झारखंड राज्य सूचना आयोग के कामकाज एवं सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सवाल
झारखंड राज्य सूचना आयोग के कामकाज एवं सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं

झारखंड राज्य सूचना आयोग के कामकाज एवं सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सवाल
10 जून 2026 को झारखंड में 4 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हुई तथा 1 जुलाई 2026 को चारों सूचना आयुक्तों को शपथ दिलाई गई।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अधिकार देता है। ऐसे में झारखंड राज्य सूचना आयोग के वर्तमान कामकाज को लेकर आम नागरिकों के मन में कुछ स्वाभाविक सवाल उठ रहे हैं।
वेतन एवं सुविधाओं के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक सूचना आयुक्त को प्रतिमाह लगभग—
▪️ बेसिक वेतन — ₹2,25,000
▪️ DA — ₹1,35,000
▪️ HRA — ₹45,000
कुल — ₹4,05,000 प्रतिमाह प्रति सूचना आयुक्त
इसके अतिरिक्त उपलब्ध नियमों/जानकारी के अनुसार अन्य सरकारी सुविधाएं भी देय हो सकती हैं, जैसे—
1️⃣ चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति
2️⃣ चालक सहित सरकारी वाहन
3️⃣ आवास पर समाचार-पत्र की सुविधा
4️⃣ मोबाइल फोन खरीदने हेतु निर्धारित राशि — ₹45,000 तक
5️⃣ प्रतिमाह मोबाइल/टेलीफोन बिल का भुगतान
*अब जनता के कुछ सीधे लेकिन महत्वपूर्ण सवाल हैं*—
क्या द्वितीय अपील वादों और शिकायत वादों की नियमित सुनवाई हो रही है❓
नवनियुक्त सूचना आयुक्तों के समक्ष अब तक कितने मामलों की सुनवाई हुई❓
कितने द्वितीय अपील वादों एवं शिकायत वादों का निष्पादन किया गया❓
यदि सुनवाई एवं निष्पादन अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है, तो इसके प्रशासनिक कारण क्या हैं❓
1 जुलाई 2026 को शपथ ग्रहण के बाद से सूचना आयोग के कामकाज एवं लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है❓
📢 हमारी मांग
जब एक ओर सूचना आयुक्तों के वेतन एवं सरकारी सुविधाओं पर करदाताओं के पैसे से सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तो दूसरी ओर नागरिकों द्वारा दायर द्वितीय अपील एवं शिकायत वादों का समयबद्ध निष्पादन भी सुनिश्चित होना चाहिए।
हम किसी सूचना आयुक्त अथवा सरकार पर व्यक्तिगत रूप से कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं और न ही किसी की नीयत पर प्रश्न उठा रहे हैं।
हम केवल सार्वजनिक धन के उपयोग, सूचना के अधिकार और संस्थागत जवाबदेही के संबंध में पारदर्शी जानकारी चाहते हैं।
सरकार एवं झारखंड राज्य सूचना आयोग से विनम्र आग्रह है कि सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए—
✅ वर्तमान में कितने द्वितीय अपील एवं शिकायत वाद लंबित हैं?
✅ अब तक कितने मामलों की सुनवाई हुई?
✅ कितने मामलों का निष्पादन हुआ?
✅ सुनवाई में यदि कोई विलंब है तो उसके कारण क्या हैं?
✅ लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए क्या समयबद्ध कार्ययोजना है?
✅ सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं पर अब तक कितना सार्वजनिक धन व्यय हुआ है?
जनता का पैसा → जनता की संस्था → जनता के प्रति जवाबदेही
यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार एवं सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा एक लोकतांत्रिक प्रश्न है।
उक्त जानकारी दीपेश निराला अध्यक्ष हमर अधिकार मंच रांची सिटीजन फोरम ने दी है




