धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य सरकार से शीघ्र कार्रवाई का अनुरोध
सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI), जो सिंहभूम क्षेत्र के व्यापार, वाणिज्य एवं उद्योग जगत का शीर्ष प्रतिनिधि संगठन है, के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO), जमशेदपुर वन प्रमंडल सबा आलम अंसारी से शिष्टाचार भेंट कर प्रस्तावित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना हेतु वन भूमि हस्तांतरण (Forest Land Diversion) से संबंधित लंबित बिंदुओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य सरकार से शीघ्र कार्रवाई का अनुरोध
जमशेदपुर — सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI), जो सिंहभूम क्षेत्र के व्यापार, वाणिज्य एवं उद्योग जगत का शीर्ष प्रतिनिधि संगठन है, के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO), जमशेदपुर वन प्रमंडल सबा आलम अंसारी से शिष्टाचार भेंट कर प्रस्तावित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना हेतु वन भूमि हस्तांतरण (Forest Land Diversion) से संबंधित लंबित बिंदुओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की
उल्लेखनीय है कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India – AAI) ने दिनांक 09.07.2026 के पत्र (सं. AAI/RC/APD/Dhalbhumgarh/2026/) के माध्यम से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), वन संरक्षण प्रभाग, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 29.08.2024 के पत्र (सं. 8-16/2024-FC) में उठाए गए उन्नीस बिंदुओं में से अधिकांश पर बिंदुवार अनुपालन (Point-wise Compliance) प्रस्तुत कर दिया है। यह अनुपालन 99.256 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव (FP/JH/Others/41404/2019) से संबंधित है, जिसमें परिचालन क्षेत्र का घटक-वार विवरण, संशोधित लागत-लाभ विश्लेषण, प्रयोजन-वार KML फाइलें, अतिरिक्त वन भूमि उपयोग न किए जाने का वचनबद्धता-पत्र, जल-विज्ञान अध्ययन, सहायक सुविधाएं, वन्यजीव प्रबंधन योजना तथा मृदा-कटाव नियंत्रण उपाय जैसे विषय शामिल हैं। AAI ने संबंधित मानचित्र, KML फाइलें एवं वचनबद्धता-पत्र PARIVESH पोर्टल पर भी अपलोड कर दिए हैं।
तथापि, कुछ महत्वपूर्ण बिंदु ऐसे रह गए थे, जिन पर जानकारी सीधे जमशेदपुर वन प्रमंडल एवं/अथवा राज्य वन विभाग द्वारा ही प्रस्तुत की जानी थी — जैसे दस्तावेजित हाथी गलियारे “GAJAH” (घाटशिला-काकड़ाझोर, मुसाबनी-चाकुलिया, दुमरिया-कुंडलुका-मुरकंजिया) से संबंधित विवरण, विगत पांच वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष के आंकड़े (जनहानि, हाथियों की मृत्यु, संपत्ति क्षति एवं मुआवजा), परियोजना क्षेत्र में अनुसूची-I प्रजातियों की उपस्थिति एवं वन्यजीव आवास विखंडन पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपाल की टिप्पणी, DSS (Decision Support System) विश्लेषण के निष्कर्ष, तथा यह परीक्षण कि क्या प्रस्तावित स्थल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), प्रोजेक्ट एलीफेंट अथवा राज्य सरकार द्वारा चिन्हित किसी गलियारे में आता है।
चैंबर ने दिनांक 09.07.2026 के AAI पत्र के संदर्भ में झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन लंबित बिंदुओं के शीघ्र निष्पादन हेतु वन विभाग एवं डीएफओ जमशेदपुर को निर्देशित करने का अनुरोध किया था, ताकि MoEF&CC स्तर पर प्रस्ताव की आगे की प्रक्रिया बाधित न हो।
आज की मुलाकात में डीएफओ सबा आलम अंसारी ने चैंबर के प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया कि उपरोक्त सभी लंबित बिंदुओं पर उनके कार्यालय के स्तर से आवश्यक जानकारी एवं जवाब तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित किया जा चुका है, ताकि आगे राज्य वन विभाग एवं MoEF&CC के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने चैंबर को आश्वस्त किया कि उनकी ओर से इस महत्वपूर्ण परियोजना में कोई विलंब नहीं किया जाएगा और प्रकरण अब उच्च स्तर पर विचाराधीन है।
SCCI के अध्यक्ष मानव केडिया ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “हम डीएफओ कार्यालय, जमशेदपुर तथा स्वयं श्री सबा आलम अंसारी द्वारा दिखाई गई तत्परता का हार्दिक स्वागत करते हैं। यह जानकर प्रसन्नता हुई कि उनके स्तर से अपेक्षित जवाब वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जा चुका है। ढालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना केवल एक अवसंरचनात्मक परियोजना नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सिंहभूम क्षेत्र एवं झारखंड राज्य के आर्थिक भविष्य से जुड़ी एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।”
उन्होंने आगे कहा कि अब आवश्यक है कि राज्य वन विभाग के वरिष्ठ स्तर पर यह जानकारी शीघ्रता से परीक्षित कर PARIVESH पोर्टल पर अपलोड की जाए, जिससे केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय स्तर पर प्रक्रिया बिना किसी अवरोध के आगे बढ़ सके। चैंबर का मानना है कि जमशेदपुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्र के लिए बेहतर हवाई संपर्क, निवेश, पर्यटन एवं रोजगार सृजन की दृष्टि से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है, तथा वर्तमान सोनारी एयरोड्रम अपनी सीमित क्षमता के कारण आधुनिक वाणिज्यिक विमानन परिचालन हेतु उपयुक्त नहीं है।
श्री केडिया ने कहा कि चैंबर माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार से पुनः अनुरोध करता है कि इस प्रक्रिया की राज्य स्तर पर सतत एवं समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि वन प्रमंडल स्तर से भेजे गए जवाब राज्य वन विभाग एवं केंद्रीय मंत्रालय स्तर पर बिना किसी अनावश्यक विलंब के आगे बढ़ें और परियोजना को स्टेज-I/स्टेज-II वन स्वीकृति शीघ्र प्राप्त हो सके।
SCCI ने वन विभाग, जमशेदपुर वन प्रमंडल एवं जिला प्रशासन द्वारा अब तक दिए गए सहयोग की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि शेष प्रक्रिया भी शीघ्र एवं समयबद्ध ढंग से पूर्ण होगी। चैंबर ने पुनः दोहराया कि वह इस महत्वपूर्ण परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार, केंद्र सरकार तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को अपना पूर्ण सहयोग देने के लिए तत्पर है।









