पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के वक्तव्य पर विभाग मंत्री विहिप सिंहभूम अरूण सिंह की कड़ी प्रतिक्रिया
विश्व हिंदू परिषद के सिंहभूम विभाग मंत्री अरूण सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा मोहम्मद ग़ज़नी को हिंदुस्तानी लुटेरा कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह वक्तव्य अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, तथ्य-विरोधी और भारत के इतिहास और स्वाभिमान का अपमान है

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के वक्तव्य पर विभाग मंत्री विहिप सिंहभूम अरूण सिंह की कड़ी प्रतिक्रिया
जमशेदपुर- विश्व हिंदू परिषद के सिंहभूम विभाग मंत्री अरूण सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा मोहम्मद ग़ज़नी को हिंदुस्तानी लुटेरा कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह वक्तव्य अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, तथ्य-विरोधी और भारत के इतिहास और स्वाभिमान का अपमान है
उन्होंने कहा कि मोहम्मद ग़ज़नी अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी क्षेत्र का शासक और एक विदेशी आक्रांता लुटेरा था। उसका भारत पर बार-बार आक्रमण करने का उद्देश्य किसी प्रकार का “स्थानीय संघर्ष” नहीं, बल्कि लूट, विध्वंस और हिन्दू सनातन संस्कृति और मान बिंदुओं पहचान पर प्रहार था।
ग़ज़नी ने भारत की समृद्धि और मंदिरों को निशाना बनाते हुए लगभग 17 बार आक्रमण किए, परंतु उसे हर बार भारत की भूमि पर भीषण प्रतिरोध और संघर्ष का सामना भी करना पड़ा। यह भारत की शक्ति, पराक्रम और सांस्कृतिक जिजीविषा का प्रमाण है।
अरूण सिंह ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक सत्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना केवल एक गलती नही बल्कि इतिहास को राजनीतिक सुविधा के अनुसार गिराने का प्रयास है। भारत के सम्मानित संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का बयान देना अत्यंत गंभीर है, क्योंकि इससे एक तरफ विदेशी आक्रांताओं के अपराधों को हल्का करने की कोशिश होती है और दूसरी तरफ भारत के उन वीरों के संघर्ष का भी अपमान होता है जिन्होंने अपनी भूमि और संस्कृति की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत का इतिहास किसी की निजी सोच या वैचारिक एजेंडे का गुलाम नहीं है। इतिहास को भ्रम फैलाकर नहीं बदला जा सकता। ऐसे बयान भारत के गौरव पर चोट करते हैं और समाज में अनावश्यक भ्रम व वैचारिक विकृति को बढ़ावा देते हैं।
विश्व हिंदू परिषद सिंहभूम आग्रह करती है कि इस प्रकार के असत्य और भ्रामक वक्तव्यों को सार्वजनिक जीवन में स्वीकार्य न मानते हुए, इतिहास और राष्ट्रबोध के प्रति जिम्मेदार शब्दों का प्रयोग किया जाए। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को माफी मांगनी चाहिए।




