मिथिला राज्यक निर्माणक बिना मिथिलाक विकास संभव नहि — सुरेश्वर पोद्दार
मिथिला राज्यक निर्माण मिथिलाक सर्वांगीण विकास लेल अत्यन्त आवश्यक अछि। बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी आदिसँ लऽ कऽ ग्रियर्सन द्वारा निर्धारित सम्पूर्ण मैथिलीभाषी क्षेत्र मिथिला राज्यक अंग बनबाक चाही। हम सभ जेकरा ठेठी कहैत छी, से मैथिलीक बोलचालक स्वरूप अछि आ ओहि मूल मैथिलीक वास्तविक रूप मानल जाय। ई बात मुख्य अतिथिक रूपमे अपन सम्बोधन दैत अभियन्ता प्रमुख सुरेश्वर पोद्दार कहलन्हि

मिथिला राज्यक निर्माणक बिना मिथिलाक विकास संभव नहि — सुरेश्वर पोद्दार

खगड़िया- मिथिला राज्यक निर्माण मिथिलाक सर्वांगीण विकास लेल अत्यन्त आवश्यक अछि। बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी आदिसँ लऽ कऽ ग्रियर्सन द्वारा निर्धारित सम्पूर्ण मैथिलीभाषी क्षेत्र मिथिला राज्यक अंग बनबाक चाही। हम सभ जेकरा ठेठी कहैत छी, से मैथिलीक बोलचालक स्वरूप अछि आ ओहि मूल मैथिलीक वास्तविक रूप मानल जाय। ई बात मुख्य अतिथिक रूपमे अपन सम्बोधन दैत अभियन्ता प्रमुख सुरेश्वर पोद्दार कहलन्हि।
राजेन्द्र नगर, खगड़िया स्थित एस.बी. मेमोरियल स्कूलक सभागारमे ३७म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक उद्घाटन दीप प्रज्वलन आ “जय-जय भैरवी” गीतसँ भेल। तत्पश्चात सुश्री रागिनी झा द्वारा “मंगलमय दिन आजु हे, पाहुन छथि आयल” स्वागत गीत प्रस्तुत कयल गेल।
सम्मेलनक संयोजक प्रभाकर झा ‘प्रभात’ अतिथिसभक स्वागत अंगवस्त्र आ पुष्पमालासँ कयलन्हि। स्वागत भाषणमे ओ कहलन्हि जे खगड़ियामे ई पहिल अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन अछि, जे आगाँ आओर व्यापक स्वरूप ग्रहण करत। हुनक अनुसार खगड़िया मिथिलाक हृदयस्थल अछि, जतय मैथिली आ मिथिलाक पक्षमे जन-जनकेँ जोड़बाक बहुत कार्य शेष अछि।
परिषदक संस्थापक डॉ. धनाकर ठाकुर १९९३ सँ स्थापित परिषदक इतिहास, ओकर ३६ अनुषंगी इकाइसभ तथा मिथिला राज्यक आवश्यकतापर विस्तारसँ प्रकाश देलन्हि।
महासचिव नारायण यादव अपन प्रतिवेदन प्रस्तुत करैत पूर्वक समस्त अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनसभ तथा ताहिमे पारित प्रस्तावसभक विवरण देलन्हि।
