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इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र द्वारा 21 फरवरी 2026 को एसएनटीआई ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में “एक सतत भविष्य के लिए ईको-इनोवेशन्स” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

इस गरिमामय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गौतम सुत्रधर, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर तथा सत्र अध्यक्ष  विनीत कुमार साह, चीफ – लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं अध्यक्ष, IE(I), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र का स्वागत करते हुए डॉ. सीरम माधुरी, मानद सचिव, IE(I), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र द्वारा किया गया संगोष्ठी के उदघाटन सत्र की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई

इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र द्वारा 21 फरवरी 2026 को एसएनटीआई ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में “एक सतत भविष्य के लिए ईको-इनोवेशन्स” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस गरिमामय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गौतम सुत्रधर, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर तथा सत्र अध्यक्ष  विनीत कुमार साह, चीफ – लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं अध्यक्ष, IE(I), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र का स्वागत करते हुए डॉ. सीरम माधुरी, मानद सचिव, IE(I), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र द्वारा किया गया

संगोष्ठी के उदघाटन सत्र की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके पश्चात स्वागत भाषण  विनीत कुमार साह द्वारा प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण, उच्च कार्बन उत्सर्जन, पर्यावरणीय क्षरण तथा अव्यवस्थित विकास जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बल दिया कि वर्तमान परिदृश्य में प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण अब व्यवहार्य नहीं है तथा सतत विकास अनिवार्य हो गया है, जिसमें इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गौतम सुत्रधर ने अपने संबोधन में कहा कि इंजीनियरिंग में स्थिरता का मूल अर्थ परियोजनाओं के दीर्घकालिक पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों को ध्यान में रखना है। इसमें संसाधनों का कुशल उपयोग, अपशिष्ट का न्यूनिकरण, कार्बन फुटप्रिंट में कमी तथा स्वस्थ जीवन-पर्यावरण का निर्माण शामिल है। उन्होंने युवाओं में नवाचार, इन्क्यूबेशन, स्टार्ट-अप्स एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु एनआईटी जमशेदपुर द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों तथा कौशल विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से स्थानीय समुदाय के लिए आयोजित कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला।
“सस्टेनेबिलिटी इन इंजीनियरिंग: रोल ऑफ इंजीनियर्स इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रो. अनिल कुमार चौधरी, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सतत इंजीनियरिंग के पाँच प्रमुख सिद्धांतों—संसाधनों का कुशल उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव का न्यूनिकरण, सामाजिक उत्तरदायित्व, जीवन-चक्र दृष्टिकोण एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण—पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने वर्तमान पर्यावरणीय संकट के कारणों का विश्लेषण करते हुए संभावित समाधान भी प्रस्तुत किए।
द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. अनुपम कुमारी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं कार्यक्रम समन्वयक, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एवं आईटी, अरका जैन विश्वविद्यालय, झारखंड द्वारा “हाइड्रोजन ऐज़ ए क्लीन एनर्जी कैरियर: प्रोडक्शन, स्टोरेज एंड यूटिलाइजेशन” विषय पर किया गया। उन्होंने भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में स्वच्छ ऊर्जा वाहक के रूप में हाइड्रोजन के महत्व को रेखांकित किया।
तृतीय तकनीकी सत्र  जी. आर. पी. सिंह, हेड – क्वालिटी एश्योरेंस एवं एनालिटिक्स, सेंट्रल प्लानिंग एंड रिसोर्स ग्रुप, टाटा स्टील द्वारा “रोल ऑफ मेंटेनेंस इंजीनियर्स इन प्रमोटिंग सस्टेनेबिलिटी” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इंजीनियरिंग प्रणालियों में स्थिरता को बढ़ावा देने हेतु व्यवहार परिवर्तन तथा प्रभावी अनुरक्षण पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया।
चतुर्थ सत्र डॉ. आलोक कुमार राय, सहायक प्रोफेसर, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा “ईको-इनोवेशन्स इन थर्मल इंजीनियरिंग: फेज़ चेंज मटेरियल्स फॉर क्लीन एनर्जी एंड इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने थर्मल इंजीनियरिंग एवं स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में विभिन्न नवाचारों तथा भविष्य की स्थिरता हेतु उनके उपयोग पर प्रकाश डाला।
अंतिम तकनीकी सत्र डॉ. दुलारी हांसदा, सहायक प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा “थर्मल कन्वर्ज़न ऑफ मेडिकल प्लास्टिक वेस्ट फॉर यूज़फुल एनर्जी” विषय पर प्रस्तुत किया गया, जिसमें सतत प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस संगोष्ठी में शैक्षणिक संस्थानों तथा निर्माण उद्योग से जुड़े सत्तर से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज की, जिनमें एनआईटी जमशेदपुर, आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, मैरीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, श्रीनाथ विश्वविद्यालय, अरका जैन विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान झारखंड, एनटीटीएफ गोलमुरी के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोधार्थी सम्मिलित थे। साथ ही टाटा स्टील, टाटा टिनप्लेट, टाटा स्टील ग्रोथ शॉप, सीएसआईआर-एनएमएल, आरएसबी ट्रांसमिशन लिमिटेड तथा टीएसयूआईएसएल (पूर्व में जुस्को) के पेशेवर भी उपस्थित रहे।
सम्पूर्ण कार्यक्रम का समन्वयन जमशेदपुर स्थानीय केंद्र के श्री कृष्णेंदु शॉ द्वारा किया गया तथा संगोष्ठी का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरण, फीडबैक सत्र एवं डॉ. सीरम माधुरी, मानद सचिव, IE(I), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।
सभी सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक रहे, जिससे सतत इंजीनियरिंग प्रथाओं के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में यह संगोष्ठी सफल रही।

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