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हेपेटाइटिस बीः सच से दूर, भ्रम के करीब – जानें कहां हैं गलतफहमियां -डॉ. कल्याण कुमार, कंसल्टेंट जनरल मेडिसिन

हेपेटाइटिस बी आज भी दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले लिवर संक्रमणों में से एक है। विज्ञान की तरक्की और जागरूकता बढ़ने के बावजूद, इस बीमारी को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं अब भी बनी हुई हैं, जो डर, भ्रम और सामाजिक कलंक को जन्म देती हैं। इसलिए इस बीमारी की सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना और इसकी रोकथाम व इलाज को लेकर जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है

हेपेटाइटिस बीः सच से दूर, भ्रम के करीब – जानें कहां हैं गलतफहमियां -डॉ. कल्याण कुमार, कंसल्टेंट जनरल मेडिसिन

हेपेटाइटिस बी आज भी दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले लिवर संक्रमणों में से एक है। विज्ञान की तरक्की और जागरूकता बढ़ने के बावजूद, इस बीमारी को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं अब भी बनी हुई हैं, जो डर, भ्रम और सामाजिक कलंक को जन्म देती हैं। इसलिए इस बीमारी की सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना और इसकी रोकथाम व इलाज को लेकर जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।

भ्रम 1: छूने या पास बैठने से फैलता है हेपेटाइटिस बी

यह सबसे आम गलतफहमी है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। गले मिलने, हाथ मिलाने, एक ही थाली में खाना खाने, पास बैठने या किसी के खांसने-छींकने से यह बीमारी नहीं फैलती। यह वायरस मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल, असुरक्षित मेडिकल प्रक्रियाओं और संक्रमित मां से नवजात शिशु में जन्म के समय फैलता है।

भ्रम 2: संक्रमित व्यक्ति में लक्षण जरूर दिखते हैं

यह सोचना भी गलत है कि हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हर व्यक्ति में लक्षण नजर आते हैं। कई मामलों में व्यक्ति सालों तक इस संक्रमण के साथ जीता है, बिना यह जाने कि उसके शरीर में वायरस मौजूद है। क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त कई लोग बाहरी तौर पर पूरी तरह स्वस्थ दिख सकते हैं। लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यही वायरस आगे चलकर लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए वायरस के स्तर की नियमित जांच कराना बहुत जरूरी है।

भ्रम 3: इस बीमारी को नियंत्रित करना नामुमकिन है

अक्सर लोग मानते हैं कि हेपेटाइटिस बी पर काबू पाना मुश्किल है, जबकि सही मेडिकल देखभाल से इसे बखूबी नियंत्रित किया जा सकता है। इस संक्रमण से बचाव का सबसे कारगर तरीका है वैक्सीनेशन। वहीं जो लोग पहले से क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी से जूझ रहे हैं, उनके लिए लिवर की नियमित जांच, सेहतमंद जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर सही दवाइयां लंबे समय में होने वाली जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

हेपेटाइटिस बी के बारे में सही जानकारी फैलाने से न सिर्फ नए संक्रमणों को रोका जा सकता है, बल्कि मरीजों के प्रति समाज में बना कलंक भी कम किया जा सकता है। समय पर जांच, वैक्सीनेशन और सही इलाज की मदद से हेपेटाइटिस बी से पीड़ित लोग भी सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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