युवा मांगे शिक्षा में सुधार और रोजगार, सरकार लाचार- धर्मेंद्र कुमार
भारत की युवाओं की आबादी को दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त मानी जाती है। देश में 65% आबादी 35 साल से कम है। लेकिन जब यही ताक़त शिक्षा और रोजगार की कमी से जूझती है, तो यह युवाओं के लिए अवसर से अधिक चुनौती बन जाती है। आज देश का युवा वर्ग सरकार से लगातार यह सवाल पूछ रहा है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्थायी रोजगार क्यों नहीं मिल पा रहा है? भारत में शिक्षा और रोजगार की स्थिति को लेकर ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि सुधार के बावजूद चुनौतियाँ गंभीर हैं—14.67 लाख स्कूलों में से केवल 69.9% में कंप्यूटर और 67.4% में इंटरनेट है, जबकि सरकारी नौकरियों में लगभग 6 लाख पद रिक्त पड़े हैं। यह स्थिति युवाओं की मांगों को और अधिक वैध बनाती है

युवा मांगे शिक्षा में सुधार और रोजगार, सरकार लाचार- धर्मेंद्र कुमार
भारत की युवाओं की आबादी को दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त मानी जाती है। देश में 65% आबादी 35 साल से कम है। लेकिन जब यही ताक़त शिक्षा और रोजगार की कमी से जूझती है, तो यह युवाओं के लिए अवसर से अधिक चुनौती बन जाती है। आज देश का युवा वर्ग सरकार से लगातार यह सवाल पूछ रहा है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्थायी रोजगार क्यों नहीं मिल पा रहा है? भारत में शिक्षा और रोजगार की स्थिति को लेकर ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि सुधार के बावजूद चुनौतियाँ गंभीर हैं—14.67 लाख स्कूलों में से केवल 69.9% में कंप्यूटर और 67.4% में इंटरनेट है, जबकि सरकारी नौकरियों में लगभग 6 लाख पद रिक्त पड़े हैं। यह स्थिति युवाओं की मांगों को और अधिक वैध बनाती है।
शिक्षा व्यवस्था की खामियां
शिक्षा को लेकर सबसे बड़ी समस्या गुणवत्ता और अवसर की असमान वितरण का है। महानगरों और निजी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को आधुनिक तकनीक, बेहतर शिक्षक और संसाधन मिलते हैं, जबकि ग्रामीण और छोटे कस्बों के छात्र बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहते हैं। पाठ्यक्रम अभी भी पुराना है, जो बाज़ार की मांग और नई तकनीकी कौशल से मेल नहीं खाता। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम सीमित हैं, जिससे छात्र डिग्री तो हासिल कर लेते हैं लेकिन नौकरी के लिए तैयार नहीं हो पाते। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षक की कमी और ढांचे की जर्जर स्थिति शिक्षा को और कमजोर करती है। आपको यह जानना जरुरी है कि देश भर के 1.52 लाख स्कूलों में बिजली नहीं, और दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय सिर्फ 40% स्कूलों में हैं। वहीं 69.9% स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है जबकि 67.4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है। शिक्षा व्यवस्था ती सबसे बड़ी कमी प्रतियोगी परीक्षाओं के लगातार पेपर लीक होना है। जिसको लेकर छात्र आंदोलित हैं।
रोजगार का संकट
देश में हर साल लाखों युवा स्नातक होते हैं, लेकिन रोजगार के अवसर उतनी तेजी से नहीं बढ़ते। औद्योगिक विकास की धीमी गति और निजी क्षेत्र में भर्ती की सीमितता बेरोजगारी को बढ़ा रही है। सरकारी नौकरियों की संख्या लगातार घट रही है, और जो हैं भी, उनमें भर्ती प्रक्रिया लंबी और जटिल है। सरकार द्वारा स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने की बातें तो होती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर पूंजी, मार्गदर्शन और सुरक्षा का अभाव है। देश के निर्माण उद्धयोग क्षेत्र में लगातार गिरादच दर्ज की जा रही है। आपको बता दे कि सरकार की विभिन्न (SSC, रेलवे, UPSC, बैंकिंग, रक्षा, पुलिस और शिक्षा विभाग) में कुल छह लाख पद रिक्त है। लेकिन सरकार इन पदों पर भर्ती को लेकर गंभीर नहीं दिखती है। नौकरियों के लिए ना तो समय पर परीक्षाएं होती हैं और ना ही समय पर रिजल्ट आता है। मजे की बात यह है कि रिजल्ट आने से पहले ही उसमें हुई गड़बड़ियों की खबरें आती हैं।
सरकार की लाचारी
सरकारें योजनाओं और घोषणाओं में तो सक्रिय दिखती हैं, लेकिन अमल के स्तर पर नाकामी साफ झलकती है। शिक्षा सुधार के नाम पर नई नीतियां आती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन अधूरा रह जाता है। रोजगार सृजन के लिए “मेक इन इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” जैसी योजनाएं शुरू हुईं, परंतु उनका लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच पाया। बेरोजगारी दर में कमी लाने के बजाय यह समस्या और गहरी होती जा रही है।
युवाओं की आवाज
आज का युवा केवल नौकरी नहीं चाहता, बल्कि सम्मानजनक अवसर और सुरक्षित भविष्य चाहता है। वह चाहता है कि शिक्षा उसे केवल डिग्री न दे, बल्कि कौशल और आत्मनिर्भरता भी दे। रोजगार केवल जीविका का साधन न हो, बल्कि समाज में योगदान का अवसर बने।
भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसका युवा वर्ग है। यदि शिक्षा और रोजगार की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह पूंजी बोझ में बदल सकती है। सरकार को चाहिए कि वह घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाए। शिक्षा को आधुनिक और व्यावहारिक बनाए। कौशल विकास को प्राथमिकता दे। रोजगार सृजन के लिए उद्योग और उद्यमिता को वास्तविक समर्थन दे। युवाओं की मांगें जायज़ हैं और उनकी आवाज़ को अनसुना करना देश के भविष्य को खतरे में डालना है। आज आवश्यकता है कि सरकार अपनी लाचारी छोड़कर युवा शक्ति को अवसर और दिशा दे, ताकि भारत वास्तव में विश्व की अग्रणी शक्ति बन सके।




