राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर द्वारा छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य, समावेशी शिक्षा एवं शिक्षण नवाचार पर पाँच दिवसीय फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम का सफल आयोजन
उच्च शिक्षा में संकाय सदस्यों की क्षमता संवर्धन तथा छात्र-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की परिकल्पना के अनुरूप,राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर द्वारा छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण, परामर्श सहयोग, सकारात्मक परिसर संस्कृति, शिक्षण नवाचार, डिजिटल शिक्षण, शोध पर्यवेक्षण तथा समावेशी शैक्षणिक वातावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित पाँच दिवसीय फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर द्वारा छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य, समावेशी शिक्षा एवं शिक्षण नवाचार पर पाँच दिवसीय फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम का सफल आयोजन

उच्च शिक्षा में संकाय सदस्यों की क्षमता संवर्धन तथा छात्र-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की परिकल्पना के अनुरूप,राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर द्वारा छात्र मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण, परामर्श सहयोग, सकारात्मक परिसर संस्कृति, शिक्षण नवाचार, डिजिटल शिक्षण, शोध पर्यवेक्षण तथा समावेशी शैक्षणिक वातावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित पाँच दिवसीय फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया

इस कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ 26 मई 2026 को आयोजित उदघाटन समारोह के साथ हुआ, जिसमें संस्थान के संकाय सदस्यों एवं अधिकारियों ने सहभागिता की। उदघाटन संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि संकाय सदस्य केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक एवं आदर्श व्यक्तित्व के रूप में स्वस्थ एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


उदघाटन दिवस का प्रथम सत्र संकाय सदस्यों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता विषय पर आयोजित किया गया। यह सत्र एनआईटी जमशेदपुर के डीन (फैकल्टी वेलफेयर) एवं डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात विशेषज्ञ सागरिका मिश्रा ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता, संकाय कल्याण तथा सहानुभूतिपूर्ण एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर अपने विचार साझा किए।
छात्र मार्गदर्शन एवं परिणाम-आधारित शिक्षा


4 जून 2026 को आयोजित सत्रों में प्रतिभागियों ने छात्र मार्गदर्शन एवं आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से संबंधित दो विशेषज्ञ व्याख्यानों में भाग लिया।

विषाणु सुरेश द्वारा प्रस्तुत स्टूडेंट मेंटरिंग स्किल्स विषयक व्याख्यान में छात्रों के समक्ष आने वाली दृश्य एवं अदृश्य चुनौतियों, जैसे भावनात्मक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों की आवश्यकताओं की समय रहते पहचान कर प्रभावी गुरु-शिष्य संबंध विकसित करने पर विशेष बल दिया
इसके पश्चात एन. टी. रूपा ने आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) एवं एक्टिव पेडागॉजी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण, पाठ्यक्रम समन्वयन, सतत मूल्यांकन तथा नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

