कांग्रेस को क्यों है भरोसे का संकट ? –धर्मेंद्र कुमार
भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में सबसे बड़ा सवाल येही है कि स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कांग्रेस पार्टी को आज भरोसे का संकट क्यों है? वह जनता का विश्वास क्यों नहीं जीत पा रही है, जबकि देश में वर्तमान सरकार के खिलाफ लोगों में भारी असंतोष और नाराजगी हैं। महंगाई, बेरोजगारी, किसान के समक्ष संकट और पेपर लीक जैसी घटनाएं जनता को गहराई से प्रभावित कर रही हैं। फिर भी कांग्रेस को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है

कांग्रेस को क्यों है भरोसे का संकट ? –धर्मेंद्र कुमार
भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में सबसे बड़ा सवाल येही है कि स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कांग्रेस पार्टी को आज भरोसे का संकट क्यों है? वह जनता का विश्वास क्यों नहीं जीत पा रही है, जबकि देश में वर्तमान सरकार के खिलाफ लोगों में भारी असंतोष और नाराजगी हैं। महंगाई, बेरोजगारी, किसान के समक्ष संकट और पेपर लीक जैसी घटनाएं जनता को गहराई से प्रभावित कर रही हैं। फिर भी कांग्रेस को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। वहीं अनजाने में किए गए एक छोटे से प्रयास से कॉकरोच जनता पार्टी को इतने कम समय में सोशल मीडिया पर जो प्रचंड जनसमर्थन मिल रहा है। वो इस बात के संकेत है कि सरकार और सिस्टम के खिलाफ लोगों में आक्रोश और नाराजगी है, ऐसे में लोगों को एक भरोसेमंद विकल्प की तलाश है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों देशवासियों को कांग्रेस पर भरोसा नहीं हो पा रहा है ? क्या कांग्रेस के बड़े नेता इस विषय पर चिंतन कर संगठन एवं नीतियों में बदलाव के पक्षधर है या फिर वही घिसी पीटी हुई नीति व विचारधारा के साथ ही रहने को मजबूर है क्योंकि वह उनके वोट बैंक की दृष्टिकोण से उन्हें सुट करता है।
संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व संकट
कांग्रेस का सबसे बड़ा संकट उसके संगठन और नेतृत्व में है। पार्टी में बार बार टूट फूट, गुटबाजी और नेतृत्व पर उठते सवाल के कारण जनता को लगता है कि कांग्रेस जब खुद अपने भीतर स्थिरता नहीं ला पा रही, तो देश को कैसे स्थिरता दे पाएगी? कहने को तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष 80 वर्षीय मल्लिका अर्जुन खडगे हैं। लेकिन अंतिम निर्णय गांधी परिवार का ही होता है यह बात भी दीगर है। चाहे केरलम् में मुख्यमंत्री बनाने की बात हो या फिर कर्नाटक में सरकार के नेतृत्व परिवर्तन की बात हो अंतिम निर्णय राहुल गांधी का ही मान्य हुआ। वहीं पार्टी में मौजूद गणेश परिक्रमा करने वाले एवं चाटुकारिता मंडली के सदस्यों के प्रभाव में लिये गए कुछ निर्णय से पार्टी नेतृत्व के अपरिपक्व होने के संकेत मिलते हैं। वहीं कुछ निर्णयों से कांग्रेंस पर बीजेपी के बी टीम होने के आरोप भी चस्पा हुए। जबकि कुछ एक निर्णय से पार्टी को काफी नुकसान हुआ, बावजूद सुधार के पार्टी पुरानी पटरी पर ही चल रही है। कांग्रेस युवाओं को आगे बढ़ाने के बजाए बुजूर्ग नेताओं के आसरे ही आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है, जबकि आज का युवा वर्ग को किसी युवा नेतृत्व की तलाश है जो उनकी भावनां को समझ सके औऱ उनके लिए एक बेहतर वातावरण तैयार करे। यही कारण है कि लोग कांग्रेस की ओर आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं।
कमजोर मीडिया प्रबंधन एवं रणनीति
वर्तमान भारतीय राजनीति में मीडिया प्रबंधन अब चुनावी रणनीति का सबसे निर्णायक हथियार बन चुका है। भाजपा ने इसे एक केंद्रीकृत और पेशेवर अभियान के रूप में गढ़ा है। जहां विज्ञापनों की बाढ़, भावनात्मक अपील और निरंतर संदेश प्रसार मतदाताओं पर गहरी छाप छोड़ती है। वहीं इसके विपरीत, कांग्रेस का मीडिया प्रबंधन अक्सर प्रतिक्रियात्मक और असंगठित दिखाई देता है। भाजपा की रणनीति में माइक्रो-टार्गेटिंग और भावनात्मक विविधता का सुनियोजित प्रयोग है, जबकि कांग्रेस अभी भी सीमित विज्ञापनों और सूचनात्मक पोस्ट्स तक सिमटी हुई है। हालांकि, हाल के अभियानों में कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर उल्लेखनीय बढ़त दिखाई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुधार की संभावना मौजूद है। स्थायी और दीर्घकालिक रणनीति के अभाव में कांग्रेस की मीडिया पहुंच भाजपा सामने अब कमजोर प्रतीत होती है। यही अंतर भारतीय राजनीति में जनमत निर्माण की असली चुनौती है।
वैकल्पिक राजनीति का अभाव
कांग्रेस जनता की नाराजगी को सकारात्मक विकल्प में बदलने में विफल रही है। केवल विरोध करना पर्याप्त नहीं है। जनता को यह भरोसा चाहिए कि कांग्रेस सत्ता में आकर ठोस नीतियां लागू करेगी। लेकिन कांग्रेस की रणनीति अक्सर प्रतिक्रियात्मक होती है, दूरदर्शी नहीं। कांग्रेस का भरोसे का संकट केवल जनता की नाराज़गी की कमी से नहीं, बल्कि विश्वसनीय नेतृत्व, ठोस नीतियों और संगठित आंदोलन की कमी से पैदा हुआ है। महंगाई, बेरोजगारी, किसान संकट और पेपर लीक जैसी समस्याएं जनता को विचलित करती हैं, लेकिन कांग्रेस इन मुद्दों को जनसमर्थन में बदलने की राजनीतिक क्षमता नहीं दिखा पा रही।
जब तक कांग्रेस अपने संगठन को मज़बूत नहीं करती, स्पष्ट वैकल्पिक नीतियां नहीं देती और जनता को यह भरोसा नहीं दिलाती कि वह केवल विरोध नहीं बल्कि समाधान भी दे सकती है, वहीं युवाओं को भरोसा दिलाना होगा कि सत्ता में आने के साथ ही वह युवाओं को रोजगार के साथ ही उनके सुनहरे एवं सुरक्षित भविष्य के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार करेगी। तभी कांग्रेस लोगों का विशेषकर युवाओं का भरोसा जीत पाएगी।



