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प्रतिशत कब से ले रहे हैं? कैसे ले रहे हैं? गणना कैसे की? एक भी ट्रेन का नाम क्यों नहीं बताया?

सरयू राय का ट्रेनों की पंक्चुअलिटी पर सीनियर डीसीएम से सवाल चक्रधरपुर डिवीजन के अधिकारी अब झूठ परोस रहे हैं -तथ्यों की हेरा-फेरी कर रहे हैं कुशाग्र बुद्ध वाले अफसर -राखा माइंस से टाटानगर पहुंचने में घंटों क्यों लगते हैं -टाटानगर में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित क्यों नहीं किया -एक वीडियो में रेलमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं ट्रेन लेट होने की बात -भाजपा को मेमोरेंडम की कापी भेजी गई है -बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू से बात हुई है

सरयू राय का ट्रेनों की पंक्चुअलिटी पर सीनियर डीसीएम से सवाल

प्रतिशत कब से ले रहे हैं? कैसे ले रहे हैं? गणना कैसे की? एक भी ट्रेन का नाम क्यों नहीं बताया?

-चक्रधरपुर डिवीजन के अधिकारी अब झूठ परोस रहे हैं
-तथ्यों की हेरा-फेरी कर रहे हैं कुशाग्र बुद्ध वाले अफसर
-राखा माइंस से टाटानगर पहुंचने में घंटों क्यों लगते हैं
-टाटानगर में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित क्यों नहीं किया
-एक वीडियो में रेलमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं ट्रेन लेट होने की बात
-भाजपा को मेमोरेंडम की कापी भेजी गई है
-बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू से बात हुई है

