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शिक्षा में रंगमंच – रविवार रंगमंच कार्यशाला” का सफल आयोजन

विद्यार्थियों एवं युवाओं ने जाना रंगमंच का महत्व, अभिनय से लेकर सिनेमा और कला की विभिन्न विधाओं पर हुआ संवाद

शिक्षा में रंगमंच – रविवार रंगमंच कार्यशाला” का सफल आयोजन

विद्यार्थियों एवं युवाओं ने जाना रंगमंच का महत्व, अभिनय से लेकर सिनेमा और कला की विभिन्न विधाओं पर हुआ संवाद

जमशेदपुर- गीता थिएटर जमशेदपुर एवं जमशेदपुर स्कूल ऑफ ड्रामा के संयुक्त तत्वावधान में “शिक्षा में रंगमंच – रविवार रंगमंच कार्यशाला” का सफल आयोजन रविवार को गिरजाघर हॉल, बाराद्वारी, नियर गांधी आश्रम, साकची, जमशेदपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन पूर्व निर्धारित समय सुबह 11 बजे रंगकर्मी एवं युवा फिल्मकार प्रेम शर्मा तथा रीमा डे द्वारा किया गया।

कार्यशाला में विद्यार्थियों एवं युवाओं को रंगमंच के माध्यम से शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। विशेष रूप से केरला पब्लिक स्कूल, बार्मामाइंस के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक कार्यशाला में भाग लिया।

रंगमंच से सिनेमा तक का सफर बताया प्रेम शर्मा ने जमशेदपुर के युवा फिल्मकार एवं रंगकर्मी प्रेम शर्मा ने विद्यार्थियों और युवाओं के साथ अपने रंगमंच से सिनेमा तक के सफर को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रंगमंच की कार्यशालाओं से जुड़ने के बाद उन्होंने करीम सिटी कॉलेज में प्रवेश लिया, मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की और रंगमंच के साथ-साथ सिनेमा निर्माण की बारीकियों को भी समझा।

उन्होंने कहा कि रंगमंच केवल मंच पर अभिनय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच, संवाद क्षमता और रचनात्मकता को विकसित करने का माध्यम है।

कार्यशाला के दौरान प्रेम शर्मा ने विद्यार्थियों के साथ कई रंगमंचीय खेल एवं गतिविधियां भी कराईं। इनमें एक-दूसरे के नाम याद रखना, किसी व्यक्ति की नकल करना तथा उसमें अपनी कल्पना जोड़कर उसे मजेदार अंदाज में प्रस्तुत करना जैसी गतिविधियां शामिल थीं। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को सहज तरीके से मंचीय अभिव्यक्ति और अभिनय की बारीकियों से परिचित कराया।

“शिक्षा में रंगमंच व्यक्तित्व विकास का प्रभावी माध्यम” — रीमा डे

जमशेदपुर की दैनिक पत्रिका की संवाददाता रीमा डे ने विद्यार्थियों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए “शिक्षा में रंगमंच” के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में रंगमंच का महत्व केवल अभिनय सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास का प्रभावी माध्यम है। रंगमंच के माध्यम से आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति की क्षमता, रचनात्मक सोच और संचार कौशल का विकास होता है।

मंच पर संवाद और प्रस्तुति देने से झिझक कम होती है तथा अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का आत्मविश्वास बढ़ता है। अलग-अलग पात्रों को निभाने से कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता विकसित होती है। वहीं, सामूहिक रूप से नाटक तैयार करने से टीमवर्क, सहयोग, जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना मजबूत होती है।

उन्होंने कहा कि नाट्य, नृत्य, गीत, चित्रांकन और एंकरिंग जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी छिपी प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने का अवसर देती हैं। रंगमंच शिक्षा को अधिक रोचक, रचनात्मक और अनुभवात्मक बनाता है तथा विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से सीखने का अवसर प्रदान करता है।