नेपाल शाखाक अध्यक्ष डॉ. रामरिझन यादव नेपालमे मैथिली आ मिथिलाक वर्तमान स्थिति पर प्रकाश दैत कहलन्हि जे भारतमे मैथिलीक सम्मान बढ़लासँ नेपालमे सेहो एकरा बल भेटैत अछि। हुनका अनुसार मधेश प्रदेशक नाम “मिथिला-मधेश” होएबाक चाही तथा कोशी आ मधेश दुनू प्रदेशमे मैथिलीकेँ राजकीय भाषाक दर्जा देबाक पूर्व पारित प्रस्तावक कार्यान्वयन होयबाक चाही।
विशिष्ट अतिथिक रूपमे उपस्थित भारतीय प्रशासनिक सेवाक पूर्व पदाधिकारी श्यामल किशोर कहलन्हि जे मैथिलीक योगदान हुनक जीवनमे अत्यन्त महत्वपूर्ण रहल अछि। हुनका अनुसार मैथिलीमे रोजगारक पर्याप्त संभावना अछि तथा सभ मैथिलीभाषीकेँ जनगणनामे अपन मातृभाषा मैथिली अवश्य दर्ज करबाक चाही, किएक तँ सरकारी योजना भाषागत आँकड़ाक आधार पर बनैत अछि।
परिषदक केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अविचल अपन अध्यक्षीय सम्बोधनमे मिथिलाक इतिहास, भौगोलिक सीमा तथा खगड़िया, बरौनी, बेगूसराय, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा आ मधेपुराक महत्व पर प्रकाश देलन्हि। ओ स्पष्ट कहलन्हि जे मैथिली कोनो एक जातिक भाषा नहि, बल्कि सम्पूर्ण मिथिलावासीक मातृभाषा अछि। विद्यापतिसँ पूर्व सेहो ई लोकभाषाक रूपमे जीवित छल आ आइयो जनभाषाक रूपमे विकसित भऽ रहल अछि।
कोषाध्यक्ष पी.के. ‘प्रवीण’, दलसिंहसराय, धन्यवाद ज्ञापन करैत मिथिला आ मैथिलीक सर्वांगीण विकास लेल सभ क्षेत्रमे सक्रिय प्रयासक आवश्यकता पर बल देलन्हि।
उद्घाटन सत्रमे नौ प्रस्ताव पारित कएल गेल। प्रस्ताव प्रस्तुत करनिहारसभमे प्रो. अनिल ठाकुर, नन्द विलास राय, उमेश भारती, दिलीप कुमार झा, डॉ. पुण्यनाथ झा, गौरीशरण झा, विजय मिश्रा, प्रो. प्रवीण कुमार झा ‘प्रेम’, डॉ. कृष्ण मुरारी झा तथा डॉ. रामरिझन यादव शामिल छलाह।
पारित प्रमुख प्रस्तावसभमे—
1.
मिथिला राज्यक गठन।
2.
सीमांचल एक्सप्रेसक नाम परिवर्तित कऽ “कोसी-मिथिला एक्सप्रेस” राखल जाय।
3.
बिहारमे मैथिलीकेँ द्वितीय राजभाषाक दर्जा देल जाय।
4.
भारत सरकार द्वारा मैथिलीकेँ शास्त्रीय भाषाक मान्यता प्रदान कयल जाय।
5.
विद्यालयी शिक्षाक माध्यम मैथिली बनाओल जाय।
6.
मिथिलामे उच्च शिक्षाक अनुसन्धान संस्थानक स्थापना कयल जाय।
7.
सम्पूर्ण मिथिलाकेँ जोड़ैत चारधाम परिपथ एवं मिथिला सर्किटक विकास कयल जाय।
8.
पुरातात्त्विक धरोहर संरक्षण परिषदक गठन कयल जाय।
9.
