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स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के तत्वावधान में आज प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया

वक्ताओं ने प्रेमचंद को जमीन से जुड़े यथार्थवादी कथाकार के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थीं। वक्ताओं ने कहा कि आज भी गोदान के होरी की तरह सीमांत किसान अपनी जमीन खोकर मजदूर बनने को विवश हैं और उनके बच्चे अपनी जड़ों से कटकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रेमचंद ने अपने लेख महाजनी सभ्यता में जिस व्यापारिक मानसिकता का उल्लेख करते हुए कहा था— "बिजनेस फॉर बिजनेस"— उसका यथार्थ आज भी समाज में स्पष्ट दिखाई देता है, जहाँ व्यापार का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना रह गया है और मानवीय संवेदनाएँ पीछे छूटती जा रही हैं

चाईबासा- स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के तत्वावधान में आज प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया

समारोह में वक्ताओं ने प्रेमचंद को जमीन से जुड़े यथार्थवादी कथाकार के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थीं। वक्ताओं ने कहा कि आज भी गोदान के होरी की तरह सीमांत किसान अपनी जमीन खोकर मजदूर बनने को विवश हैं और उनके बच्चे अपनी जड़ों से कटकर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रेमचंद ने अपने लेख महाजनी सभ्यता में जिस व्यापारिक मानसिकता का उल्लेख करते हुए कहा था— “बिजनेस फॉर बिजनेस”— उसका यथार्थ आज भी समाज में स्पष्ट दिखाई देता है, जहाँ व्यापार का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना रह गया है और मानवीय संवेदनाएँ पीछे छूटती जा रही हैं।
समारोह की अध्यक्षता स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पीयूष ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलसचिव डॉ. अमर कुमार ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी पूस की रात का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी किसानों का जीवन संघर्षों से घिरा हुआ है तथा खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है।
इस अवसर पर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कै, बंगला विभागाध्यक्ष डॉ. संचिता भूईसेन, ओड़िया विभाग के डॉ. बालकृष्ण बेहरा, जनजातीय भाषा विभाग के डॉ. चाकी तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संतोष कुमार ने किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने अपने प्रेषित संदेश में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का सशक्त दर्पण है। उन्होंने नई पीढ़ी से प्रेमचंद के साहित्य से प्रेरणा लेकर एक संवेदनशील और समतामूलक समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आहवान किया।

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