सोना देवी विश्वविद्यालय में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ पर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित
युवाओं से नवाचार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक सोच के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आहवान - कुलाधिपति प्रभाकर सिंह

सोना देवी विश्वविद्यालय में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ पर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित

युवाओं से नवाचार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक सोच के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आहवान – कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
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घाटशिला- सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में सेवा संकल्प अभियान के तत्वावधान में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ को लेकर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को नवाचार की शक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से समाज की वास्तविक समस्याओं को पहचानने, उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने और अपनी प्रतिभा का उपयोग जनसेवा एवं देश के विकास के लिए करने का आहवान किया।

कार्यक्रम में लखन मरांडी, स्वतंत्र निदेशक, MRPL-ONGC तथा डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं केएमपीएम कॉलेज के प्रोफेसर की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मंच संचालन विश्वविद्यालय की सहायक कुलसचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने किया। उन्होंने विषय का परिचय देते हुए कहा कि ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ युवाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने, नए विचारों को व्यावहारिक स्वरूप देने तथा समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस पहल में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।

सेवा की भावना से नवाचार को जोड़ें युवा – लखन मरांडी
लखन मरांडी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस, 17 सितंबर से प्रारंभ हुई यह पहल सेवा की भावना को नवाचार के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ‘सेवा प्रथम’ की सोच से प्रेरणा लेते हुए युवाओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में स्वीकार करने तथा इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास ज्ञान, ऊर्जा, तकनीकी समझ और नई सोच की अपार क्षमता है। यदि इस क्षमता को सामाजिक जरूरतों के समाधान से जोड़ा जाए, तो समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

श्री मरांडी ने बताया कि इस चुनौती के अंतर्गत कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए विचार एवं समाधान प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करने की अपील की, जो केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि आम लोगों के जीवन को सरल, सुरक्षित और बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हों।

युवाओं की भागीदारी से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प – डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी
डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की ऐतिहासिक एवं वर्तमान भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष से लेकर आज के आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण तक युवाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान समय में भी देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं की प्रतिभा, परिश्रम, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे विकास कार्यों, आधारभूत संरचना के विस्तार, वैज्ञानिक उपलब्धियों, तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष संबंधी उपलब्धियां, चंद्रयान मिशन की सफलता तथा स्वदेशी तकनीक एवं रक्षा प्रणालियों में हो रही प्रगति देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मविश्वास को प्रदर्शित करती हैं। ये उपलब्धियां विद्यार्थियों को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
डॉ. गोस्वामी ने भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का स्मरण करते हुए आर्यभट, प्राचीन नालंदा एवं तक्षशिला विश्वविद्यालयों तथा भारतीय साहित्य और इतिहास के महान व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने मैथिलीशरण गुप्त सहित उन महापुरुषों और राष्ट्रनायकों को याद करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिनके विचारों एवं योगदान से नई पीढ़ी को पर्याप्त परिचित कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेकर ही युवा भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकते हैं।
पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सृजनशीलता और कौशल विकास को विकसित भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा भारत बनाना आवश्यक है, जहां गरीबी और बेरोजगारी कम हो, युवाओं को उनकी योग्यता एवं दक्षता के अनुरूप रोजगार के अवसर मिलें तथा महिला-पुरुष के बीच समानता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिले।
उन्होंने कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने और सुशासन एवं पारदर्शिता को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे छोटे-छोटे प्रयोगों, सामुदायिक सेवा और स्थानीय समस्याओं के समाधान से अपने नवाचार की शुरुआत करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प साकार किया जा सकता है।
नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से मजबूत होगा राष्ट्र – कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रचनात्मक चिंतन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा को समाजोपयोगी दिशा देने तथा ऐसे विचारों एवं परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के महत्व पर बल दिया, जो वर्तमान सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप हों और भविष्य में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हों।
उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखते हुए उसे सामाजिक सेवा, अनुसंधान, समस्या समाधान और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश दिया।
विकसित भारत के निर्माण में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण – कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। देश की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ बौद्धिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास के लिए विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करना होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देना भी है। विद्यार्थियों को सेवा की भावना, रचनात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, परिवार एवं सामाजिक मूल्यों को महत्व देने तथा शिक्षा को सेवा और विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री सिंह ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब देश का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा पीढ़ी, अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए राष्ट्रहित में कार्य करे। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ को स्वीकार करने, प्रभावी एवं उपयोगी परियोजनाएं तैयार करने तथा अपने ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से देश की प्रगति में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने ‘श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
₹2 करोड़ के पुरस्कार, युवाओं को मिलेगा नवाचार का अवसर
कार्यक्रम में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ के उद्देश्यों, संभावनाओं और सहभागिता के अवसरों की जानकारी दी गई। इस पहल के अंतर्गत कॉलेज के विद्यार्थियों, व्यक्तिगत प्रतिभागियों तथा विभिन्न टीमों को अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता के लिए कुल ₹2 करोड़ के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। प्रतिभागी कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण एवं सतत विकास जैसे क्षेत्रों में समाजोपयोगी समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को अपने विचारों को व्यावहारिक स्वरूप देने, सामाजिक समस्याओं के समाधान विकसित करने और नवाचार के जरिए सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इच्छुक प्रतिभागियों से 30 अक्टूबर तक प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की गई।
कार्यक्रम का समग्र संदेश यही रहा कि नवाचार का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका लाभ समाज तक पहुंचे। युवाओं की कल्पनाशीलता, वैज्ञानिक सोच, तकनीकी दक्षता और सेवा भावना देश की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकती है। सोना देवी विश्वविद्यालय के इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, नए विचारों के साथ आगे बढ़ने और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


