कंपनी परिसर की मौत पर नेता आपस में उलझे भाजपा और कांग्रेस सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए क्यों नहीं दिखती वही सक्रियता? — अप्पू तिवारी
टिनप्लेट में आज जमीन धंसने से बागबेड़ा निवासी एक मजदूर की मौत और एक अन्य मजदूर के घायल होने की घटना ने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा और मुआवजे का सवाल खड़ा कर दिया है। घटना के बाद मुआवजे की मांग को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के आपस में उलझने की बात सामने आई, जिस पर आजसू नेता अप्पू तिवारी ने राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाया है

कंपनी परिसर की मौत पर नेता आपस में उलझे भाजपा और कांग्रेस सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए क्यों नहीं दिखती वही सक्रियता? — अप्पू तिवारी
जमशेदपुर- टिनप्लेट में आज जमीन धंसने से बागबेड़ा निवासी एक मजदूर की मौत और एक अन्य मजदूर के घायल होने की घटना ने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा और मुआवजे का सवाल खड़ा कर दिया है। घटना के बाद मुआवजे की मांग को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के आपस में उलझने की बात सामने आई, जिस पर आजसू नेता अप्पू तिवारी ने राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाया है
अप्पू तिवारी ने कहा कि मजदूर की मौत बेहद दुखद है और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा तथा घायल मजदूर को बेहतर उपचार मिलना चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि जब शहर की सड़कों पर लगातार आम लोगों की जान जा रही है, तब उन्हीं राजनीतिक नेताओं की सक्रियता सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ित परिवारों के न्याय के लिए क्यों दिखाई नहीं देती?
उन्होंने कहा कि कंपनी परिसर में किसी मजदूर की मौत होती है तो मुआवजे के सवाल पर नेता आमने-सामने आ जाते हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में पिता-पुत्र, मजदूर, युवा और आम नागरिकों की मौत होने पर पीड़ित परिवारों की आवाज उठाने के लिए वही राजनीतिक सक्रियता नजर नहीं आती।
मजदूर की मौत हो या सड़क पर आम नागरिक की मौत—हर जान की कीमत बराबर है। न्याय और मुआवजे का सवाल किसी पार्टी की राजनीति का विषय नहीं, मानवीय संवेदना का विषय होना चाहिए। — अप्पू तिवारी
उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल वास्तव में जनता और मजदूरों के हित की बात करते हैं तो उन्हें कंपनी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ शहर की सड़क सुरक्षा, भारी वाहनों के अनियंत्रित आवागमन, ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना पीड़ित परिवारों के मुआवजे के मुद्दे पर भी एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए।
अप्पू तिवारी ने कहा कि मौत पर राजनीति नहीं, पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने की जरूरत है। कंपनी परिसर हो या शहर की सड़क—हर हादसे के बाद न्याय की आवाज समान रूप से उठनी चाहिए।

