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डॉक्टोरल शोधार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक्सएलआरआई में आयोजित हुई जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ प्रकाशन कार्यशाला

एक्सएलआरआई – ज़ेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर ने 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2026 तक दो दिवसीय जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (जेएमएस) प्रकाशन कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में डॉक्टोरल शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और वैश्विक शैक्षणिक समुदाय के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अकादमिक प्रकाशन, शोध उत्कृष्टता और डॉक्टोरल शोध यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। कार्यशाला का औपचारिक उदघाटन पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और प्रार्थना गीत के साथ हुआ। एक्सएलआरआई नेतृत्व द्वारा जेएमएस संपादकीय टीम का स्वागत किया गया। एक्सएलआरआई के निदेशक (डॉ.) फादर एस. जॉर्ज, एस.जे. ने जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ के प्रधान संपादक प्रो. जोहान फोर्टवेंजेल का स्वागत किया

डॉक्टोरल शोधार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक्सएलआरआई में आयोजित हुई जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ प्रकाशन कार्यशाला

जमशेदपुर – एक्सएलआरआई – ज़ेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर ने 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2026 तक दो दिवसीय जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (जेएमएस) प्रकाशन कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में डॉक्टोरल शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और वैश्विक शैक्षणिक समुदाय के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अकादमिक प्रकाशन, शोध उत्कृष्टता और डॉक्टोरल शोध यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। कार्यशाला का औपचारिक उदघाटन पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और प्रार्थना गीत के साथ हुआ। एक्सएलआरआई नेतृत्व द्वारा जेएमएस संपादकीय टीम का स्वागत किया गया। एक्सएलआरआई के निदेशक (डॉ.) फादर एस. जॉर्ज, एस.जे. ने जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ के प्रधान संपादक प्रो. जोहान फोर्टवेंजेल का स्वागत किया। (डॉ.) फादर डोनाल्ड डी’सिल्वा, एस.जे., डीन (प्रशासन एवं वित्त) ने सह-संपादक प्रो. शमीन प्रशांतम का स्वागत किया, जबकि डीन (अकादमिक्स) प्रो. संजय पात्रो ने सह-संपादक प्रो. क्लाउडिया गैबियोनेटा का स्वागत किया। कार्यशाला के पहले दिन जेएमएस संपादकीय टीम द्वारा कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। प्रो. जोहान फोर्टवेंजेल ने “जेएमएस में शोध प्रकाशन” विषय पर सत्र का संचालन करते हुए प्रभावशाली अकादमिक शोध के प्रकाशन से जुड़ी अपेक्षाओं और प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, “हर संपादक रोचक और प्रभावशाली शोध को प्रकाशित करना चाहता है। हमारा प्रयास लेखकों को उनके शोध-पत्र से सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने और उसे उसके सर्वोत्तम स्वरूप तक पहुंचाने में सहायता करना है।” प्रो. क्लाउडिया गैबियोनेटा ने “सैद्धांतिक योगदान का निर्माण” विषय पर सत्र लिया और ऐसे शोध की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जो केवल अनुभवजन्य निष्कर्षों तक सीमित न रहकर ज्ञान के क्षेत्र को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा, “सैद्धांतिक योगदान का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि आपका अध्ययन अवधारणाओं, अवधारणाओं के बीच संबंधों अथवा साहित्य में प्रासंगिक सिद्धांतों के बारे में हमारे ज्ञान को बदलता, चुनौती देता या मूल रूप से आगे बढ़ाता है।”
प्रो. शमीन प्रशांतम ने “संशोधन और पुनः प्रस्तुति की प्रक्रिया को समझना” विषय पर सत्र का संचालन किया और समीक्षकों से प्राप्त सुझावों एवं प्रतिक्रियाओं के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “आपको लग सकता है कि शोध-पत्र जमा करने के बाद वह तैयार हो गया है, लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता। इसमें समय लगता है और प्राप्त प्रतिक्रिया के साथ गंभीरता से जुड़ना आपके विचार को एक पूर्ण शोध-पत्र के रूप में विकसित करने में सहायक होता है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन का प्रमुख आकर्षण “कैरियर पर चिंतन और प्रकाशन की भूमिका” विषय पर आयोजित जेएमएस पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन एक्सएलआरआई, जमशेदपुर के प्रो. अब्दुल कादिर ने किया। पैनल में जर्नल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ के प्रधान संपादक प्रो. जोहान फोर्टवेंजेल, सह-संपादक प्रो. क्लाउडिया गैबियोनेटा और प्रो. शमीन प्रशांतम, एक्सएलआरआई दिल्ली-एनसीआर के डीन (अकादमिक्स) प्रो. मुनीश कुमार ठाकुर, एक्सएलआरआई जमशेदपुर के प्रो. संजीव वार्ष्णेय तथा एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. टीना के. स्टीफन शामिल रहे। चर्चा में अकादमिक करियर, विद्वत्तापूर्ण प्रकाशन और पेशेवर एवं शोध यात्राओं को आकार देने में प्रकाशनों की भूमिका पर विविध दृष्टिकोण साझा किए गए। कार्यक्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण हार्वर्ड बिज़नेस इम्पैक्ट के वरिष्ठ रणनीतिक संबंध प्रबंधक अमित सिद्धार्थ द्वारा आयोजित “कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कक्षा में मानवीय बढ़त” विषय पर सत्र रहा। इस सत्र में तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम होते शैक्षणिक परिवेश में मानवीय क्षमताओं, सीखने और आपसी संवाद की निरंतर प्रासंगिकता पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में अकादमिक लेखन, शोध प्रस्तुतियों और शैक्षणिक कल्याण पर भी सत्र आयोजित किए गए। इसके बाद “पीएचडी का अनकहा पाठ्यक्रम” विषय पर शोधार्थियों के पैनल का आयोजन हुआ, जिसमें औपचारिक अकादमिक आवश्यकताओं से परे डॉक्टोरल शिक्षा को आकार देने वाले अनुभवों और सीख पर चर्चा की गई। दो दिवसीय जेएमएस प्रकाशन कार्यशाला ने एक्सएलआरआई की अपने शोध पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा डॉक्टोरल शोधार्थियों को वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित अकादमिक विशेषज्ञों और समकालीन शोध प्रक्रियाओं से जुड़ने के सार्थक अवसर प्रदान करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

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