झारखंड राज्य सूचना आयुक्त चयन प्रक्रिया की जानकारी देने से विभाग का इंकार, 220 किलोमीटर दूर से बुलाकर की गई औपचारिक सुनवाई – चन्द्रदेव वर्णवाल
नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी संचिका लोग भवन में होने का बात करके सूचना उपलब्ध नहीं करा रहा है कार्मिक विभाग अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ जजमेंट का हो रहा है उल्लंघन - हमर अधिकार मंच

झारखंड राज्य सूचना आयुक्त चयन प्रक्रिया की जानकारी देने से विभाग का इंकार, 220 किलोमीटर दूर से बुलाकर की गई औपचारिक सुनवाई – चन्द्रदेव वर्णवाल

नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी संचिका लोग भवन में होने का बात करके सूचना उपलब्ध नहीं करा रहा है कार्मिक विभाग
अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ जजमेंट का हो रहा है उल्लंघन – हमर अधिकार मंच

रांची- हमर अधिकार मंच, झारखंड के सचिव एवं आरटीआई कार्यकर्ता चन्द्रदेव कुमार वर्णवाल ‘चंदू’ द्वारा राज्य सूचना आयुक्त के पद पर चयनित अभ्यर्थियों की योग्यता, अनुभव, उपलब्धियों एवं चयन प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई थी
उल्लेखनीय है कि कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर राज्य सूचना आयुक्त के पद हेतु प्राप्त आवेदनों में से पांच अभ्यर्थियों के नाम नियुक्ति के लिए राज्यपाल को भेजे जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जनविश्वास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चयनित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, व्यापक ज्ञान, अनुभव, प्रतिष्ठा, वर्तमान व्यवसाय, उपलब्धियों तथा आवेदन के साथ संलग्न प्रमाण-पत्रों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण नियमानुसार प्रथम अपील दायर की गई।
इस संबंध में प्रथम अपीलवाद संख्या-20/2026 की सुनवाई आज दिनांक 19 जून 2026 को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी श्री अमर कुमार, संयुक्त सचिव सर्वप्रथम आपके लिए प्राधिकारी के कार्यालय, प्रोजेक्ट भवन, रांची में आयोजित हुई।
सुनवाई के दौरान स्थिति अत्यंत निराशाजनक रही। प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पूर्व निर्देश के बावजूद संबंधित डीम्ड जन सूचना पदाधिकारी न तो मांगी गई सूचना उपलब्ध करा सके और न ही आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर सके।
पहले संचिका अपने पास नहीं होने की बात कही गई, फिर यह कहा गया कि संबंधित फाइल राज्यपाल के कार्यालय में है
इसके बाद बुलाए गए अन्य विभागीय पदाधिकारी ने भी यही तर्क दोहराया, जबकि दिनांक 10 जून 2026 को ही चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का अधिसूचना कार्मिक विभाग ने जारी किया है, तब यहां सवाल यह उठता है कि यदि संचिका लोकभवन में है तो फिर उस संचिका के आधार पर कार्मिक विभाग ने अधिसूचना कैसे जारी कर दी❓ और अब जब उसी संचिका से जुड़ी सूचना मांगी जा रही है तो उक्त संचिका का राज्यपाल कार्यालय, लोक भवन में होने का बहाना बनाकर सूचना को रोका जा रहा है।
सुनवाई के दौरान प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा मौखिक रूप से यह भी कहा गया कि राज्य सूचना आयुक्तों के शपथ ग्रहण के बाद सूचना उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नियुक्ति अथवा शपथ ग्रहण तक चयन प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों को रोका जाए, विशेषकर तब जब मांगी गई सूचना सार्वजनिक हित और पारदर्शिता से सीधे जुड़ी हो।
हमर अधिकार मंच के अध्यक्ष दीपेश निराला का मानना है कि राज्य सूचना आयुक्त का पद स्वयं सूचना के अधिकार और पारदर्शिता की रक्षा से जुड़ा हुआ संवैधानिक महत्व का पद है ऐसे पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जितनी अधिक पारदर्शी होगी जनता का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं में उतना ही मजबूत होगा, जैसा कि अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ और नमित शर्मा बनाम भारत संघ के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विभाग पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वही विभाग सूचना उपलब्ध कराने में टालमटोल करता दिखाई दिया और मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के बजाय अपीलकर्ता को लगभग 220 किलोमीटर दूर गिरिडीह से रांची बुलाकर केवल औपचारिक सुनवाई की गई।
यदि विभाग के पास अभिलेख उपलब्ध नहीं थे अथवा सूचना देने की तैयारी नहीं थी, तो सुनवाई की तिथि निर्धारित करने और अपीलकर्ता को उपस्थित होने के लिए बाध्य करने का कोई औचित्य नहीं था। यह न केवल सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है, बल्कि आम नागरिकों के समय, श्रम और संसाधनों की भी अनदेखी है।
हमर अधिकार मंच इस मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का उपयोग करते हुए आगे की कार्रवाई करेगा तथा राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को जारी रखेगा



