टाटा स्टील जमशेदपुर पर कस सकता है शिकंजा प्रदूषण बोर्ड को कानूनी नोटिस, सीटीओ रद्द करने की मांग
टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट से जुड़े पर्यावरणीय नियमों और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर मामला गंभीर होता दिख रहा है. जमशेदपुर निवासी रेयाज शरीफ की ओर से अधिवक्ता ए के श्रीवास्तव ने 3 अक्टूबर को झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में टाटा स्टील के मौजूदा CTO को तत्काल रद्द करने और दिसंबर 2026 के बाद इसके नवीनीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है

टाटा स्टील जमशेदपुर पर कस सकता है शिकंजा प्रदूषण बोर्ड को कानूनी नोटिस, सीटीओ रद्द करने की मांग
जमशेदपुर- टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट से जुड़े पर्यावरणीय नियमों और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की शर्तों के कथित उल्लंघन को लेकर मामला गंभीर होता दिख रहा है. जमशेदपुर निवासी रेयाज शरीफ की ओर से अधिवक्ता ए के श्रीवास्तव ने 3 अक्टूबर को झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में टाटा स्टील के मौजूदा CTO को तत्काल रद्द करने और दिसंबर 2026 के बाद इसके नवीनीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो झारखंड हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की जा सकती है.
पुनर्वास की शर्तों पर उठाए सवाल:
कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 17 दिसंबर 2021 को जारी सीटीओ में पहले से लागू कुछ अनिवार्य शर्तों, खासकर प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों को हटा दिया गया. नोटिस में 1 अप्रैल 2008 की एनओसी और 24 मई 2012 के सीटीओ का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास की प्रगति रिपोर्ट हर तीन महीने में JSPCB को देना अनिवार्य था. इसमें यह भी प्रावधान था कि निर्धारित समय पर पुनर्वास नहीं होने या शैक्षणिक संस्थानों एवं मानव बस्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की स्थिति में सहमति रद्द की जा सकती है. नोटिस में दावा किया गया है कि 2012 से 2026 के बीच कथित गैर-अनुपालन के बावजूद सीटीओ का नवीनीकरण होता रहा.
प्रदूषण और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी सवाल:
नोटिस में प्लांट से जुड़े वायु प्रदूषण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं. इसमें 24 घंटे एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, उत्सर्जन नियंत्रण उपकरणों को चालू रखने, अधिकतम सामग्री की ढुलाई रेलवे वैगनों के जरिए करने और ट्रैफिक डी-कंजेशन प्लान लागू करने जैसी शर्तों का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि शहर में धूल नियंत्रण के लिए कन्वेयर सिस्टम और मैकेनाइज्ड वैक्यूम क्लीनिंग जैसे उपाय प्रभावी तरीके से लागू नहीं किए जा रहे हैं.
भूमि और जनसुनवाई को लेकर भी आपत्ति:
नोटिस में बारी मैदान, आसपास के शैक्षणिक संस्थानों और श्रमिक कॉलोनियों का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि कार्य सीमा के विस्तार में ‘नो एडिशनल लैंड रिक्वायरमेंट’ की शर्त का उल्लंघन हुआ.
इसके अलावा, नोटिस में आरोप है कि प्रभावित लोगों से आपत्तियां आमंत्रित किए बिना और उचित जनसुनवाई प्रक्रिया के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. दावा किया गया है कि करीब 14 वर्ष बीतने के बावजूद संबंधित क्षेत्रों का पूर्ण पुनर्वास नहीं हो पाया है.
PM10 स्तर को लेकर दावा:
कानूनी नोटिस में क्षेत्र में PM10 का स्तर 218 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचने का दावा किया गया है. नोटिस के अनुसार यह 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के निर्धारित मानक से अधिक है.
कानूनी नोटिस के जरिए JSPCB से मांग की गई है कि:
* पुनर्वास से जुड़ी शर्तों को सख्ती से लागू कराया जाए.
* 200 एकड़ से अधिक अधिग्रहित भूमि को बहाल करने की दिशा में कार्रवाई हो.
* वायु और ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए.
* टाटा स्टील की संबंधित रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी जाए.
* CTO के कथित उल्लंघनों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए.




