आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से – संजीव सरदार
विश्व आदिवासी दिवस पर एलबीएसएम कॉलेज में विशेष कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से – संजीव सरदार

विश्व आदिवासी दिवस पर एलबीएसएम कॉलेज में विशेष कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
जमशेदपुर- विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग, एलबीएसएम कॉलेज करनडीह की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पोटका विधायक संजीव सरदार मुख्य अतिथि तथा घाटशिला विधायक सोमनेश चंद्र सोरेन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कॉलेज के प्राचार्य ने स्वागत भाषण के माध्यम से कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आदिवासी समाज के इतिहास, संघर्ष, संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर अपने विचार रखे। छात्रा प्रियंका कालिंदीया ने विश्व आदिवासी दिवस के विषय पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर – संजीव सरदार
मुख्य अतिथि विधायक संजीव सरदार ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर है। आदिवासी समाज ने सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा, लोकगीत और लोकनृत्य से जुड़ी हुई है। इन विरासतों को बचाने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी युवाओं की है।
संजीव सरदार ने कहा कि आदिवासी समाज के वीरों और महापुरुषों ने अपने अधिकार, सम्मान और अस्तित्व के लिए संघर्ष किया है। उनका इतिहास केवल संघर्ष का इतिहास नहीं, बल्कि स्वाभिमान, सामाजिक एकता और अपनी पहचान को बचाए रखने का इतिहास भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा और संस्कृति पर गर्व करने के साथ-साथ उच्च शिक्षा हासिल कर समाज को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कृति दोनों को साथ लेकर ही समाज का समग्र विकास संभव है।
कार्यक्रम के दौरान स्नातकोत्तर कक्षाओं के टॉपर विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दीं और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद कॉलेज परिसर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। हो विभाग, संथाली विभाग और भूमिज लोकनृत्य दल के विद्यार्थियों ने पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की विविधता को जीवंत कर दिया।
संथाली नृत्य की प्रस्तुति का नेतृत्व आरती हांसदा ने किया। हो नृत्य की प्रस्तुति में मनीषा ने अगुवाई की। संथाली नृत्य की एक अन्य प्रस्तुति का नेतृत्व अजय ने किया।
एनसीसी के छात्रों द्वारा भूमिज विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुति की अगुवाई कल्याणी सिंह ने की। वहीं हो विभाग की प्रस्तुति में ईशा तथा एनसीसी के छात्रों द्वारा संथाली विभाग की प्रस्तुति में पायल ने नेतृत्व किया।
पारंपरिक परिधानों और लोकनृत्यों से सजी प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आदिवासी संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों की पहचान भी है। भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना ही आदिवासी समाज के सशक्त भविष्य की मजबूत नींव है।
कार्यक्रम में जमशेदपुर लॉ कॉलेज के सहायक प्राध्यापक संजीव कुमार बिरुली भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रिंसिपल डॉक्टर अशोक कुमार झा, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बाबू राम सोरेन, फिजिक्स विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉक्टर सुष्मिता धारा, हो विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिप्रा बोईपाई, विकास मुंडा, डॉक्टर विनय कुमार गुप्ता, मानस सरदार, सहित सभी शिक्षक और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.

