Uncategorized

सबल ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर महीने भर चलने वाले कार्यक्रम के साथ बधिर समावेशन और भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के दिव्यांग समावेशन कार्यक्रम सबल ने जमशेदपुर में कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) को प्रोत्साहित करने, बधिर समुदाय की आवाज़ को सशक्त बनाने और सुलभ संवाद को एक मौलिक अधिकार के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। यह आयोजन भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुनने में कठिनाई वाले व्यक्तियों के समावेशन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे महीने भर के अभियान का हिस्सा है

सबल ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर महीने भर चलने वाले कार्यक्रम के साथ बधिर समावेशन और भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया


जमशेदपुर- अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के दिव्यांग समावेशन कार्यक्रम सबल ने जमशेदपुर में कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) को प्रोत्साहित करने, बधिर समुदाय की आवाज़ को सशक्त बनाने और सुलभ संवाद को एक मौलिक अधिकार के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। यह आयोजन भारतीय सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुनने में कठिनाई वाले व्यक्तियों के समावेशन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे महीने भर के अभियान का हिस्सा है।


23 सितंबर को सबल ने जमशेदपुर स्थित सबल सेंटर में बधिर समुदाय के साथ एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया।


इस कार्यक्रम में सबल सेंटर, साकची, जमशेदपुर में बधिर समुदाय के सदस्यों, शैक्षणिक संस्थानों, सिविल सोसाइटी संगठनों, नियोक्ताओं, विद्यार्थियों, खेल के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वालों, मीडिया प्रतिनिधियों और दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पैनल चर्चा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, ISL का प्रदर्शन, बधिर समुदाय के उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मान तथा मीडिया और समुदाय से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद शामिल रहा।


सुबह के सत्र में पैनल चर्चाओं के दौरान जमशेदपुर में सुनने में कठिनाई वाले व्यक्तियों की आकांक्षाओं, चुनौतियों, अधिकारों, शिक्षा और स्किलिंग से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई। बधिर संघों के प्रतिनिधियों (समीरनलाल, निशा लाल, दिलीप और डी एन झा), शैक्षणिक संस्थानों (कार्मेल बाल विहार, सिद्धेश्वर स्कूल और आशाकिरण) तथा सुनने में कठिनाई वाले व्यक्तियों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। उन्होंने ऐसे सक्षम वातावरण के निर्माण पर जोर दिया, जो सभी के लिए समान भागीदारी और अवसर सुनिश्चित करे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, विद्यार्थियों द्वारा कहानी साझा करने की प्रस्तुति, भारतीय सांकेतिक भाषा की मूलभूत जानकारी पर एक सत्र और ISL गीत की प्रस्तुति भी शामिल रही।

दोपहर के सत्र में बधिर समुदाय की प्रेरणादायक उपलब्धियों का जश्न मनाया गया। इस दौरान खेल (सोनी और संजय), शिक्षा (बिश्वजीत लाहा, स्वीटी, ईशा कुमारी गुप्ता), रोजगार (अमित और जागृति) और नृत्य (नाज़िआ बन्नो) के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया गया।

https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=ZkgTWIfqiqoJAf87

इस अवसर पर सबल और स्पोर्ट्स के हेड स्किल डेवलपमेंट कप्तान अमिताभ, ने कहा, भारतीय सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी भाषा है, जो पहचान, संस्कृति और समुदाय को अपने साथ जोड़ती है। परिवारों, शिक्षकों, नियोक्ताओं, सेवा प्रदाताओं और पूरे समाज में ISL के प्रति अधिक जागरूकता और इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने से बधिर व्यक्तियों के लिए पहुंच और समावेशन को काफी बेहतर बनाया जा सकता है।

https://youtube.com/@pramodkumarjha8189?si=xQvZ4up3hC5gyGWF

सबल के माध्यम से टाटा स्टील फाउंडेशन बधिर समुदाय के लिए अवसरों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसके तहत ISL के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बेसिक ISL प्रशिक्षण आयोजित करने, शिक्षा में सहयोग देने, खेल से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देने तथा भागीदारी और नेतृत्व के लिए मंच उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम बधिर विद्यार्थियों को आवासीय शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है।

यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस और अंतरराष्ट्रीय बधिरजन सप्ताह के व्यापक वैश्विक आयोजन के अनुरूप है। इस वर्ष की थीम “बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा” है, जो सांकेतिक भाषा के अधिकार, सुगम्यता, समावेशी शिक्षा और समाज में बधिर व्यक्तियों की पूर्ण भागीदारी के महत्व को रेखांकित करती है।

सबल ने ऐसे समावेशी वातावरण के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जहां संवाद की बाधाएं किसी की भागीदारी, सीखने, रोजगार या नेतृत्व की राह में बाधा न बनें। यह पहल ऐसे समाज की दिशा में लगातार काम कर रही है, जहां सुगम्यता रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा हो और हर व्यक्ति, दिव्यांगता के भेदभाव के बिना, अपना योगदान दे सके और आगे बढ़ सके।

सबल के बारे में

सबल, टाटा स्टील फाउंडेशन का दिव्यांग समावेशन कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत 2017 में नोआमुंडी में हुई थी। यह कार्यक्रम झारखंड और ओडिशा में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार-आधारित समावेशन, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका, खेल, सुगम्यता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, जिसमें ग्रामीण समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

सबल का उद्देश्य ऐसे अवसर उपलब्ध कराकर समावेशन को केवल एक विचार से आगे बढ़ाकर रोजमर्रा की हकीकत में बदलना है, ताकि दिव्यांग व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता को पहचान सकें और उसे साकार कर सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!