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प्रकृति की पाठशाला बना ‘मड एंड मीडोज़’, भविष्य के शिक्षकों ने सीखे सतत जीवनशैली के गुर

विश्व पर्यावरण दिवस पर अनूठी पहल: डी.बी.एम.एस. कॉलेज के विद्यार्थियों ने किताबों से दूर, खेत-खलिहानों में जानी पर्यावरण की हकीकत

प्रकृति की पाठशाला बना ‘मड एंड मीडोज़’, भविष्य के शिक्षकों ने सीखे सतत जीवनशैली के गुर

विश्व पर्यावरण दिवस पर अनूठी पहल: डी.बी.एम.एस. कॉलेज के विद्यार्थियों ने किताबों से दूर, खेत-खलिहानों में जानी पर्यावरण की हकीकत



जमशेदपुर- जब बात पर्यावरण को बचाने की हो, तो सिर्फ भाषण नहीं बल्कि धरातल पर उतरकर कुछ सीखना जरूरी हो जाता है. विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के मौके पर डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की एनएसएस इकाई और इको क्लब ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया. कॉलेज के बी.एड. के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और मैनेजमेंट ने पहाड़भांगा स्थित ‘मड एंड मीडोज़ फार्म’ का एक जीवंत शैक्षणिक दौरा किया. मकसद साफ था— आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने वाले भविष्य के शिक्षक खुद प्रकृति के सबसे करीब जाकर सतत जीवनशैली (Sustainable Lifestyle) को समझ सकें

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हार्वर्ड के स्कॉलर से सीखी 'परमाकल्चर' की ककहरा

इस दौरे की सबसे बड़ी खासियत रही मशहूर शिक्षाविद् और पर्यावरणविद् डॉ. विक्रांत तिवारी से विद्यार्थियों का सीधा संवाद. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. और आईआईएम कोलकाता के पूर्व छात्र डॉ. तिवारी ने चमक-धमक वाली जिंदगी से इतर मिट्टी से जुड़ने का महत्व समझाया. उन्होंने छात्रों को 'परमाकल्चर' (स्थायी कृषि) के बारे में बताते हुए कहा:
​सच्चा विकास वह नहीं जो प्रकृति को नष्ट करे, बल्कि वह है जो प्रकृति के साथ कदम से कदम मिलाकर चले. पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर होना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है

​गोबर, मिट्टी और हल्दी से सजी 7 एकड़ की 'हरित क्रांति'

सात एकड़ में फैला 'मड एंड मीडोज़ फार्म' इस बात का जीता-जागता सबूत है कि पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक सोच मिलकर क्या कमाल कर सकते हैं. विद्यार्थियों ने यहाँ देखा कि कैसे

प्राकृतिक घरों का निर्माण फार्म के भवन सीमेंट-कंक्रीट से नहीं, बल्कि मिट्टी, हल्दी और गोबर जैसी प्राकृतिक चीजों से बने हैं, जो गर्मियों में भी ठंडे रहते हैं.

​विविधता में एकता: यहाँ एक तरफ धान, दाल, आलू, प्याज और हरी सब्जियाँ लहलहा रही हैं, तो दूसरी तरफ रुद्राक्ष, कॉफी, रक्त चंदन और महोगनी जैसे दुर्लभ पौधों का संसार बसा है.

​सिर्फ देखा नहीं, धरती को हरा-भरा करने में भी बंटाए हाथ

विद्यार्थी यहाँ सिर्फ दर्शक बनकर नहीं आए थे. पर्यावरण को अपनी तरफ से रिटर्न गिफ्ट देते हुए छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने फार्म में आम, अमरूद, लीची, कटहल और चंपा जैसी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया. युवाओं ने यह संदेश दिया कि हर एक पौधा आने वाले कल की सांस है

​मैनेजमेंट की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह

​विद्यार्थियों के इस जमीनी अनुभव का हिस्सा बनने कॉलेज का पूरा नेतृत्व दल भी पहाड़ भांगा पहुँचा था. इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:

​बी. आर. चंद्रशेखर (चेयरपर्सन)
​ललिता चंद्रशेखर (एडमिनिस्ट्रेशन चेयरपर्सन)
​प्रिया धर्मराजन (सचिव)
​सुधा दिलीप (सह-सचिव)
​डॉ. जूही समर्पिता (प्राचार्या)
​पूनम कुमारी (एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी)

स्वाद सेहत का: खेत के ताज़ा जैविक भोजन से हुआ सफर का अंत

​इस शानदार और ज्ञानवर्धक यात्रा का समापन बेहद स्वादिष्ट रहा. सभी प्रतिभागियों को फार्म में ही जैविक (Organic) तरीके से उगाई गई फसलों और सब्जियों से तैयार ताज़ा अल्पाहार परोसा गया. बिना किसी केमिकल के तैयार इस भोजन का स्वाद चखकर विद्यार्थियों ने जाना कि असली सेहत प्रकृति की गोद में ही है. यह दौरा किताबों से परे, जिंदगी को बेहतर बनाने वाली एक ऐसी सीख दे गया जो इन भावी शिक्षकों के साथ ताउम्र रहेगी.

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