सकारात्मक परिसर वातावरण एवं डिजिटल शिक्षण
कार्यक्रम की अगली श्रृंखला 11 जून 2026 को आयोजित की गई, जिसमें संस्थागत संस्कृति एवं डिजिटल शिक्षण पद्धतियों पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुए।
सोनल बावडेकर ने सकारात्मक परिसर वातावरण विषय पर व्याख्यान देते हुए समावेशी, सुरक्षित, सम्मानजनक एवं छात्र-अनुकूल परिसर के निर्माण की रणनीतियों पर चर्चा की, जो सहयोग, विविधता तथा मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करता है।
इसके बाद कल्याणी गोखले ने डिजिटल पेडागॉजी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण उपकरणों, तकनीक-सक्षम अधिगम, व्यक्तिगत शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन तथा उच्च शिक्षा में एआई के नैतिक उपयोग से संबंधित नवीनतम अवधारणाओं से संकाय सदस्यों को परिचित कराया।
डिजिटल अधिगम, शोध पर्यवेक्षण एवं संस्थागत संस्कृति
19 जून 2026 को आयोजित तीन विशेषज्ञ सत्रों ने संकाय सदस्यों की व्यावसायिक दक्षताओं को और अधिक सुदृढ़ किया।
कल्याणी गोखले ने एआई-आधारित ई-लर्निंग विषय पर व्याख्यान देते हुए ऑनलाइन शिक्षण, अध्ययन सामग्री निर्माण, छात्र सहभागिता एवं डिजिटल कक्षा प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोगों का प्रदर्शन किया।
डॉ. अभिजीत सिंह ने शोध पर्यवेक्षण एवं शोधार्थी प्रबंधन विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रभावी शोध निर्देशन, शोध नैतिकता, वैज्ञानिक संप्रेषण, प्रकाशन योजना तथा स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. शोधार्थियों के मार्गदर्शन की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला।
दिन के अंतिम सत्र में प्रिया कुमारी ने परिसर संस्कृति एवं सकारात्मक वातावरण निर्माण विषय पर व्याख्यान देते हुए संस्थागत मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क, समावेशिता तथा सहयोगात्मक शैक्षणिक संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया।
समापन समारोह
कार्यक्रम का समापन 29 जून 2026 को आयोजित भव्य समापन समारोह के साथ हुआ।
इस अवसर पर डॉ. के. पोद्दार ने संस्थागत संस्कृति एवं सकारात्मक परिसर वातावरण का प्रभाव विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थागत मूल्यों, प्रभावी नेतृत्व, संकाय सहभागिता तथा सहयोगात्मक कार्य संस्कृति को शैक्षणिक उत्कृष्टता की आधारशिला बताया।
समापन सत्र का अंतिम विशेषज्ञ व्याख्यान सागरिका मिश्रा द्वारा स्टूडेंट मेंटरिंग स्किल्स विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सहानुभूतिपूर्ण मार्गदर्शन, सक्रिय श्रवण, छात्र प्रेरणा, मानसिक स्वास्थ्य तथा समग्र विकास के महत्व पर विशेष बल दिया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ जिसमें शिक्षा मंत्रालय, आमंत्रित विशेषज्ञों, संस्थान प्रशासन आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागी संकाय सदस्यों के प्रति उनके बहुमूल्य सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया गया।
यह कार्यक्रम प्रो. सरोज कुमार षाडंगी, डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) एवं रजिस्ट्रार (प्रभारी), तथा प्रो. दिलीप कुमार यादव, डीन (फैकल्टी वेलफेयर) के अध्यक्षीय मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुमारी नम्रता एवं डॉ. सक्थिवेल एस थे। कार्यक्रम समन्वयकों में डॉ. विजय कुमार डल्ला, डॉ. कुनाल सिंह, डॉ. संगीता कुमारी तथा डॉ. पौलमी माजी शामिल थे, जबकि अजिताभ गौतम एवं पुष्पा बाला महतो ने सह-समन्वयक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के प्रमुख विषय
* छात्र मार्गदर्शन एवं परामर्श
* मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण
* संकाय सदस्यों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता
* आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE)
* सक्रिय अधिगम आधारित शिक्षण पद्धति
* डिजिटल पेडागॉजी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता
* एआई-आधारित ई-लर्निंग
* शोध पर्यवेक्षण एवं शोधार्थी प्रबंधन
* सकारात्मक परिसर वातावरण
* संस्थागत संस्कृति
* समावेशी शैक्षणिक अभ्यास
कार्यक्रम के परिणाम
इस फैकल्टी उन्नयन कार्यक्रम ने संकाय सदस्यों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, प्रभावी मार्गदर्शन कौशल, डिजिटल शिक्षण दक्षताओं तथा छात्र कल्याण एवं समावेशी शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की रणनीतियों से समृद्ध किया। विशेषज्ञ व्याख्यानों ने प्रतिभागियों को नवाचारी शिक्षण विधियों, तकनीक-सक्षम अधिगम, प्रभावी शोध पर्यवेक्षण तथा संवेदनशील छात्र मार्गदर्शन को अपने शैक्षणिक दायित्वों में समाहित करने के लिए प्रेरित किया।
यह पहल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर की छात्र-केंद्रित, समावेशी एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करती है। साथ ही यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की परिकल्पना एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप उच्च शिक्षा में गुणवत्ता नवाचार एवं समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।
