अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर डालसा सचिव बोले , बुजुर्ग बोझ नहीं अनुभव की पूंजी
अंतराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर ओल्ड एज होम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने कहा कि हम अपने बुजुर्गों के साथ जिस उदासीनता से पेश आ रहे हैं, वह कल हमारी अपनी बुढ़ापे की तस्वीर बनने वाली है । उन्होंने कहा कि बुजुर्ग बोझ नहीं बल्कि हमारे लिए वे अनुभव की पूंजी हैं। डालसा सचिव ने कहा कि एक अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है, जो बुजुर्गों के योगदान का सम्मान करने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर डालसा सचिव बोले , बुजुर्ग बोझ नहीं अनुभव की पूंजी

जमशेदपुर- अंतराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर ओल्ड एज होम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने कहा कि हम अपने बुजुर्गों के साथ जिस उदासीनता से पेश आ रहे हैं, वह कल हमारी अपनी बुढ़ापे की तस्वीर बनने वाली है । उन्होंने कहा कि बुजुर्ग बोझ नहीं बल्कि हमारे लिए वे अनुभव की पूंजी हैं। डालसा सचिव ने कहा कि एक अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है, जो बुजुर्गों के योगदान का सम्मान करने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।

सरकार ने 2007 में माता-पिता व वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम बनाया था, जिसके तहत संतान अपने बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं । इस कानून में यह प्रावधान भी है कि यदि कोई संतान अपने माता-पिता को संपत्ति हस्तांतरित करने के बाद उनकी उपेक्षा करती है, तो वह हस्तांतरण रद्द किया जा सकता है

हकीकत यह है कि इस कानून की जानकारी अधिकांश बुजुर्गों को है ही नहीं, और जिन्हें है भी, वे अपनी संतान के विरुद्ध अदालत जाने से हिचकते हैं । डालसा सचिव ने सभी वरिष्ठ नागरिकों से अपील किया कि वे अपनी समस्याओं को बेहिचक डालसा को बताएं उसका निःशुल्क समाधान किया जाएगा । उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार इस कानून के तहत दर्ज मामलों में से आधे से अधिक शिकायतें संपत्ति विवाद से जुड़ी होती हैं

न कि भावनात्मक उपेक्षा से । स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करें तो देश में वृद्धावस्था के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की भारी कमी है । बड़े शहरों के गिने-चुने अस्पतालों को छोड़ दें तो जिला स्तर पर वृद्धों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा लगभग नदारद हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ भी बुजुर्गों तक उस अनुपात में नहीं पहुंचता, जिस अनुपात में उन्हें जरूरत होती है । नालसा एवं झालसा के निर्देश पर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला जज अरविंद कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में डालसा द्वारा आयोजित यह विधिक जागरूकता कार्यक्रम ओल्ड एज होम बाराद्वारी और डिमना स्थित वृद्धाश्रम में भी आज के दिन दोनों जगहों पर अलग अलग संचालित किया गया । इस दौरान बुजुर्गों के स्वास्थ्य जांच के लिए दोनों जगहों पर अलग अलग मेडिकल कैम्प भी लगाया गया जिसमें मेडिकल टीम द्वारा सभी बुजुर्गों की गहनता से जांच की गई । जागरूकता कार्यक्रम के पश्चात डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने वृद्धाश्रम का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने बुजुर्गो के रहन सहन, खान पान, साफ सफाई, शयन कक्ष , किचेन आदि का अवलोकन किया और किसी भी तरह के समस्या उत्पन्न होने पर उसके समाधान के लिए डालसा कार्यालय को अवगत कराने की बात कही । कार्यक्रम को सफल बनाने में डालसा पीएलवी की अहम भूमिका रही जिनमें मुख्य रूप प्रकाश मिश्रा , नागेन्द्र कुमार, दिलीप जायशवाल, आशीष प्रजापति, जोबारानी बास्के, संजय तिवारी, बालेश्वर दास, रमन कुमार , सुनीता कुमारी, रीना तिवारी, सुनीता झा, प्रसीश मरांडी एवं मेडिकल टीम के लोग शामिल थे।