नेपालक कोशी आ मधेश प्रदेशमे मैथिलीकेँ राजभाषाक दर्जा तथा मधेश प्रदेशक नाम “मिथिला-मधेश” कयल जाय।
बिहारक १६ जिलाक अतिरिक्त झारखण्ड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा नेपालसँ आयल प्रतिनिधिसभ एहि प्रस्तावसभक समर्थन कयलन्हि। उद्घाटन सत्रक संचालन डॉ. रविन्द्र कुमार चौधरी, प्राचार्य, जमशेदपुर, कयलन्हि।
उद्घाटन सत्रक उपरान्त तकनीकी सत्रमे जनगणनामे मैथिली, प्राथमिक शिक्षामे मैथिली, मैथिली साहित्यमे गिरिजानन्द झा ‘अर्धनारीश्वर’क योगदान, मिथिलाक्षरक महत्व आदि विषयपर १६ शोधपत्र प्रस्तुत कयल गेल। तकनीकी सत्रक अध्यक्षता प्रो. डॉ. देवनारायण साह, सहरसा, तथा संचालन डॉ. दिलीप कुमार झा, मधुबनी, कयलन्हि।
साँझमे भाव-कवि गोष्ठीक आयोजन भेल जाहिक अध्यक्षता वरिष्ठ कवि प्रीतम कुमार निषाद, मधुबनी, कयलन्हि।
सम्मेलनक प्रथम दिन देशक विभिन्न भागसँ आयल मिथिला-मैथिलीसेवीसभ सक्रिय सहभागिता देलन्हि। प्रमुख उपस्थितजनमे ईश्वरचन्द्र विद्यासागर (जयनगर), उमेश भारती (सिमरी बख्तियारपुर), प्रो. देवनारायण साह, दुर्गा मण्डल, शिवकुमार मिश्र, रामविलास साहू, अशोक देव, विष्णुदेव पोद्दार आदिक सहभागिता उल्लेखनीय रहल।
सम्मेलनक सम्पूर्ण व्यवस्थामे एस.बी. मेमोरियल स्कूलक शिक्षक तथा शिक्षकेतर कर्मचारीसभक सक्रिय योगदान उल्लेखनीय रहल।
“भगवान हमर ई मिथिला सुख-शान्तिक घर हो” केर उद्घोषक संग सम्पन्न भेल 37म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन
जनगणनामे मैथिली लेल निरन्तर जागरूकता अभियान चलयबाक निर्णय
खगड़िया- एस.बी. मेमोरियल स्कूल, खगड़ियामे आयोजित 37म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक समापन यात्रीजीक प्रसिद्ध गीत— “भगवान हमर ई मिथिला सुख-शान्तिक घर हो, आदर्श भऽ सभक ई संसारमे अमर हो” केर सामूहिक गायनक संग सम्पन्न भेल।
सम्मेलनक अवसर पर
भाव-कवि गोष्ठी राति धरि चलल। वरिष्ठ कवि प्रीतम कुमार निषादक अध्यक्षता आ दुर्गानन्द मण्डलक संचालनमे 22 कविसभ अपन रचना पाठ कयलन्हि। कविता पाठ करनिहारसभमे नन्द विलास राय, डॉ. रविन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. धनाकर ठाकुर, दिलीप कुमार झा, नारायण यादव, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, प्रभाकर झा ‘प्रभात’, शशिशेखर, डॉ. अशोक अविचल, शिवकुमार मिश्र, प्रो. अनिल ठाकुर तथा रामविलास साह आदिक नाम प्रमुख छल। कविसभ समसामयिक विषय, हास्य-व्यंग्य आ प्रेमपर आधारित कवितासँ श्रोता सभक भरपूर मनोरंजन कयलन्हि।
सम्मेलनक दोसर दिन संगठनक गतिविधि तथा भावी कार्यक्रमसँ सम्बन्धित विशेष सत्रक आयोजन कयल गेल, जाहिक अध्यक्षता केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अविचल कयलन्हि। सत्रक संचालन संस्थापक डॉ. धनाकर ठाकुर कयलन्हि।
अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक सभ अनुषंगी इकाइसभ अपन-अपन वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कयलन्हि तथा आगाँक एक वर्षक कार्ययोजनाक विवरण देलन्हि। मैथिली शिक्षक मंच, मैथिली साहित्य परिषद, मिथिला उद्योग मंच, मिथिला वाणिज्य मंच, मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा, मिथिला मुस्लिम मंच, मिथिला शिक्षा मंच तथा आदर्श मिथिला पार्टीक प्रतिनिधिसभ अपन गतिविधिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कयलन्हि।