विभिन्न कला विधाओं से कराया गया परिचय-

गीता थिएटर के अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केरला पब्लिक स्कूल, बार्मामाइंस के विद्यार्थियों का “शिक्षा में रंगमंच – रविवार रंगमंच कार्यशाला” में शामिल होना उत्साहजनक है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को रंगमंच से जोड़ने के साथ-साथ उनके भीतर आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच, अभिव्यक्ति, नैतिक मूल्यों और मंचीय कौशल का विकास करना है।

कार्यशाला के दौरान प्रेम शर्मा ने नाट्य एवं एंकरिंग, अनुराधा गोयल ने नृत्य एवं गीत तथा माटिन सुंडी ने मॉडलिंग एवं चित्रांकन से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन प्रतिभागियों को दिया।

इस दौरान प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि कला की अलग-अलग विधाओं में रुचि रखने वाले युवा अपनी प्रतिभा को किस प्रकार प्रशिक्षण और मंच के माध्यम से आगे बढ़ा सकते हैं।

हर रविवार जारी रहेगी “शिक्षा में रंगमंच” कार्यशाला-

कार्यक्रम के समापन अवसर पर जमशेदपुर स्कूल ऑफ ड्रामा के संस्थापक ने सभी प्रशिक्षकों, विद्यार्थियों एवं युवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने युवाओं को कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़कर तनावमुक्त, रचनात्मक और कलात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया तथा रंगमंच से जुड़ने के लिए मार्गदर्शन दिया।

आयोजकों ने बताया कि जमशेदपुर के अधिक से अधिक विद्यालयों को इस अभियान से जोड़ने को लेकर भी चर्चा की गई है। “शिक्षा में रंगमंच – रविवार रंगमंच कार्यशाला” को प्रत्येक रविवार आयोजित करने की योजना बनाई गई है।

कार्यशाला में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले प्रतिभागियों को आगे निःशुल्क रविवार थिएटर क्लासेस से जुड़ने का अवसर मिलेगा। चयनित श्रेष्ठ प्रतिभागियों को राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव में भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाएगा। वहीं कार्यशाला में शामिल सभी प्रतिभागियों को नाट्य ट्रस्ट की ओर से Verified प्रतिभागी सम्मान पत्र प्रदान किया जाएगा।

प्रशासनिक सहयोग के लिए अधिकारियों से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल-

गीता थिएटर एवं जमशेदपुर स्कूल ऑफ ड्रामा के पदाधिकारियों ने बताया कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कला एवं खेलकूद अधिकारी तथा जिला युवा अधिकारी, पूर्वी सिंहभूम से मुलाकात कर “शिक्षा में रंगमंच” अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने के लिए प्रशासनिक सहयोग हेतु आवेदन करेगा।

आयोजकों ने जमशेदपुर के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से अपील की कि वे अपने विद्यार्थियों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों एवं युवाओं को कला, संस्कृति, रचनात्मक अभिव्यक्ति और मंचीय गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास निरंतर आगे बढ़ाया जा सके।

आयोजकों का उद्देश्य है कि “शिक्षा में रंगमंच” जैसी पहल के माध्यम से जमशेदपुर के युवाओं, विशेषकर Gen Z, में अनुशासन, रचनात्मकता, सकारात्मक सोच और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा मिले तथा वे अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे उचित मंच तक पहुंचा सकें।

इस कार्यशाला के सफल आयोजन में सुंदरम संस्था के डा० ताजदार आलम, संपूर्ण आश्रय सस्था से सुष्मिता सरकार, हिंद आईटीआई से डॉक्टर ताहिर हुसैन, सेल विला मोबाइल शॉप के संचालक अमित कुमार सिंह एवं गीता थिएटर के युवा सदस्य तमन्ना राव, ममता सिंह, गंगा मंडल, देव सिंह सरदार, भूमिका पटेल का बहुमुल्य सहयोग

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