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पश्चिम बंगाल की एक अत्यंत प्राचीन और समृद्ध पारंपरिक कठपुतली नाट्य यानी पुतुल नाच का हुआ आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

मानगो संकोसाइ, बंगाली कॉलोनी में सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा बंगाल की अत्यंत प्राचीन और समृद्ध पारंपरिक पुतुल नाच का आयोजन किया गया। यह लोक कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि सदियों से ग्रामीण समाजों में नैतिक शिक्षा, धार्मिक गाथाओं और सामाजिक संदेशों को पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम रही है। बंगाली कॉलोनी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष सुजीत सरकार का कहना है कि इस पूजा समिति का यह 39 वाँ वर्ष है। हम लोग बंगाली परंपरा के अनुसार पूजा का आयोजन करते हैं। हमारे बच्चों ने कभी कठपुतली नाच यानी पुतुल नाच नहीं देखा। मोबाइल और टीवी के बिना भी पहले जिंदगी बहुत अच्छी थी

पश्चिम बंगाल की एक अत्यंत प्राचीन और समृद्ध पारंपरिक कठपुतली नाट्य यानी पुतुल नाच का हुआ आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़।

जमशेदपुर- मानगो संकोसाइ, बंगाली कॉलोनी में सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा बंगाल की अत्यंत प्राचीन और समृद्ध पारंपरिक पुतुल नाच का आयोजन किया गया। यह लोक कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि सदियों से ग्रामीण समाजों में नैतिक शिक्षा, धार्मिक गाथाओं और सामाजिक संदेशों को पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम रही है।

बंगाली कॉलोनी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष सुजीत सरकार का कहना है कि इस पूजा समिति का यह 39 वाँ वर्ष है। हम लोग बंगाली परंपरा के अनुसार पूजा का आयोजन करते हैं। हमारे बच्चों ने कभी कठपुतली नाच यानी पुतुल नाच नहीं देखा। मोबाइल और टीवी के बिना भी पहले जिंदगी बहुत अच्छी थी।

पुतुल नाच के माध्यम से सामाजिक, प्राकृतिक, सनातन हिंदू धर्म के बारे में जानकारी और अपनी धर्म संस्कृति से बच्चों, बड़ों को परिचित कराना ही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है।

वही अन्य सदस्य रविंद्र नाथ ने बताया कि आज का जो कार्यक्रम आयोजित किया गया है, इसमें भक्त प्रहलाद के जीवन और उनके भक्ति को दर्शाया गया है। बच्चों के अंदर में यह भावना आती है कि भगवान भी अपने भक्त की रक्षा करने के लिए अवतरित होते हैं और राक्षसों का वध करते हैं।

वही एक अन्य सदस्य बाला शाह ने बताया कि पश्चिम बंगाल के नदिया से पुतुल नाच की टीम आई हुई है। बच्चों को नहीं मालूम कि पुतुल नाच भी कुछ होता है।

उन्होंने बताया कि हमारी समृद्ध एवं पारंपरिक संस्कृति से आज के बच्चे और युवा पीढ़ी को परिचित कराने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इन लोगों ने बताया कि हमने यह सोचा भी नहीं था की पुतुल नाच को देखने के लिए इतनी ज्यादा भीड़ श्रद्धालुओं की उमड़ पड़ेगी। अब अगले बार से विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को अच्छी तरह से कार्यक्रम देखने की सुविधा मिल सके।

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