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नेचर संस्था द्वारा जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं हेतु विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर सीड बॉल निर्माण कार्यशाला आयोजित

झारखंड। उच्च शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेचर (Nature) संस्था एवं अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान, बागबेड़ा द्वारा संयुक्त रूप से जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की इतिहास एवं भूगोल विषय की छात्राओं के लिए विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान प्रांगण में प्रोफेसर के कमलेंदु , डॉ. विनीता परमार, डॉ. कविता परमार, सी. एस. पी. सिंह तथा संजय सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया

नेचर संस्था द्वारा जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं हेतु विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर सीड बॉल निर्माण कार्यशाला आयोजित

जमशेदपुर- झारखंड उच्च शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेचर (Nature) संस्था एवं अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान, बागबेड़ा द्वारा संयुक्त रूप से जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की इतिहास एवं भूगोल विषय की छात्राओं के लिए विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान प्रांगण में प्रोफेसर के कमलेंदु , डॉ. विनीता परमार, डॉ. कविता परमार, सी. एस. पी. सिंह तथा संजय सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यह इंटर्नशिप कार्यक्रम प्राध्यापक एवं जिला पार्षद डॉ. कविता परमार के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर उद्घाटन समारोह के साथ छात्राओं के लिए सीड बॉल (बीज गेंद) निर्माण कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यशाला में छात्राओं को स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के बीजों, मिट्टी और जैविक खाद की सहायता से सीड बॉल तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि वर्षा ऋतु के दौरान इन सीड बॉल्स को अनुपयोगी एवं खाली भूमि पर फेंककर हरित आवरण बढ़ाने तथा जैव विविधता संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल निर्माण में भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को केवल पाठ्यपुस्तक आधारित अध्ययन तक सीमित न रखकर उन्हें क्षेत्रीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संरचनाओं तथा सतत विकास की अवधारणाओं से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है।
इंटर्नशिप के अंतर्गत इतिहास विषय की छात्राओं को चार समूहों में विभाजित किया गया है। ये समूह सिंहभूम जिले के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में क्षेत्र की भूमिका, जनजातीय इतिहास, पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक स्थलों, स्थानीय संस्कृति, लोक संस्कृति, शिक्षा के विकास, प्रशासनिक संरचना तथा सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विभिन्न विषयों का अध्ययन करेंगे। छात्राएं क्षेत्रीय भ्रमण, अभिलेखीय अध्ययन, साक्षात्कार, मौखिक इतिहास संग्रहण तथा स्थानीय समुदायों से संवाद के माध्यम से सिंहभूम की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण करेंगी।

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भूगोल विषय की छात्राओं के लिए तैयार किए गए सभी प्रोजेक्ट संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। छात्राएं जल संसाधन प्रबंधन, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी एवं ग्रामीण पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभाव, हरित आवागमन, सतत आजीविका, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य एवं पोषण तथा समुदाय आधारित विकास जैसे विषयों पर क्षेत्रीय अध्ययन करेंगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों की स्थिति का मूल्यांकन करना तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सुझाव विकसित करना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान में विशेष शैक्षणिक सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनमें इतिहास लेखन, शोध पद्धति, सांस्कृतिक अध्ययन, स्थानीय प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, सामाजिक न्याय, महिला नेतृत्व तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे।

उदघाटन के अवसर पर डॉ. कविता परमार ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज और उसके इतिहास से जोड़ना है। सिंहभूम का इतिहास, संस्कृति और जनजातीय विरासत अत्यंत समृद्ध है, वहीं सतत विकास की चुनौतियाँ और संभावनाएँ भी अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में यह इंटर्नशिप छात्राओं को शोध, विश्लेषण और सामाजिक समझ विकसित करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगी।
डॉ. विनीता परमार ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी ज्ञान, नवाचार अथवा परिवर्तन की शुरुआत प्रश्नों से होती है। जब व्यक्ति अपने आसपास की परिस्थितियों, समाज, पर्यावरण और इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखना शुरू करता है, तभी उसके मन में जिज्ञासाएँ और प्रश्न उत्पन्न होते हैं। यही प्रश्न आगे चलकर परिकल्पनाओं का रूप लेते हैं और व्यक्ति को शोध एवं ज्ञान-सृजन की दिशा में अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप का उद्देश्य केवल जानकारी एकत्र करना नहीं, बल्कि छात्राओं में जिज्ञासा, विश्लेषणात्मक चिंतन और शोधपरक दृष्टिकोण विकसित करना है, ताकि वे समाज की वास्तविकताओं को समझते हुए सार्थक निष्कर्षों तक पहुँच सकें।
नेचर संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें अनुभवात्मक अधिगम, सामुदायिक सहभागिता, स्थानीय ज्ञान और क्षेत्रीय अध्ययन को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया गया है।
प्रोफेसर के कमलेंदु ने छात्राओं को शुभकामनाएँ देते हुए क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान अधिक से अधिक विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास तथा सामाजिक समझ को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह कार्यक्रम दो माह तक संचालित होगा। इस दौरान छात्राएं विभिन्न विषयगत परियोजनाओं पर कार्य करते हुए अपनी अध्ययन रिपोर्ट, क्षेत्रीय दस्तावेज, शोध आलेख एवं प्रस्तुतीकरण तैयार करेंगी।
उदघाटन सत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, नेचर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम के प्रति छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और उन्होंने इसे अपने शैक्षणिक, शोधात्मक एवं व्यक्तिगत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।

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