Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी   Click to listen highlighted text! Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी
Uncategorized

जमशेदपुर में बिखरे सोहराई के रंग: कैफे रीगल में 21 प्रतिभागियों ने बारीकी से समझी झारखंड की पारंपरिक लोक कला

'द हाइप एंटरटेनमेंट', अर्नब कोले और अमरनाथ योगी की पहल 3 घंटे के प्रैक्टिकल सेशन में डॉक्टर, छात्र, आर्टिस्ट और प्रोफेशनल्स ने प्राकृतिक रंगों से कैनवास पर उकेरीं सोहराई पेंटिंग्स

जमशेदपुर में बिखरे सोहराई के रंग: कैफे रीगल में 21 प्रतिभागियों ने बारीकी से समझी झारखंड की पारंपरिक लोक कला

‘द हाइप एंटरटेनमेंट’, अर्नब कोले और अमरनाथ योगी की पहल

3 घंटे के प्रैक्टिकल सेशन में डॉक्टर, छात्र, आर्टिस्ट और प्रोफेशनल्स ने प्राकृतिक रंगों से कैनवास पर उकेरीं सोहराई पेंटिंग्स

जमशेदपुर- बिष्टुपुर स्थित कैफे रीगल में रविवार को सोहराई लोक कला पर केंद्रित एक दिवसीय व्यावहारिक (‘हैंड्स-ऑन’) कार्यशाला संपन्न हुई. इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से आए 21 प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर झारखंड की इस अनूठी और प्राचीन कला परंपरा का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया.

इंजीनियर अमरनाथ योगी, विजुअल आर्टिस्ट अर्नब कुमार कोले और ‘द हाइप एंटरटेनमेंट’ (THE) के साझा प्रयास से यह कार्यशाला आयोजित की गई थी. सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चले इस तीन घंटे के सत्र का मुख्य ध्येय नई पीढ़ी और आधुनिक समाज को सोहराई कला की ऐतिहासिकता, इसके प्रतीकों और सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ना तथा इसके संरक्षण के प्रति जागरूक करना था.

प्रकृति और लोक आस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है सोहराई

​सोहराई पेंटिंग मूल रूप से झारखंड के फसल कटाई उत्सव से जुड़ी एक समृद्ध परंपरा है. पारंपरिक तौर पर इसे मिट्टी के घरों की दीवारों पर गेरू, प्राकृतिक रंगों और मिट्टी के माध्यम से उकेरा जाता है. इसमें पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, प्राकृतिक तत्वों और जनजीवन से जुड़े चिन्हों का कलात्मक प्रयोग होता है. गौरतलब है कि झारखंड की इस विशिष्ट लोक कला को इसकी प्रादेशिक पहचान और सांस्कृतिक महत्ता के लिए जीआई (Geographical Indication) टैग भी हासिल है. बता दें कि जीआई टैग किसी क्षेत्र विशेष के उत्पाद या कला को एक विशेष कानूनी सुरक्षा देता है ताकि कोई अन्य इसके नाम का दुरुपयोग कर नकली उत्पाद न बेच सके.

इतिहास की समझ से लेकर कैनवास पर पेंटिंग तक

​कार्यशाला का शुभारंभ एक सहज परिचयात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को सोहराई के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहलुओं से अवगत कराया गया. इसके बाद मुख्य मार्गदर्शक अर्नब कुमार कोले ने सोहराई की बारीकियों, पारंपरिक शैलियों, रंग-संयोजन और प्रतीकों के अर्थ का लाइव डेमो प्रस्तुत किया. पेशे से इंजीनियर और विजुअल आर्टिस्ट अर्नब को फाइन आर्ट्स के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने हाल ही में नेशनल लेवल पर आयोजित ‘वन स्टेट वन आर्टिस्ट’ (OSOA) लोक कला सम्मेलन में झारखंड की सोहराई कला का प्रतिनिधित्व किया था.

दूसरे ​सत्र में सभी प्रतिभागियों ने अर्नब कुमार कोले के मार्गदर्शन में स्वयं सोहराई पेंटिंग्स तैयार कीं. डॉक्टरों, कलाकारों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और जनजातीय समुदाय के सदस्यों ने एक साथ मिलकर चित्रकारी की, जिससे कला और संस्कृति के परस्पर आदान-प्रदान का खूबसूरत वातावरण निर्मित हुआ.

​विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी और प्रमाण पत्र वितरण

​इस आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार सह सामाजिक कार्यकर्ता अन्नी अमृता और माहवारी स्वच्छता को लेकर अपने संगठन ‘निश्चय’ के माध्यम से दिन-रात कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार भी मौजूद रहे. कार्यक्रम के समापन पर सभी 21 प्रतिभागियों की कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया और उन्हें सहभागिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया.

​आयोजक अमरनाथ योगी ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल सोहराई का इतिहास पढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को खुद इसे कैनवास पर महसूस कराने का मंच देना था. विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साथ आकर कला रचते देखना बेहद प्रेरणादायक अनुभव रहा. अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और युवाओं को जोड़ने के लिए हम भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक आयोजन करते रहेंगे

वहीं प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला के बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तीन घंटे ऐसे बीते कि किसी को पता ही नहीं चला..ये तीन घंटे मन को एक अदभुत शांति दे रहे थे. ऐसा सुकूनदायक माहौल बहुत कम देखने को मिलता है, जहां कोई प्रतियोगिता नहीं थी, जहां सबने सीखा और आनंद महसूस किया

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!