सत्रमे संगठनकेँ सुदृढ़ बनयबाक, नियमित कार्यक्रम आयोजित करयबाक तथा मिथिलाक सर्वांगीण विकास लेल संयुक्त योजना बनयबाक निर्णय लेल गेल। सभ संगठनकेँ निर्देश देल गेल जे सम्पूर्ण मिथिलामे जागरूकता अभियान चलाकऽ लोकसभकेँ जनगणनामे अपन मातृभाषा मैथिली दर्ज करय लेल प्रेरित करथि।
राँचीसँ आयल अधिवक्ता गौरीशरण झा मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभाद्वारा संचालित मिथिलाक्षर प्रशिक्षण केन्द्रसभक गतिविधिक विवरण प्रस्तुत कयलन्हि तथा आगामी एक वर्षमे केन्द्रसभक संख्या दुगुना करयबाक लक्ष्यक जानकारी देलन्हि।
विजय कुमार झा उद्योगसँ जुड़ल व्यक्तिसभक डाटाबेस तैयार करय तथा शीघ्र उद्योग सम्मेलन आयोजित करयबाक योजनाक घोषणा कयलन्हि।
मैथिली शिक्षक मंचक संयोजक डॉ. आर.के. चौधरी शिक्षक तथा साहित्यकारसभक पृथक-पृथक मंच गठन कऽ सम्मेलन आयोजित करयबाक योजनाक विस्तारसँ जानकारी देलन्हि। हुनका अनुसार शिक्षक आ साहित्यकार जनगणनामे मैथिली लेल राजदूतक भूमिका निभौताह, किएक तँ जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलयबाक दायित्व हुनकेसभ पर अछि।
संस्थापक डॉ. धनाकर ठाकुर सभ संगठनकेँ अपन-अपन कार्यक्षेत्रक विस्तार करय तथा नियमित कार्यक्रम संचालित करय लेल प्रेरित कयलन्हि।
सम्मेलनमे कतेको नव दायित्वक घोषणा सेहो कयल गेल। 37म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक संयोजक प्रभाकर झा ‘प्रभात’ केँ खगड़िया जिलाक संयोजक नियुक्त कयल गेल। हुनका शीघ्र विस्तृत बैठक आयोजित कऽ पूर्ण जिला समिति गठित करयबाक निर्देश देल गेल। मधुबनी जिलाक अध्यक्ष प्रीतम कुमार निषाद अध्यक्ष हेताह।
मिथिला बाल मंचक अध्यक्षक दायित्व नन्दविलास राय केँ तथा मिथिला शिशु परिषदक अध्यक्षक दायित्व ईश्वरचन्द्र विद्यासागर केँ देल गेल। मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभाक अध्यक्ष पद पर अधिवक्ता गौरीशरण झाक मनोनयन कयल गेल।
सम्मेलनमे मिथिला संस्कृत परिषद केर गठन कयल गेल तथा शिवकुमार मिश्र केँ एकर अध्यक्ष बनाओल गेल।
अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे शोधपत्र प्रस्तुत करनिहार सभ 15 प्रतिभागीकेँ प्रमाण-पत्र प्रदान कयल गेल।
नेपाल शाखाक अध्यक्ष डॉ. रामरिझन यादव, एस.बी. मेमोरियल स्कूलक निदेशक प्रभाकर झा, मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभाक गौरीशरण झा (राँची), युवा मैथिली गायिका रागिनी झा तथा मिथिला सेवी प्रो. प्रवीण कुमार झा ‘प्रेम’ केँ “मिथिला गौरव” सम्मान प्रदान कयल गेल।
हिन्दी-मैथिलीक सेवाक लेल खगड़ियाक प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय कैलाश झा ‘किंकर’ केँ मरणोपरान्त “मिथिला गौरव” सम्मान प्रदान कयल गेल। हुनकर धर्मपत्नी संध्या किंकर सम्मान ग्रहण कयलन्हि।
अन्तमे परिषदक केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अविचल सभ आयोजक, प्रतिनिधि तथा प्रतिभागीसभक प्रति आभार व्यक्त करैत कहलन्हि जे खगड़ियाक ई सम्मेलन ऐतिहासिक रहल, जाहिमे 9 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कयल गेल।
समवेत विमर्शक उपरान्त घोषणा कयल गेल जे 38म अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन एहि वर्ष 16–17 नवम्बर 2026 केँ गणपतगंज (सुपौल) मे प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. डॉ. रविन्द्र कुमार चौधरीक संयोजनमे आयोजित कयल जाएत।
समवेत प्रार्थनाक संग सम्मेलनक समापनक घोषणा कयल गेल।




