Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी   Click to listen highlighted text! Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी
Uncategorized

गोवा के सनातन आश्रम में जगद्गुरु का सदिच्छा दौरा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले से की भेंट

सत्विकता और संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की कुंजी - जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी महाराज

गोवा के सनातन आश्रम में जगद्गुरु का सदिच्छा दौरा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले से की भेंट

सत्विकता और संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की कुंजी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी महाराज

फोंडा (गोवा) – ‘कलियुग के इस चुनौतीपूर्ण समय में केवल भक्ति से काम नहीं चलेगा। आज समय की मांग है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर की सात्विकता को जाग्रत करे और संगठित हो। मानव योनि में ही अपना भाग्य बदलने का सामर्थ्य है। यदि योग्य गुरु के मार्गदर्शन में कार्य किया जाए, तो विश्वशांति का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है। ये ओजस्वी विचार रामानंदाचार्य दक्षिण पीठ, नाणिजधाम (रत्नागिरी) के जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने व्यक्त किए।* गोवा के रामनाथी स्थित सनातन आश्रम की भेंट के दौरान उन्होंने समाज के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण और सामूहिक कल्याण का संदेश दिया।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने सनातन संस्था के रामनाथी (गोवा) आश्रम में मंगलमय पदार्पण किया। इस अवसर पर ‘सनातन प्रभात’ समाचार पत्र समूह के संपादक श्री. योगेश जलतारे ने उन्हें आश्रम में चल रहे राष्ट्र-धर्म के कार्यों तथा आध्यात्मिक शोध से अवगत कराया। आश्रम प्रवास के दौरान जगद्गुरु महाराज ने सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले जी से भेंट की। इस अलौकिक मिलन के बाद सनातन संस्था के पूजनीय पृथ्वीराज हजारे ने जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज का भावपूर्ण सम्मान किया। इस मांगलिक अवसर पर भारताचार्य पूजनीय (प्रो.) सु.ग. शेवड़े और सनातन संस्था की पूजनीय (श्रीमती) ज्योति ढवळीकर भी उपस्थित थीं।

उपस्थित साधकों और गणमान्य जनों को मार्गदर्शित करते हुए जगद्गुरु महाराज ने कहा आज के समय में हिंदू समाज को अपने सभी मतभेदों को भुलाकर एक मंच पर आना अनिवार्य है। हमारा और परम पूजनीय डॉ. आठवले जी का मिशन एक ही है । हिंदू धर्म की रक्षा और उसका उत्थान! समाज के कल्याण के लिए सात्विक शक्तियों का एकत्रीकरण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।’’ उन्होंने सनातन संस्था के कार्यों की गौरव गाथा गाते हुए कहा, ‘‘परम पूजनीय डॉ. आठवले जी अंतर्बाह्य सत्पुरुष हैं। उनके दिव्य मार्गदर्शन में सनातन के साधक संपूर्ण विश्व में शांति का असाधारण कार्य कर रहे हैं। ऐसा अनुशासित कार्य किसी अन्य संप्रदाय के लिए सहज संभव नहीं हुआ है, क्योंकि यहाँ ‘गुरुतत्व’ को सर्वोपरि माना जाता है और अत्यंत अनुशासित पद्धति से साधना की जाती है।
कलियुग की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए जगद्गुरु महाराज ने कहा कि इस युग में ‘रज’ और ‘तम’ गुण बिना किसी निमंत्रण के अपने आप बढ़ते हैं, जो मानव जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं। इन नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करने और जीवन में सात्विकता बढ़ाने के लिए समाज को ‘साधना’ करना अनिवार्य है। संतों के सान्निध्य से निकलने वाले सात्विक स्पंदन मनुष्य को आत्मचैतन्य की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने सनातन आश्रम के साधकों द्वारा अपनी गलतियों को खुलकर स्वीकार करने और आत्मचिंतन करने की पद्धति की विशेष सराहना की। महाराज ने संदेश देते हुए कहा, ‘‘यदि समाज का हर व्यक्ति अपने दोषों को खोजकर उन्हें दूर करने का प्रामाणिक प्रयास करे, तभी एक दोषमुक्त, संस्कारी और आदर्श समाज का निर्माण हो सकेगा

*श्री. चेतन राजहंस* ,
राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था,
(संपर्क: 77758 58387)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!