श्रीराम मंदिर की दानपेटी में चोरी का मामला दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए
मंदिर की दानपेटी के अर्पण में चोरी, यह महापाप है मंदिरों का प्रबंधन भक्तों के पास ही होना चाहिए - हिन्दू जनजागृति समिति

श्रीराम मंदिर की दानपेटी में चोरी का मामला दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए
मंदिर की दानपेटी के अर्पण में चोरी, यह महापाप है मंदिरों का प्रबंधन भक्तों के पास ही होना चाहिए – हिन्दू जनजागृति समिति
अयोध्या का श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि यह दुनिया भर के करोड़ों हिन्दुओं के सदियों के बलिदान, दीर्घकालिक संघर्ष और श्रद्धा का प्रतीक है। मंदिर की दानपेटी के अर्पण में चोरी करना एक महापाप है और प्रभु श्रीराम उन्हें उनके कर्मों की सजा अवश्य देंगे। लेकिन सरकार को इस मामले में कौन दोषी है, इसकी शीघ्रता से जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए और दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति ने की है।
हमने इससे पहले भी कई बार यह मांग की है कि किसी भी मंदिर की समिति में केवल भगवान के भक्त ही होने चाहिए। चूँकि भक्त ईश्वर का उपासक होता है, इसलिए वह देव-निधि चुराने का विचार सपने में भी नहीं कर सकता यदि सच्चे अर्थों में मंदिरों का उद्धार करना है, तो भगवान के ऐसे भक्त ही मंदिर व्यवस्था में होने चाहिए। ऐसे मामलों के कारण सरकार ‘मंदिरों का सरकारीकरण (अधिग्रहण)’ करने का प्रयास करती है, जिसका हम हमेशा विरोध करेंगे, समिति ने यह स्पष्ट रुख अपनाया है।
जो सरकारी अधिकारी स्वयं भ्रष्ट होते हैं, जो सरकारी अधिकारी शासन तंत्र में गहराई से जड़ जमा चुकी भ्रष्ट व्यवस्था का हिस्सा होते हैं, वे सरकारी अधिकारी मंदिर समिति में भ्रष्टाचार को कैसे रोक सकेंगे? इसलिए धार्मिक स्थलों पर धर्मनिरपेक्ष सरकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। मंदिरों का सरकारीकरण होने के बाद मंदिर के कोष में भ्रष्टाचार बढ़ने के कई उदाहरण देशभर में हैं। इस दृष्टि से भगवान का सच्चा भक्त, जो मंदिर का दायित्व भगवान की सेवा मानकर स्वीकार करेगा, ऐसे भक्तों को ही मंदिरों का दायित्व सौंपा जाना चाहिए, ऐसा मत हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने व्यक्त किया
रमेश शिंदे,
राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिंदू जनजागृति समिति
(संपर्क क्र.: 99879 66666)




