बारीडीह हाईस्कूल में डाक विभाग का ‘डाक जागरूकता सत्र’ संपन्न, शिक्षकों ने खुलकर साझा किए अनुभव
सिंहभूम डाक मंडल के तत्वावधान में बारीडीह हाई स्कूल के सभागार में एक विशेष ‘डाक जागरूकता सत्र’ का सफल आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों एवं विद्यालय कर्मियों को डाक विभाग की आधुनिक सेवाओं, बचत योजनाओं, बीमा एवं वित्तीय अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था। डाक विभाग की ओर से रिलेशनशिप मैनेजर उज्ज्वल राज गुप्ता, उमाशंकर प्रसाद, राम प्रवेश पंडित और निशांत कुमार ने कार्यक्रम का संचालन एवं प्रतिनिधित्व किया। विद्यालय की प्राचार्या संगीता हलदर एवं कोऑर्डिनेटर प्रिया कुमारी के सक्रिय सहयोग से आयोजित इस सत्र में लगभग 50 शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा स्कूल प्रबंधन के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया

बारीडीह हाईस्कूल में डाक विभाग का ‘डाक जागरूकता सत्र’ संपन्न, शिक्षकों ने खुलकर साझा किए अनुभव


जमशेदपुर- सिंहभूम डाक मंडल के तत्वावधान में बारीडीह हाई स्कूल के सभागार में एक विशेष ‘डाक जागरूकता सत्र’ का सफल आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों एवं विद्यालय कर्मियों को डाक विभाग की आधुनिक सेवाओं, बचत योजनाओं, बीमा एवं वित्तीय अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था।


डाक विभाग की ओर से रिलेशनशिप मैनेजर उज्ज्वल राज गुप्ता, उमाशंकर प्रसाद, राम प्रवेश पंडित और निशांत कुमार ने कार्यक्रम का संचालन एवं प्रतिनिधित्व किया। विद्यालय की प्राचार्या संगीता हलदर एवं कोऑर्डिनेटर प्रिया कुमारी के सक्रिय सहयोग से आयोजित इस सत्र में लगभग 50 शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा स्कूल प्रबंधन के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सुकन्या समृद्धि और पीएलआई जैसी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम के दौरान रिलेशनशिप मैनेजर उज्ज्वल राज गुप्ता ने शिक्षकों को डाक जीवन बीमा (PLI) के विभिन्न प्रकारों—जैसे ‘संतोष’ (Endowment Assurance)—और सुकन्या समृद्धि योजना के लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए यह योजना बेहद लाभकारी है। इसके साथ ही शिक्षा बचत योजना, छात्र वित्तीय साक्षरता, ‘माई स्टैम्प’ और आधार अपडेशन जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाओं पर प्रेजेंटेशन के जरिए प्रकाश डाला गया, जिनके बारे में कई शिक्षक पहले से अनजान थे।
सकारात्मक बदलाव और पुराने अनुभवों का भावुक संवाद
सत्र केवल औपचारिक जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक खुला और संवेदनशील संवाद बन गया। परिचर्चा के दौरान शिक्षकों ने डाक विभाग के साथ अपने पुराने और नए अनुभवों को साझा किया:
एक वरिष्ठ शिक्षिका ने भावुक होते हुए साझा किया कि कैसे 1988 से वे लगातार डाकघर की योजनाओं (केवीपी, आरडी) से जुड़ी रहीं, हालांकि बीच के दौर में उन्हें परिपक्वता राशि (Maturity) लेने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़े और काफी मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने डाक विभाग से अपनी सेवाओं में मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता बनाए रखने का आग्रह किया।
अन्य शिक्षिकाओं ने पासबुक व नाम सुधार में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों और उसके बाद डाक विभाग के नए एटीएम कार्ड व सुगम डिजिटल सेवाओं से मिल रही राहत के अनुभव साझा किए।
डाक विभाग के प्रतिनिधियों ने भी पूरी संवेदनशीलता से इन बातों को सुना और स्वीकार किया कि पहले की कार्यप्रणाली में बदलाव की जरूरत थी, लेकिन अब डाक विभाग आधुनिक तकनीकों और जन-केंद्रित सेवाओं के साथ पूरी तरह नए रूप में आपके द्वार तक पहुंच रहा है।
डिजिटल फीडबैक और परस्पर सम्मान
सत्र के दौरान एक अभिनव पहल करते हुए सभी उपस्थित शिक्षकों और कर्मचारियों से ऑनलाइन माध्यम (डिजिटल फॉर्म) से सीधा फीडबैक लिया गया, ताकि सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
प्राचार्या संगीता हलदर ने डाक विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सत्र से स्टाफ को अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक वित्तीय जानकारी मिली है तथा भविष्य में भी प्रबंधन ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करेगा।
सत्र के समापन पर डाक विभाग की ओर से विद्यालय की प्राचार्या एवं कोऑर्डिनेटर को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं, विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों द्वारा हस्तनिर्मित सुंदर कलाकृतियां सभी रिलेशनशिप प्रबंधकों को सप्रेम भेंट की गईं। सौहार्दपूर्ण और आत्मीय माहौल में यह जागरूकता सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।




