जमशेदपुर जेएनयू प्रकरण के बहाने भाजपा महिला मोर्चा के पूर्व घोषित प्रदर्शन में भाजपा नेताओं ने अपनी ताकत की गलत आजमाईस की और आंदोलन के रुख को बदलकर डंडा और पत्थर का बौछार कर दिया
बिष्टुपुर में सियासी टकराव लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, हिंसा का नहीं बिष्टुपुर तिलक पुस्तकालय के समीप भाजपा महिला शाखा के द्वारा जो प्रदर्शन कांग्रेस कार्यालय के समक्ष करना था लेकिन वह शांति पूर्ण प्रदर्शन के बजाय पूर्व सुनियोजित तरीके से भाजपा के पुरुष वर्ग के नेताओं के द्वारा खुनी प्रदर्शन के रूप में तब्दील कर दिया गया जमशेदपुर में भाजपा-कांग्रेस का आमना-सामना बना चिंता का विषय, राजनीतिक दलों को आत्ममंथन की जरूरत

जमशेदपुर जेएनयू प्रकरण के बहाने भाजपा महिला मोर्चा के पूर्व घोषित प्रदर्शन में भाजपा नेताओं ने अपनी ताकत की गलत आजमाईस की और आंदोलन के रुख को बदलकर डंडा और पत्थर का बौछार कर दिया


नवरात्रि के शुभ दिनों में जमशेदपुर का बिष्टुपुर इलाका अखाड़ा बन गया। जेएनयू प्रकरण को लेकर भाजपा महिला मोर्चा कांग्रेस मुख्यालय तिलक पुस्तकालय का घेराव करने पहुंची थी, और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हंगामे और पत्थरबाजी में तब्दील हो गया


बिष्टुपुर में सियासी टकराव लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, हिंसा का नहीं बिष्टुपुर तिलक पुस्तकालय के समीप भाजपा महिला शाखा के द्वारा जो प्रदर्शन कांग्रेस कार्यालय के समक्ष करना था लेकिन वह शांति पूर्ण प्रदर्शन के बजाय पूर्व सुनियोजित तरीके से भाजपा के पुरुष वर्ग के नेताओं के द्वारा खुनी प्रदर्शन के रूप में तब्दील कर दिया गया जमशेदपुर में भाजपा-कांग्रेस का आमना-सामना बना चिंता का विषय, राजनीतिक दलों को आत्ममंथन की जरूरत


जमशेदपुर- शहर के बिष्टुपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय तिलक पुस्तकालय में आज दोपहर बारह बजे भाजपा महिला मोर्चा के पूर्व घोषित प्रदर्शन के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, वह लोकतांत्रिक राजनीति और राजनीतिक कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन जब राजनीतिक असहमति टकराव, पत्थरबाजी, मारपीट और खून-खराबे तक पहुंच जाए, तो यह किसी भी राजनीतिक दल और समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है।
इस प्रदर्शन की घोषणा पहले से की गई थी। ऐसे में प्रशासन और संबंधित राजनीतिक दलों से यह अपेक्षा थी कि विरोध-प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए पर्याप्त तैयारी की जाती। पूर्व में भाजपा कार्यालय के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के उग्र प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आज की घटना ने राजनीतिक तनाव को और उजागर कर दिया।


प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष अवधेश सिंह ने मोर्चा संभाला, जबकि भाजपा की ओर से पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार, सुधांशु ओझा और संजीव सिंह सहित अन्य नेता सक्रिय रहे। भाजपा विधायक पूर्णिमा साहू के पहुंचने के बाद माहौल और गरमा गया। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते तनाव ने देखते ही देखते गंभीर रूप ले लिया।
इस दौरान भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार के सिर में चोट लगी और खून बहने की घटना सामने आई। कांग्रेस के मनोज उपाध्याय सहित कई पदाधिकारियों के भी घायल होने की सूचना है। दोनों पक्षों के नेताओं को अपने कार्यकर्ताओं को समझाते और स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश करते देखा गया। अंततः जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी।


राजनीति में शक्ति प्रदर्शन या लोकतांत्रिक मर्यादा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीतिक विरोध का उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना है या विरोधी पक्ष को दबाव में लाना? यदि महिला मोर्चा का प्रदर्शन महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीतिक विरोध को सामने रखने के लिए था तो उसकी ताकत शांतिपूर्ण प्रदर्शन, तथ्यों और तर्कों में दिखाई देनी चाहिए थी। इसी तरह कांग्रेस को भी अपने कार्यालय और कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का जवाब देने का रास्ता अपनाना चाहिए था।


राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी केवल कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करना नहीं, बल्कि उन्हें संयमित रखना भी है। भीड़ में नारेबाजी और आक्रोश तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन अनुभवी नेतृत्व का मूल्य इसी बात से तय होता है कि वह तनावपूर्ण परिस्थिति में अपने समर्थकों को कितना नियंत्रित रखता है।


प्रशासन की भूमिका और निष्पक्ष जांच की जरूरत
घटना के दौरान एसडीओ, सिटी एसपी, सीसीआर डीएसपी मनोज ठाकुर और थाना प्रभारी निरंजन सहित पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने मोर्चा संभालकर स्थिति शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि, ऐसी घटनाओं में केवल मौके पर स्थिति नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, हिंसा की शुरुआत कैसे हुई, किसकी क्या भूमिका रही और किस परिस्थिति में लोग घायल हुए इन सभी पहलुओं को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाए।

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किसी भी पक्ष को राजनीतिक पहचान के आधार पर दोषी या निर्दोष घोषित करने के बजाय कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।