जमशेदपुर- जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि ट्रेनों की लेटलतीफी रोक पाने में असफल चक्रधरपुर डिवीजन के अधिकारीगण अब झूठ परोसना शुरु कर चुके हैं। ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ चल रहा उनका आंदोलन अब जनमुद्दा बनता जा रहा है।
रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह के साथ सोशल मीडिया पर सरयू राय ने कहा कि 26 अप्रैल को हम लोगों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया जो बेहद सफल रहा। उस हस्ताक्षर अभियान पर प्रतिक्रिया दी चक्रधरपुर के सीनियर डीसीएम ने। उन्होंने टाटानगर जंक्शन में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अब ट्रेनों की पंक्चुअलिटी 65 से 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरयू राय ने जानना चाहा कि सीनियर डीसीएम प्रतिशत कब से ले रहे हैं, कैसे ले रहे हैं, इसकी गणना उन्होंने कैसे की और एक भी ट्रेन का नाम उन्होंने क्यों नहीं बताया?
सरयू राय ने कहा कि ये अफसर कुशाग्र बुद्धि के होते हैं लेकिन ये तथ्यों की हेरा-फेरी करते हैं। उन्होंने कहा कि हमलोग सिर्फ एक ही मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि टाटानगर जंक्शन पर समय से गाड़ियां आएं और समय से जाएं। इसके अलावा हमारी कोई मांग है ही नहीं। चांडिल, कांड्रा, राखा माइंस तक जब यात्री ट्रेनें समय से पहुंच जाती हैं तो इन स्थानों से टाटानगर पहुंचने में ट्रेनों को तीन-साढ़े तीन घंटे क्यों लगते हैं। हमें रेलवे से इसी सवाल का जवाब चाहिए। इसके जवाब में वो बताते हैं कि देश भर में रेलवे का परिचालन कैसे होता है, क्या इसमें टेक्निक्लिटी है, कैसे लाइन बदली जाती है। हम एक साधारण सवाल पूछ रहे हैं और उसी के लिए आंदोलन कर रहे हैं। हमारे सवाल का इनके पास कोई जवाब नहीं है।
सरयू राय ने कहा कि पहले हम लोग कह रहे थे कि यात्री ट्रेनों को रोक कर आप लोग मालगाड़ियों को पास करा रहे हैं। शुरु में इनकार किया। बाद में रेलवे ने दबी जुबान से स्वीकार कर लिया। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के एक वीडियो का जिक्र करते हुए सरयू राय ने कहा कि रेलमंत्री ने स्वीकार किया कि टाटा स्टील, सेल (बोकारो) और दुर्गापुर की फैक्ट्री में लोहा उत्पादन होता है। इन तीनों को लौह अयस्क चाहिए। यही रास्ता है, जहां से लौह-अयस्क जाता है। इस कारण से मालगाड़ियों की आवाजाही बढ़ गई है और यात्री ट्रेनें लेट हो रही हैं। हालांकि रेलमंत्री भी इसे संपूर्णता में नहीं बता रहे हैं। स्टील फैक्ट्रियां तो 60 से 100 साल से खुली हुई हैं। ये स्थिति पहले पैदा क्यों नहीं हुईं। उन्होंने रेलमंत्री से आग्रह किया कि वो चक्रधरपुर के अफसरों से पूछें कि सही स्थिति क्या है।
श्री राय ने जानना चाहा कि जब देश भर में रेलवे का आधुनिकीकरण हो रहा है, इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो रहा है, रेल लाइनें ज्यादा बिछायी जा रही हैं तो टाटानगर को इससे क्यों वंचित रखा गया। टाटानगर क्षेत्र में ज्यादा रेल लाइनें क्यों नहीं बिछाई गईं। आदित्यपुर से लेकर सलगाजुड़ी तक तीसरी रेल लाइन क्यों नहीं बिछाई गई।
श्री राय ने सीनियर डीसीएम के प्रेस कांफ्रेंस के बारे में कहा कि उन्होंने बड़े-बड़े बयान दे दिये लेकिन ये नहीं बताया कि चांडिल के बाद ट्रेनों को टाटानगर पहुंचने में घंटों क्यों लगते हैं। ये दरअसल गुमराह करने की कोशिश है। मेधावी मस्तिष्क वालों से इस तरह के रवैये की उम्मीद नहीं की जाती। टाटानगर के लोगों के लिए कोलकाता जाने के लिए स्टील और इस्पात, दो ही गाड़ियां हैं। किसी को पता नहीं होता कि ये दोनों गाड़ियां टाटानगर जंक्शन पर कब पहुंचेंगी। यही हाल जनशताब्दी का है। वह इतना लेट हो जाती है कि पैसेंजर उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। टाटानगर से बादामपहाड़ या अन्य स्थान पर चलने वाली ट्रेनों, मेमू आदि के बारे में सीनियर डीसीएम या डीआरएम चर्चा ही नहीं करते। ये ट्रेनें स्थानीय लोगों के जीवन से जुड़ी हैं। रोज इसी से सफर करते हैं लोग। ये भी विलंब से चलती हैं। हम लोग कोई बात कहते हैं कि सीनियर डीसीएम राजनीतिक बयान कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं। जब वह इसे राजनीतिक बयान कहते हैं तो हमें लगता है कि सीनियर डीसीएम के दिमाग में ही राजनीति घूस गई है।
श्री राय ने कहा कि कल उन्होंने विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और प्रदेश भाजपाध्यक्ष आदित्य साहू से भी बात की। दोनों से हमने आग्रह किया कि जमशेदपुर भाजपा के कार्यकर्ताओं को आप निर्देश दें कि वो भी इस आंदोलन में शामिल हों। डीआरएम को भेजी गई मेमोरेंडम की एक कापी बाबूलाल मरांडी को भेज दी गई है। हम लोग चाहते हैं कि सभी दलों के साथ हों इस आंदोलन में। अब सीनियर डीसीएम को इसमें राजनीतिक बयान दिखता है। इसे राजनीतिक बयान कह कर कमतर आंकना सही बात नहीं है। घाटशिला और बहरागोड़ा क्षेत्र के लोग भी ट्रेनों से चल कर जमशेदपुर आते हैं। यहां नौकरी करते हैं। सैकड़ों लोग टाटानगर जंक्शन पर उतर कर अपने सुदूर गांवों में जाते हैं। यह मामला सिर्फ जमशेदपुर का नहीं है। यह पूरे इलाके का मामला है। इसमें दलीय प्रतिबद्धता से उपर उठ कर जनहित के बारे में सोचने की जरूरत है।
सरयू राय ने कहा कि आंदोलन व्यापक हो रहा है। हम लोग जनता के बीच में जा सकते हैं। जनता से कहेंगे कि इस समस्या के समाधान के लिए जी-जान से लगना होगा। घाटशिला से बगरागोड़ा तक, सरायकेला से आदित्यपुर तक आंदोलन को ले जाएंगे। जिस तरीके से चक्रधरपुर डिवीजन में ट्रेनों का परिचालन हो रहा है, वह चिंता का विषय है। रेलवे अधिकारियों से वह निवेदन करेंगे कि अपने कर्तव्य का निर्वाह करें। जनता को कोई कठिनाई न हो।
श्री राय ने कहा कि कल के अपने प्रेस कांफ्रेंस में सीनियर डीआरएम ने एक बार भी मालगाड़ी का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि यात्री ट्रेनें समय से चलें और जो समय बचता है, उसमें मालगाड़ियां चलें। दोनों ट्रेनें चलें। उन्होंने क्योंझर के यात्री की परेशानी का भी जिक्र किया, जो ट्रेन विलंब होने के कारण परेशान हुआ और उसकी वंदे भारत ट्रेन छूट गई।

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