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सी.एस.आई आर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में हिंदी सप्ताह समारोह का भव्य उदघाटन किया गया

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रयोगशाला के निदेशक डॉक्टर संदीप घोष चौधुरी ने की। अध्यक्षीय भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी प्रयोगशाला कर्मियों का हार्दिक अभिनंदन है। यह प्रसन्नता की बात है कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारी प्रयोगशाला द्वारा हिंदी सप्ताह समारोह दिनांक 14 सितंबर से 22 सितंबर, 2026 तक मनाया जा रहा है। हिंदी हमारी राजभाषा है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसका प्रचार-प्रसार करें और अधिक से अधिक इसका उपयोग करें। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सम्पूर्ण भारत में ऐसी कोई एक भाषा नहीं थी जो देश के अधिकांश लोगों के बीच संपर्क का माध्यम बन सकती। इसलिए, सभी प्रमुख नेताओं ने हिंदी को स्वतंत्रता आंदोलन को प्रखर बनाने के लिए एक प्रबल साधन के रूप में अपनाया और आजादी मिलने के बाद इसे सबने मिलकर राजभाषा बनाया

जमशेदपुर- आज सी.एस.आई आर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में हिंदी सप्ताह समारोह का भव्य उदघाटन किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रयोगशाला के निदेशक डॉक्टर संदीप घोष चौधुरी ने की। अध्यक्षीय भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी प्रयोगशाला कर्मियों का हार्दिक अभिनंदन है। यह प्रसन्नता की बात है कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारी प्रयोगशाला द्वारा हिंदी सप्ताह समारोह दिनांक 14 सितंबर से 22 सितंबर, 2026 तक मनाया जा रहा है।

हिंदी हमारी राजभाषा है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसका प्रचार-प्रसार करें और अधिक से अधिक इसका उपयोग करें। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सम्पूर्ण भारत में ऐसी कोई एक भाषा नहीं थी जो देश के अधिकांश लोगों के बीच संपर्क का माध्यम बन सकती। इसलिए, सभी प्रमुख नेताओं ने हिंदी को स्वतंत्रता आंदोलन को प्रखर बनाने के लिए एक प्रबल साधन के रूप में अपनाया और आजादी मिलने के बाद इसे सबने मिलकर राजभाषा बनाया।

हिंदी भाषा ही नहीं, संस्कार भी है। संस्कृत, संस्कृति और संस्कार की त्रिवेणी हिंदी की धरोहर है। राजभाषा हिंदी के विकास के लिये हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। हमें अपने वैज्ञानिक खोज को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास करना है और हिंदी इसके लिये सर्वोत्तम माध्यम हो सकती है।
हमारे कार्यालय में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार की दिशा में काफी हद तक काम किया जा रहा है, लेकिन इस दिशा में और अधिक प्रयास की आवश्यकता है।
धारा 3-3 का अनुपालन करने हेतु प्रशासन के सभी कार्मिकों से अनुरोध है कि इस दिशा में सभी तरह के ज्ञापन, अधिसूचनायें, सूचनायें, टेंडर आदि द्विभाषी रूप में निकाले जायें और नियम पाँच के अन्तर्गत हिंदी में प्राप्त पत्रों के उत्तर हिंदी में दिये जायें। हमारा कार्यालय ‘क’ क्षेत्र में है और ‘क’ क्षेत्र में होने के नाते हमारे सभी मूल पत्राचार ‘क’ एवं ‘ख’ क्षेत्र से हिंदी में ही करना है और नियम तो यह भी है कि ‘क’ क्षेत्र से एवं ‘ख’ क्षेत्र से अगर अंग्रेजी में पत्र आते हैं तो हमें उनका भी उत्तर हिंदी में देना है। दायित्व बड़ा है और हम सबको मिलकर इस दिशा में काम करना है।
हिंदी सप्ताह के अवसर पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हमारे कार्यालय के कार्मिक भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे और अधिक से अधिक कार्य का सम्पादन हिंदी में संभव हो सकेगा।
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ अरुण सज्जन साहित्यकार ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है। यह हमारे संस्कार और भारतीय संस्कृति की परिचायक भी है। उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है। इसकी विशेषता यह है कि यह जैसी बोली जाती है वैसी लिखी जाती है। सरल सहज भाषा में तकनीकी के साथ साथ वैज्ञानिक कार्य भी किए जा सकते हैं विश्व व्यापार को आगे बढ़ाने में हिन्दी भाषा बहुत महत्वपूर्ण है
इस अवसर पर प्रयोगशाला की हिन्दी अधिकारी डॉ. रानू वर्मा ने कार्य क्रम की विस्तृत रूप रेखा प्रस्तुत की, जो इस प्रकार है
इस वर्ष हिन्दी सप्ताह समारोह दिनांक 14 सितंबर से 22 सितंबर, 2026 तक सीएसआईआर- राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला परिसर में उल्लासपूर्वक मनाये जाने का प्रस्ताव है

अंत मे प्रयोगशाला के प्रशासन नियंत्रक श्री जय शंकर शरण जी ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित कार्मिकों को धन्यवाद देते हुए पूरे भव्य ढंग से कार्य क्रम मे भाग लेने की अपील की

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