संबोधित किया

कार्यक्रम में विषय प्रवेश करते हुये डब्ल्यूडीआरओ के अध्यक्ष विजय भारती ने कहा कि हमारा संगठन देश भर में बुनकर विकास और हस्तकरघा क्षेत्र के उत्थान में लगा है। पिछले पन्द्रह वर्षों से आदरणीय श्री संतोष गंगवार का सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा है। अपने संस्था अपने सीमित संसाधनों के द्वारा बुनकरों को प्रशिक्षण देने और उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के काम लगातार कर रही है। जमशेदपुर में इस आयोजन को करने के पीछे मुख्य उद्देश्य तसर रेशम के उत्पादन कार्य में ज्यादा से ज्यादा बुनकरों को जोड़ना है जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सके।

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रम मंत्रालय बोर्ड के पूर्व सदस्य आनंद साहू ने स्वागत भाषण दिया, मंच संचालन विजय भारती एवं धन्यवाद ज्ञापन स्वर्णरेखा विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी आशुतोष राय ने किया। मंच पर समाजसेवी दीपक पटेल भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने बलराम पात्रो, मंगल पात्रो, अमित मोदक, अनिता मैत्रे और बिलाय तांती को सम्मानित किया उक्त अवसर पर राज्यपाल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिन्हा, स्वदेशी जागरण मंच के बंदेशंकर सिंह, अमित मिश्रा, पंकज सिंह, राजपति देवी, डा0 अनिल राय, किरणजीत कौर, आभा देवी, गुरजीत सिंह, अभिषेक बजाज, घनश्याम चौधरी, नीरज मिश्रा, दिलीप त्यागी, रंजीत दास, दुलाल स्वांसी, रामप्रसाद दास सहित स्थानीय एवं दूसरे राज्यों बंगाल, महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार से आये प्रतिनिधि उपस्थित थे

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!