नो-एंट्री के समय भारी वाहनों को पास देने वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो – अप्पू तिवारी
एग्रिको चौक के पास हाइवा की टक्कर में पिता की मौत, पुत्र गंभीर रूप से घायल; यातायात व्यवस्था पर आजसू नेता ने उठाए सवाल

नो-एंट्री के समय भारी वाहनों को पास देने वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो – अप्पू तिवारी

एग्रिको चौक के पास हाइवा की टक्कर में पिता की मौत, पुत्र गंभीर रूप से घायल; यातायात व्यवस्था पर आजसू नेता ने उठाए सवाल
जमशेदपुर- शहर में नो-एंट्री के बावजूद भारी वाहनों के आवागमन को लेकर एक बार फिर यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार की संध्या करीब 6 बजे एग्रिको चौक के समीप एक तेज रफ्तार हाइवा ने पिता-पुत्र को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में पिता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना को लेकर आजसू नेता अप्पू तिवारी ने जिला यातायात पुलिस की कार्यशैली पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब शहर में निर्धारित समय पर भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री लागू रहती है, तो आखिर किसकी अनुमति या पास के आधार पर ऐसे वाहन शहर की सड़कों पर प्रवेश करते हैं?
अप्पू तिवारी ने कहा कि नो-एंट्री के दौरान भारी वाहनों को आवागमन की अनुमति देने के लिए पास निर्गत करने वाले जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों की अनदेखी के कारण भारी वाहन नो-एंट्री के समय सड़क पर आया और उसकी वजह से किसी व्यक्ति की जान गई, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पर भी कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियम और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नो-एंट्री के नियम का वास्तविक रूप से पालन हो। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नो-एंट्री के बावजूद भारी वाहन शहर में बेरोकटोक चलते रहेंगे तो आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
आजसू नेता ने प्रशासन से मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि दुर्घटना में शामिल हाइवा नो-एंट्री के दौरान शहर में किस आधार पर प्रवेश कर रहा था। साथ ही वाहन को अनुमति देने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यवस्था की भी जांच हो।
उन्होंने कहा कि एक परिवार का मुखिया सड़क हादसे में अपनी जान गंवा चुका है और एक बेटा गंभीर रूप से घायल है। ऐसी घटनाओं को महज सड़क दुर्घटना कहकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यदि किसी की लापरवाही से नियमों की धज्जियां उड़ती हैं और उसके परिणामस्वरूप किसी की मौत होती है तो जिम्मेदार व्यक्ति पर हत्या के मामले में कानूनी कार्रवाई की संभावना की भी जांच होनी चाहिए।



