50 हजार मटकों से बन रहा काशीडीह का ठाकुर प्यारा सिंह धुरंधर सिंह दुर्गापूजा पंडाल, श्रद्धालुओं को लुभाएगा इस बार
शहर की दुर्गापूजा अपनी भव्य और अनोखी सजावट के लिए जानी जाती है इस बार काशीडीह का दुर्गा पूजा पंडाल अपनी खास थीम के कारण आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है. यहां करीब 50 हजार मिट्टी के मटकों से भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है. निर्माण कार्य दिन-रात तेजी से जारी है. काशीडीह में इस बार मिट्टी के मटकों को पंडाल की सजावट का मुख्य आधार बनाया गया है. हजारों मटकों को एक खास पैटर्न में लगाकर पंडाल का आकार दिया जा रहा है. तैयार होने के बाद इसका स्वरूप सामान्य पूजा पंडालों से अलग नजर आएगा. आयोजकों का उद्देश्य केवल भव्य सजावट करना नहीं, बल्कि मिट्टी के मटकों के जरिए पुरानी भारतीय जीवनशैली और परंपरा को लोगों के सामने लाना भी है

50 हजार मटकों से बन रहा काशीडीह का ठाकुर प्यारा सिंह धुरंधर सिंह दुर्गापूजा पंडाल, श्रद्धालुओं को लुभाएगा इस बार
जमशेदपुर- शहर की दुर्गापूजा अपनी भव्य और अनोखी सजावट के लिए जानी जाती है इस बार काशीडीह का दुर्गा पूजा पंडाल अपनी खास थीम के कारण आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है. यहां करीब 50 हजार मिट्टी के मटकों से भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है. निर्माण कार्य दिन-रात तेजी से जारी है.
काशीडीह में इस बार मिट्टी के मटकों को पंडाल की सजावट का मुख्य आधार बनाया गया है. हजारों मटकों को एक खास पैटर्न में लगाकर पंडाल का आकार दिया जा रहा है. तैयार होने के बाद इसका स्वरूप सामान्य पूजा पंडालों से अलग नजर आएगा. आयोजकों का उद्देश्य केवल भव्य सजावट करना नहीं, बल्कि मिट्टी के मटकों के जरिए पुरानी भारतीय जीवनशैली और परंपरा को लोगों के सामने लाना भी है.
फ्रिज से पहले मटका था पानी ठंडा रखने का साधन
आज पानी ठंडा रखने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल आम है, लेकिन पहले मिट्टी का मटका ही पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने का प्रमुख साधन था. गर्म इलाकों में आज भी कई जगह मटकों का इस्तेमाल किया जाता है. काशीडीह का पंडाल इसी पुरानी परंपरा को दुर्गा पूजा की थीम से जोड़ने की कोशिश है.
आधुनिक दौर में पुरानी संस्कृति की झलक
आज जहां पूजा पंडालों में आधुनिक तकनीक, रोशनी और आकर्षक सजावट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वहीं काशीडीह में 50 हजार मटकों के जरिए पारंपरिक संस्कृति को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है.
दिन-रात जुटे हैं 60 कारीगर
दुर्गापूजा नजदीक आने के साथ पंडाल निर्माण का काम तेज हो गया है. कारीगर और पूजा कमेटी से जुड़े लोग दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. एक-एक मटके को तय पैटर्न के अनुसार लगाया और सजाया जा रहा है. पंडाल पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए यह खास आकर्षण बन सकता है.मिट्टी के मटकों से तैयार यह अनोखी थीम काशीडीह की दुर्गापूजा को इस बार खास पहचान देने की कोशिश है.