जनता क्या संदेश लेगी?
जमशेदपुर औद्योगिक, सामाजिक और राजनीतिक चेतना वाला शहर है। यहां की जनता राजनीतिक दलों से विकास, रोजगार, सुरक्षा और जनसमस्याओं पर गंभीर बहस की अपेक्षा करती है। यदि राजनीतिक दल एक-दूसरे के कार्यालयों के सामने विरोध करते हुए मर्यादा भूल जाएंगे, तो आम नागरिकों के बीच राजनीति की छवि प्रभावित होना स्वाभाविक है।
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा का अधिकार किसी को नहीं। भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों को यह समझना होगा कि राजनीतिक मतभेद दुश्मनी में नहीं बदलनी
चाहिए। विचारों की लड़ाई विचारों से होनी चाहिए, न कि लाठी, पत्थर और खून से।


बिष्टुपुर की घटना केवल दो राजनीतिक दलों के बीच टकराव नहीं, बल्कि राजनीतिक संयम और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की परीक्षा भी है। अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर आत्ममंथन करने, घायलों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की है।
संपादकीय निष्कर्ष: लोकतंत्र की मजबूती इस बात में नहीं कि कौन कितना आक्रामक विरोध करता है, बल्कि इस बात में है कि असहमति के बावजूद कौन संविधान, कानून और मानवीय मर्यादाओं का सम्मान करता है। राजनीति में जीत-हार होती रहती है, लेकिन हिंसा में लोकतंत्र हमेशा हारता है।


जमशेदपुर जेएनयू प्रकरण में कथित रूप से 11 छात्राओं के रेप के आरोपी मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल के खिलाफ कांग्रेस हाईकमान से कार्रवाई की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी महिला शाखा भाजपा विधायक पूर्णिमा साहू के नेतृत्व में भाजपाई जी टाउन मैदान से रैली निकाल कर बिष्टुपुर तिलक पुस्तकालय स्थित कांग्रेस कार्यालय के पास पहुंचे। इसी दौरान दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं में जमकर एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी हाथापाई पथराव की खबर है। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा है। इस घटना में दोनों पक्षों की ओर से दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही सिटी एसपी मौके पर पहुंचे और मोर्चा संभाल लिया किसी तरह समझा बुझाकर दोनों पक्षों को हटाया गया। उसके बाद उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

कांग्रेस का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी महिला शाखा के वहां पहुंचने के पहले महिला कांग्रेस शाखा उन्हें गुलाब फूल देने के लिए तैयार थी। कांग्रेसीयों ने इस घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब यह सर्वविदित था कि भाजपा की महिला शाखा के द्वारा कांग्रेस कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया जाना है, तो इस कार्यक्रम में भाजपा के पुरुष नेताओं के पहुंचने का औचित्य क्या था? उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना सभी राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अव्यवस्था फैलाना, मारपीट करना, लाठी चलाना और पत्थरबाजी करना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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कांग्रेसीयों ने कहा कि कांग्रेस कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए प्रदर्शनकारियों का लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप स्वागत करने की तैयारी की गई थी। ऐसे माहौल में कथित तौर पर हिंसक स्थिति उत्पन्न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राजनीतिक मतभेदों को हिंसा में बदलना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के विरुद्ध है।
भाजपा विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा है कि बिष्टुपुर में भाजपा के महिला कार्यकर्ताओं पर कांग्रेसियों द्वारा सुनियोजित तरीके से की गई पत्थरबाजी घोर निंदनीय है। इस हमले में जमशेदपुर महानगर के दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता एवं महिला कार्यकर्ता घायल हुए हैं।
सत्ता से दूर होते ही कांग्रेस की बौखलाहट साफ दिखाई देने लगी है। जिस तरह कभी कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आती थीं, वैसा ही दृश्य आज कांग्रेसियों ने बिष्टुपुर की सड़कों पर दिखाया है।
कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार भाजपा पुरुष वर्ग के नेताओं ने कांग्रेस महिला शाखा के गुलाब का फुल लेकर भाजपा महिला शाखा का स्वागत करने की तैयारी कर रखी थी लेकिन सुनियोजित तरीके से भाजपा पुरुष वर्ग के नेताओं द्वारा लाठी डंडा और पत्थर चलाकर हमला कर दिया मजबूरन कांग्रेस के लोगों ने अपने बचाव में भाजपा नेताओं पर हमला बोल दिया लोकतंत्र में किसी भी दल के द्वारा घटना की शुरुआत की गई वह काफी शर्मनाक है और लोकतंत्र में काला धब्बा है
भाजपा महिला कार्यकर्ता हाथ में बैनर, नारे लगाते हुए आ रही थी जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित तिलक पुस्तकालय की हैं, जो कांग्रेस का जिला मुख्यालय है। जेएनयू प्रकरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी की महिला कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करने पहुंची ही थीं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता अपनी पूरी टीम के साथ पहले से तैयार थीं। हाथ में गुलाब का फूल लिए भाजपा कार्यकर्ताओं के स्वागत और जवाब के लिए तिलक पुस्तकालय के पास खड़ी थीं। उनका कहना था कि वे लोग शांतिपूर्ण तरीके से जवाब देंगी।
लेकिन देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया। दोनों पक्षों में पहले तीखी बहस हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पहले लाठी चली और उसके बाद दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। बिष्टुपुर का यह इलाका कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में बदल गया इस मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
बिष्टुपुर पुलिस मौके पर थी और दोनों पक्षों को शांत कराया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने नवरात्रि के शांत माहौल में सियासी गर्मी बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि इस हंगामे के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करती है।




