जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज: मुंशी प्रेमचंद जयंती पर ‘प्रेमचंद: साहित्य, समाज और समकाल’ विषय पर संगोष्ठी संपन्न
जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के आर्ट एंड कल्चरल सेल तथा हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई. स्वामी विवेकानंद सभागार में प्राचार्य डॉ. कृष्णा प्यारे की अध्यक्षता में "प्रेमचंद: साहित्य, समाज और समकाल" विषय पर संगोष्ठी का सफल आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई

जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज: मुंशी प्रेमचंद जयंती पर ‘प्रेमचंद: साहित्य, समाज और समकाल’ विषय पर संगोष्ठी संपन्न

जमशेदपुर- जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के आर्ट एंड कल्चरल सेल तथा हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई. स्वामी विवेकानंद सभागार में प्राचार्य डॉ. कृष्णा प्यारे की अध्यक्षता में “प्रेमचंद: साहित्य, समाज और समकाल” विषय पर संगोष्ठी का सफल आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई.
प्रमुख वक्ताओं के विचार: एक नज़र में
डॉ. कृष्णा प्यारे (प्राचार्य)
प्रेमचंद का साहित्य एक आदर्श जीवन की गीता है, जो समाज को सही दिशा दिखाता है. सौ वर्ष पूर्व रचा गया उनका साहित्य आज के सूचना क्रांति युग में भी प्रासंगिक है.
डॉ. अंतरा कुमारी (संयोजक, कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ):
प्रेमचंद ने पारिवारिक और सामाजिक चेतना को खूबसूरती से उकेरा है. कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ की आनंदी पारिवारिक एकजुटता का बेहतरीन उदाहरण है.
डॉ. राजीव रंजन राकेश (विभागाध्यक्ष, हिन्दी):
प्रेमचंद ने साहित्य को कोरी कल्पनाओं से निकालकर यथार्थ के धरातल पर खड़ा किया. वे भारतीय किसानों की पीड़ा को साहित्य के केंद्र में लाने वाले युगप्रवर्तक रचनाकार हैं.
प्रो. अहमद बद्र (मुख्य अतिथि):
प्रेमचंद का साहित्य भारतीय यथार्थ का जीवंत दस्तावेज है. कहानी ‘दुनिया का सबसे अनमोल रतन’ राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती है. भारत को गहराई से समझने के लिए प्रेमचंद को पढ़ना अनिवार्य है.
डॉ. सुभाष गुप्ता (मुख्य वक्ता):
बदलती सामाजिक व्यवस्था और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रेमचंद विचार प्रासंगिक हैं. वे एक ऐसी राष्ट्रीयता के पक्षधर थे जहाँ शिक्षा का बाजारीकरण न हो और समाज में समानता हो.
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और धन्यवाद ज्ञापन
संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों के लिए प्रेमचंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. मंच संचालन डॉ. प्रियंका सिंह ने किया और डॉ. सबिता पॉल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.
निम्नलिखित लोग उपस्थित रहे-
इस अवसर पर कॉलेज के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे.
कार्यक्रम में डॉ. एस. खान, डॉ. दुर्गा तमसोय, डॉ. अंशु श्रीवास्तव, डॉ. पुष्पा सिंह, श्रीमती शोभा देवी, डॉ. राजू ओझा, डॉ. स्वाति सोरेन, डॉ. प्रकाश सरकार, डॉ. श्वेता शर्मा, डॉ. पुष्पा तिवारी, डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. अनिता कुमारी, डॉ. शालिनी शर्मा, डॉ. संजय नाथ, प्रो. स्वरूप कुमार मिश्रा और प्रो. अमित जाना सहित कई शिक्षक उपस्थित थे.
इसके अलावा छात्र-छात्राओं में लक्ष्मण गोराई, आशीष चौधरी, माधुरी कुमारी, जयश्री महतो, श्रुति कुमारी, रोशनी कुजूर, रिया गुप्ता, पूजा कुमारी, अजय महाकुड और खुशबू पोद्दार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई.



