नए तीनों आपराधिक कानूनों के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण आवश्यक- राजेश शुक्ल
झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन और राज्य के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने कहा है कि न्याय की भावना से तैयार भारतीय न्याय संहिता,भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता,और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण अति आवश्यक है श्री शुक्ल ने कहा है कि इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने विभिन्न स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित भी कराए लेकिन अभी भी तकनीकीऔर पहलुओं पर जागरूकता और प्रशिक्षण की व्यापक आवश्यकता है

नए तीनों आपराधिक कानूनों के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण आवश्यक- राजेश शुक्ल
जमशेदपुर- झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन और राज्य के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने कहा है कि न्याय की भावना से तैयार भारतीय न्याय संहिता,भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता,और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण अति आवश्यक है
श्री शुक्ल ने कहा है कि इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने विभिन्न स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित भी कराए लेकिन अभी भी तकनीकीऔर पहलुओं पर जागरूकता और प्रशिक्षण की व्यापक आवश्यकता है
श्री शुक्ल ने झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईमेल भेजकर लिखा है कि इन तीनों आपराधिक कानूनों में तकनीक शामिल करने से उजाला आया है,प्राथमिकी से केस डायरी से चार्जशीट से निर्णय की सारी प्रक्रियाओं को डिजिटलाईज किया गया है ताकि तकनीकी के माध्यम से सम्पूर्ण ट्रायल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी हो सके, जिस परिकल्पना न्यायिक पद्धति को सुसज्जित करने के सारे प्रावधान इस कानून में किए गए हैं ,उसके लिए सही तरीके से हर स्तर पर ये कानून लागू कराने के लिए जागरूकता से जुड़े हितधारकों के साथ समीक्षा बैठक जरूरी है l वही पर नए आपराधिक कानूनों के पीछे की भावना को समाज के विभिन्न वर्गों तक भावनात्मक तरीके से सोचने पहुचाने की आज प्रबल आवश्यकता है l महिलाओं और ल़डकियों को नए कानूनों के तहद उनके अधिकारों और सुरक्षा के बारे में अवगत कराना जरूरी है l तीनों कानूनों से जुड़े पोस्टर और फ्लेक्स तैयार कर शहर और पंचायत में जागरूकता के लिए लगाना आवश्यक है ताकि नए आत्मविश्वास के साथ न्यायिक सुगमता और न्याय की अवधारणा से इसका सुफल आमलोगों को मिल सके
श्री शुक्ल ने विधिक शिक्षण संस्थानों से भी आग्रह किया है कि न्याय कीभावना से तैयार भारतीय न्याय संहिता,भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू नए कानूनों में क्या बदला ,क्या हटा और क्या जुड़ा है इसके लिए व्यापक रूप से पढ़ाने और जागरूक करने की जरूरत है l
श्री शुक्ल ने कहा है कि तीन नए कानूनों में न्याय,समानता और निष्पक्षता के तीन मूल सिद्धांतों पर परिवर्तित किया गया है भारतीय दंड प्रक्रिया में पहले 484 धाराएं थी, इसकी जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता मे 531 धाराएं है l 177 धाराओं में बदलाव किया गया है,9 नई धाराएं जोड़ी गई है l वही 39 नए सब सेक्शन जोड़े गए हैं,44 नए प्रावधान और स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं l 35 सेक्शन में समय सीमा जोड़ी गई है और 14 धाराओं को समाप्त कर दिया गया है l इसी तरह आई पी सी की जगह भारतीय न्याय संहिता में पहले 511 धाराएं थी जो अब 358 रह गई है, इसमें 21 नए अपराधों को जोड़ा गया है,41 अपराधों में कारावास की अवधि बढ़ाई गई है 82 अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है l 25 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा शुरू की गई है l 6 अपराधों में सामुदायिक सेवा दंड देने का प्रावधान है l जबकि 19 धाराओं को समाप्त कर दिया गया है
श्री शुक्ल ने कहा है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 167 धाराएं थी इसकी जगह अब 170 धाराएं इस नए कानून में है इसमें 24 धाराओं में बदलाव किया गया है l 2 नई धाराएं जोड़ी गई है और 6 धाराओं को हटा दिया गया है l सही मायने में इसकी व्यापक चर्चा और जागरूकता जरूरी है lश्री शुक्ल ने विधिक शिक्षण संस्थानों से आग्रह भी किया है इस पर सेमिनार और संगोष्ठी भी आयोजित कराए जिससे जागरूकता बढ़ाया जाए


