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संथाली भाषाओं की पढ़ाई के लिए शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सीएम से करेंगे वार्ता- संजीव सरदार

हजारों बच्चों ने सीखी मातृभाषा की बुनियाद, शिक्षकों और समन्वयकों को पोटका विधायक ने किया सम्मानित

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हजारों बच्चों ने सीखी मातृभाषा की बुनियाद, शिक्षकों और समन्वयकों को पोटका विधायक ने किया सम्मानित


पोटका- संथाली भाषा, अलचिकि लिपि और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित संथाली समर कैंप-2026 का भव्य समापन शनिवार को पावड़ा स्थित माझी परगना माहाल भवन में हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता धाड़ दिशोम देश परगना बैजु मुर्मू ने की. अखिल भारतीय संताली लेखक संघ झारखंड शाखा एवं अखिल झारखंड संथाल शिक्षक फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभियान के तहत पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और जामताड़ा जिलों में कुल 354 केंद्रों पर नि:शुल्क संथाली शिक्षा दी गयी. 22 मई से 10 जून तक चले इस समर कैंप में बच्चों और युवाओं को अलचिकि लिपि, संताली भाषा, साहित्य, अंकगणित तथा संस्कृति का प्रशिक्षण दिया गया. समापन समारोह में मुख्य अतिथि पोटका विधायक संजीव सरदार ने विभिन्न केंद्रों के शिक्षकों और प्रखंड समन्वयकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. संचालन आईसवा के अध्यक्ष डॉ रजनीकांत मांडी ने किया. मातृभाषा आधारित शिक्षा को मजबूत बनाने की जरूरत: मुख्य अतिथि पोटका विधायक संजीव सरदार ने कहा कि संताली भाषा, अलचिकी लिपि और संथाली संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर है, जिसके संरक्षण और विकास के लिए समाज के साथ-साथ सरकार को भी आगे आना होगा. कहा कि संताली विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे तथा इस मुद्दे को सरकार और विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि मातृभाषा आधारित शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक पहल होगी. साथ ही संथाल शिक्षा, अलचिकी लिपि के प्रचार-प्रसार और समर कैंप जैसे आयोजनों को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया. वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा और संस्कृति को बचाने के लिए ऐसे अभियान समय की आवश्यकता हैं. डॉ सत्यनारायण मुर्मू ने समर कैंप के लिए एक हजार अलचिकि अक्षर ज्ञान पुस्तिकाएं दान कीं तथा अगले वर्ष पांच हजार पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की घोषणा की.

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