डुमरिया की पारंपरिक औषधीय विरासत पर होगी वैज्ञानिक रिसर्च, आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर पहुंचे लाखाईडीह
डुमरिया (पूर्वी सिंहभूम)। पूर्वी सिंहभूम जिले के जनजातीय प्रखंड डुमरिया के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्र स्थित लाखाईडीह गांव में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर एवं देश-विदेश में मेडिसिन रिसर्च से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवतोष दत्ता ने गांव पहुंचकर ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू से मुलाकात की और पीढ़ियों से चली आ रही आदिवासी चिकित्सा परंपरा पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. दत्ता ने ग्राम प्रधान और ग्रामीणों से पारंपरिक औषधीय ज्ञान, जड़ी-बूटियों के उपयोग और उनकी उपचार पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध कुछ विशेष औषधीय पौधों पर वैज्ञानिक शोध करने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इनका व्यवस्थित अध्ययन किया जाए तो यह चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है

डुमरिया की पारंपरिक औषधीय विरासत पर होगी वैज्ञानिक रिसर्च, आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर पहुंचे लाखाईडीह
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=tE9W0BISe_oD0EVL
जमशेदपुर- डुमरिया (पूर्वी सिंहभूम)। पूर्वी सिंहभूम जिले के जनजातीय प्रखंड डुमरिया के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्र स्थित लाखाईडीह गांव में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर एवं देश-विदेश में मेडिसिन रिसर्च से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवतोष दत्ता ने गांव पहुंचकर ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू से मुलाकात की और पीढ़ियों से चली आ रही आदिवासी चिकित्सा परंपरा पर विस्तृत चर्चा की।
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=Lntwax-3drHYWDOs
डॉ. दत्ता ने ग्राम प्रधान और ग्रामीणों से पारंपरिक औषधीय ज्ञान, जड़ी-बूटियों के उपयोग और उनकी उपचार पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध कुछ विशेष औषधीय पौधों पर वैज्ञानिक शोध करने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इनका व्यवस्थित अध्ययन किया जाए तो यह चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=z_5z9rV22d3bLinU
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के दृष्टिकोण से जल से थल बनने वाली पहली धरती माने जाने वाले सारंडा वन क्षेत्र से जुड़े पूर्वी सिंहभूम के लाखाईडीह एवं आसपास के इलाकों में बहुमूल्य औषधीय वनस्पतियों का समृद्ध भंडार मौजूद है। इन पर वैज्ञानिक अनुसंधान कर इनके औषधीय गुणों को प्रमाणित किया जाए तो इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=hKNzxZTXFLnvADDo
डॉ. देवतोष दत्ता ने कहा कि डुमरिया प्रखंड मेडिसिन रिसर्च के क्षेत्र में अपार संभावनाओं से भरपूर है। यदि सरकार और संबंधित संस्थानों का सहयोग मिले तो यह क्षेत्र औषधीय अनुसंधान का राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन सकता है और देश-विदेश में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=lgKsdIZEOE-CTtDx
इस अवसर पर ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू एवं उनके परिवार के सदस्यों ने डॉ. दत्ता और उनकी टीम का अंगवस्त्र भेंट कर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=TI51R6iX26EGxuX8
कान्हु राम टुडू ने संथाली में कहा कि पहली बार कोई वैज्ञानिक दल गांव पहुंचकर उनकी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को समझने और उसका वैज्ञानिक अध्ययन करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने अपनी पीढ़ियों से संजोई गई कई औषधीय जानकारियां शोध दल के साथ साझा की हैं तथा भविष्य के अनुसंधान में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=_m259RIZcMfcWOOs
इस दौरान डॉ. देवतोष दत्ता के साथ अनिर्बान चौधरी, राकेश जैन, शेख शेरियल, भैरव महाराज और सत्य प्रकाश भी उपस्थित रहे।



