सावन ऋतु के आगमन पर मिथिला कला मंच द्वारा पूर्व-स्नेह संगीत मिलन आयोजित
अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की इकाई मिथिला कला मंच द्वारा सावन ऋतु के आगमन के उपलक्ष्य में 24 जुलाई 2026 को ऑनलाइन पूर्व-स्नेह संगीत मिलन का आयोजन किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय जमशेदपुर के प्राचार्य डॉ. अशोक अविचल ने की कार्यक्रम का शुभारंभ वाराणसी के अशोक कुमार मिश्र द्वारा प्रस्तुत भक्ति-गीत "प्रेमक दीप जराबी" से हुआ। इसके पश्चात दिल्ली के लक्ष्मण झा ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया

आसनसोल- सावन ऋतु के आगमन पर मिथिला कला मंच द्वारा पूर्व-स्नेह संगीत मिलन आयोजित

अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की इकाई मिथिला कला मंच द्वारा सावन ऋतु के आगमन के उपलक्ष्य में 24 जुलाई 2026 को ऑनलाइन पूर्व-स्नेह संगीत मिलन का आयोजन किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय जमशेदपुर के प्राचार्य डॉ. अशोक अविचल ने की
कार्यक्रम का शुभारंभ वाराणसी के अशोक कुमार मिश्र द्वारा प्रस्तुत भक्ति-गीत “प्रेमक दीप जराबी” से हुआ। इसके पश्चात दिल्ली के लक्ष्मण झा ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
संगीत संध्या में भारत एवं नेपाल के कलाकारों ने मैथिली, भक्ति और लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। रणजीत जी ने “हमर अंगना पीपल”, वाचस्पति ठाकुर ने हास्य-व्यंग्य रचना “घर में चोर घुसि के लेलक रोल्ड गोल्ड”, नूतन झा (जमशेदपुर) ने “झूलबथि राजाजी”, अरुण झा ने “बर्खाक बून जरूर माहुर सन” तथा “बाट बटोहिया के पूछलहुँ”, आशा (धनबाद) ने “कन्हैया रे कदम्ब यमुना किनार” और जयराम (दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल) ने “पूजा करै छी हम नोर बहाक” प्रस्तुत कर श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।
नेपाल के सोनू बैरवा ने “बदरा झूमर-झूमर बरसै”, “प्रिय मोरा कहिया” तथा “सावन हमर कोना बीता रहल अछि” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
इसके अतिरिक्त प्रतिभा (बोकारो), गोपाल चन्द्र झा (जमशेदपुर), रीता जी, विधुकान्त मिश्र (प्रयागराज), पुष्पा (नोएडा), विनीता (सोनीपत, हरियाणा) तथा अरुण पाठक (बोकारो) ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन पूनम झा (आसनसोल) ने किया। डॉ. धनाकर ठाकुर, संस्थापक, अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम हैं।
पूरे कार्यक्रम में मैथिली लोकसंगीत, भक्ति, हास्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। भारत के विभिन्न राज्यों तथा नेपाल से जुड़े कलाकारों की सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। उपस्थित श्रोताओं ने सभी कलाकारों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को मैथिली भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
अंत में एन. के. झा, संस्थापक, पटना पुस्तक मेला ने सभी कलाकारों, श्रोताओं एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
