राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने प्रोजेक्टाइल एयरोडायनामिक्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अध्ययन पूरा किया है. संस्थान द्वारा विकसित स्पाइक्ड नोज़ कोन डिज़ाइन उच्च गति वाली मिसाइलों के हवा में अवरोध (एयरोडायनामिक ड्रैग) को कम करने और उनके प्रवाह लक्षणों को बेहतर बनाने में प्रभावी साबित होगा
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ता और उनके मार्गदर्शकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह अध्ययन देश के वायु रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में एक उपयोगी और दूरगामी योगदान सिद्ध होगा. इसके साथ ही विभागाध्यक्ष डॉ. परमानंद कुमार तथा वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. संजय ने भी इस शोध कार्य के तकनीकी महत्व की सराहना की

एनआईटी जमशेदपुर का शोध: स्पाइक्ड नोज़ कोन डिज़ाइन से सुपरसोनिक मिसाइलों की गति और सुरक्षा में होगा सुधार
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने ड्रैग और थर्मल शॉक कम करने पर प्रस्तुत की रिपोर्ट, शोधकर्ता शमीम रज़ा को पीएचडी उपाधि देने की सिफारिश

जमशेदपुर- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने प्रोजेक्टाइल एयरोडायनामिक्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अध्ययन पूरा किया है. संस्थान द्वारा विकसित स्पाइक्ड नोज़ कोन डिज़ाइन उच्च गति वाली मिसाइलों के हवा में अवरोध (एयरोडायनामिक ड्रैग) को कम करने और उनके प्रवाह लक्षणों को बेहतर बनाने में प्रभावी साबित होगा
यह शोध डॉ. अनिल के. प्रसाद और डॉ. लालजी प्रसाद के मार्गदर्शन में शोधकर्ता शमीम रज़ा द्वारा संपन्न किया गया है. इस अध्ययन के आधार पर एनआईटी पटना के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश ने थीसिस का मूल्यांकन करते हुए श्री रज़ा को पीएचडी की उपाधि प्रदान करने की सिफारिश की है. इस महत्वपूर्ण शोध कार्य के अंतर्गत दो शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुके हैं.
पुन: प्रवेश के दौरान तापीय आघात से मिलेगी सुरक्षा
मिसाइल तकनीक के लिहाज़ से यह अध्ययन बेहद अहम माना जा रहा है. यह शोध वायुमंडल में मिसाइल के पुन: प्रवेश (री-एंट्री) के समय उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी और तापीय आघात (थर्मल शॉक) की चुनौतियों को कम करने और उनके शमन पर केंद्रित है.
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ता और उनके मार्गदर्शकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह अध्ययन देश के वायु रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में एक उपयोगी और दूरगामी योगदान सिद्ध होगा. इसके साथ ही विभागाध्यक्ष डॉ. परमानंद कुमार तथा वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. संजय ने भी इस शोध कार्य के तकनीकी महत्व की सराहना की


