जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के कन्वोकेशन को लेकर झारखण्ड छात्र मोर्चा ने उठाए सवाल, छात्राओं के हित में दस सूत्री मांगें
जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय जमशेदपुर में 08 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले कन्वोकेशन समारोह को लेकर छात्राओं के बीच उत्पन्न असंतोष एवं शुल्क संबंधी मामले पर झारखण्ड छात्र मोर्चा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग की है। झारखण्ड छात्र मोर्चा के कोल्हान सचिव पप्पू यादव ने कहा कि कन्वोकेशन छात्राओं के जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है। चार वर्षों की मेहनत और पढ़ाई के बाद मिलने वाली डिग्री उनके लिए केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और सफलता का सम्मान है। ऐसे अवसर पर किसी भी छात्रा को आर्थिक या प्रशासनिक कारणों से परेशान अथवा वंचित किया जाना उचित नहीं है

जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के कन्वोकेशन को लेकर झारखण्ड छात्र मोर्चा ने उठाए सवाल, छात्राओं के हित में दस सूत्री मांगें

जमशेदपुर- जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय जमशेदपुर में 08 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले कन्वोकेशन समारोह को लेकर छात्राओं के बीच उत्पन्न असंतोष एवं शुल्क संबंधी मामले पर झारखण्ड छात्र मोर्चा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग की है।

झारखण्ड छात्र मोर्चा के कोल्हान सचिव पप्पू यादव ने कहा कि कन्वोकेशन छात्राओं के जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है। चार वर्षों की मेहनत और पढ़ाई के बाद मिलने वाली डिग्री उनके लिए केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और सफलता का सम्मान है। ऐसे अवसर पर किसी भी छात्रा को आर्थिक या प्रशासनिक कारणों से परेशान अथवा वंचित किया जाना उचित नहीं है।

झारखण्ड छात्र मोर्चा के अनुसार, छात्राओं से कन्वोकेशन/डिग्री के नाम पर ₹1,000 की राशि मांगी जा रही है, जबकि छात्राओं का कहना है कि आठों सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म भरते समय उनसे डिग्री शुल्क पहले ही लिया जा चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को इस अतिरिक्त राशि के आधार और नियम को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, कई छात्राओं को कन्वोकेशन समारोह में शामिल होने से वंचित किए जाने की बात भी सामने आई है। यदि समारोह में सीटों की कमी है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी पात्र छात्राओं के लिए सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
झारखण्ड छात्र मोर्चा की 10 सूत्री स्पष्ट मांगें
1. ₹1,000 की वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए।
कन्वोकेशन/डिग्री के नाम पर छात्राओं से ली जा रही ₹1,000 की राशि की तत्काल समीक्षा की जाए तथा विश्वविद्यालय स्पष्ट करे कि यह राशि किस नियम एवं अधिसूचना के आधार पर निर्धारित की गई है।
2. पूर्व में जमा किए गए डिग्री शुल्क की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
आठों सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म के दौरान छात्राओं से लिए गए डिग्री शुल्क की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और बताया जाए कि पूर्व में शुल्क लिए जाने के बावजूद अब ₹1,000 की अतिरिक्त राशि क्यों मांगी जा रही है।
3. ₹1,000 शुल्क का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन इस राशि का मदवार विवरण सार्वजनिक करे तथा स्पष्ट करे कि प्रत्येक छात्रा से ली जाने वाली राशि का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जाएगा।
4. शुल्क के कारण किसी छात्रा को डिग्री से वंचित न किया जाए।
जो छात्राएं ₹1,000 की राशि जमा नहीं कर पाई हैं, उन्हें केवल इसी आधार पर उनकी अर्जित डिग्री प्राप्त करने से वंचित न किया जाए।
5. सभी पात्र छात्राओं को कन्वोकेशन में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
सीटों की कमी का हवाला देकर किसी पात्र छात्रा को कन्वोकेशन समारोह से वंचित न किया जाए। सभी छात्राओं के लिए उचित एवं सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
6. कन्वोकेशन शुल्क और डिग्री शुल्क की स्थिति स्पष्ट की जाए।
विश्वविद्यालय स्पष्ट करे कि डिग्री शुल्क एवं कन्वोकेशन शुल्क अलग-अलग हैं या एक ही शुल्क का हिस्सा हैं। यदि दोनों अलग हैं, तो उनकी स्वीकृत शुल्क संरचना सार्वजनिक की जाए।
7. छात्राओं की शिकायत पर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
महामहिम राज्यपाल महोदय को छात्राओं द्वारा ई-मेल के माध्यम से की गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
8. छात्राओं के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त किया जाए।
आर्थिक स्थिति अथवा शुल्क संबंधी विवाद के आधार पर किसी पात्र छात्रा के साथ डिग्री प्राप्त करने अथवा कन्वोकेशन में भाग लेने के मामले में भेदभाव न किया जाए।
9. सरकार तत्काल मामले में हस्तक्षेप करे।
राज्य सरकार एवं संबंधित उच्च शिक्षा विभाग पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्राओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने का निर्देश दे।
10. भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
विश्वविद्यालय शुल्क निर्धारण, डिग्री वितरण एवं कन्वोकेशन से संबंधित सभी नियमों और शुल्कों को पहले से स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करे, ताकि छात्राओं को भविष्य में किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
झारखण्ड छात्र मोर्चा का स्पष्ट मत है कि विश्वविद्यालय केवल शुल्क वसूलने की संस्था नहीं, बल्कि छात्राओं के भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा करने वाली शैक्षणिक संस्था है। कन्वोकेशन छात्राओं के लिए गौरव और सम्मान का अवसर है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव या अनावश्यक आर्थिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
झारखण्ड छात्र मोर्चा ने सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि उपरोक्त मांगों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए छात्राओं को राहत दी जाए। मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में झारखण्ड छात्र मोर्चा छात्राओं के हित में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा उक्त जानकारी पप्पू यादव कोल्हान सचिव झारखण्ड छात्र मोर्चा ने दी है

