टाटा पावर ने भारत के एआई और डिजिटल विकास के लिए उठाया बड़ा कदम; 18 ब्लू-चिप कंपनियों के साथ 2.8 गीगावाट से अधिक की डेटा सेंटर पाइपलाइन आगे बढ़ाई
भारत के तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर इकोसिस्टम के लिए कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा, पारेषण और वितरण और एकीकृत बुनियादी ढांचा समाधानों के 29 एक्टिव वर्कस्ट्रीम पर काम कर रही है। बिजली उत्पादन से लेकर पारेषण और वितरण तक पूरी मूल्य श्रृंखला में एकीकृत मौजूदगी के कारण, टाटा पावर तेजी से उभरते एआई और डेटा सेंटर इकोसिस्टम का लाभ उठाने के लिए मजबूत स्थिति में है

टाटा पावर ने भारत के एआई और डिजिटल विकास के लिए उठाया बड़ा कदम; 18 ब्लू-चिप कंपनियों के साथ 2.8 गीगावाट से अधिक की डेटा सेंटर पाइपलाइन आगे बढ़ाई
भारत के तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर इकोसिस्टम के लिए कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा, पारेषण और वितरण और एकीकृत बुनियादी ढांचा समाधानों के 29 एक्टिव वर्कस्ट्रीम पर काम कर रही है।
बिजली उत्पादन से लेकर पारेषण और वितरण तक पूरी मूल्य श्रृंखला में एकीकृत मौजूदगी के कारण, टाटा पावर तेजी से उभरते एआई और डेटा सेंटर इकोसिस्टम का लाभ उठाने के लिए मजबूत स्थिति में है
जमशेदपुर- टाटा पावर भारत के तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर क्षेत्र के लिए सबसे पसंदीदा पार्टनर बनकर उभरी है। कंपनी के पास नवीकरणीय ऊर्जा और पारेषण और वितरण के क्षेत्र में 2.8 गीगावाट से ज्यादा की नई परियोजनाओं की योजना है।
देश में एआई, क्लाउड और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसे देखते हुए टाटा पावर अब सिर्फ बिजली की आपूर्ति करने तक सीमित नहीं रहेगी। बड़ी टेक कंपनियों और आधुनिक डेटा सेंटर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी भूमिका बढ़ा रही है। इसके तहत अब जमीन, ग्रिड कनेक्टिविटी, बिजली स्टोरेज, कूलिंग सिस्टम और बुनियादी ढांचा जैसी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराई जाएंगी।
कंपनी की इस बड़ी योजना में 18 प्रमुख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय डेटा सेंटर कंपनियों के साथ मिलकर 29 प्रोजेक्ट्स पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है। इस पूरी तैयारी में कंपनी के बिजली वितरण नेटवर्क के तहत लगभग 430 मेगावाट का आगामी लोड, ट्रांसमिशन ग्रिड से जुड़े 1,236 मेगावाट के नए अवसर और करीब 1,150 मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पर चल रही बातचीत शामिल है। इस पहल के जरिए टाटा पावर भारत के सबसे बड़े एआई-रेडी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ऊर्जा देने में मुख्य भूमिका निभा रही है।
बिजली उत्पादन से लेकर बिजली पारेषण और वितरण तक, पावर सेक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला में टाटा पावर की मजबूत मौजूदगी है। यह अनूठी खूबी कंपनी को तेजी से बढ़ते एआई और डेटा सेंटर सेक्टर में सबसे आगे रखती है। अपनी इसी ताकत के दम पर टाटा पावर बड़ी टेक कंपनियों और अगली पीढ़ी के आधुनिक डेटा सेंटर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ही जगह सारी जरूरी सुविधाएं दे पा रही है। इसके तहत कंपनी बिजली युक्त भूमि, ट्रांसमिशन व ग्रिड कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, एनर्जी स्टोरेज, कूलिंग सिस्टम और यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे व्यापक समाधान उपलब्ध करा रही है।
मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बन रहे हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए टाटा पावर अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क को काफी मजबूत कर रही है। इसके तहत कंपनी अपने 110 किलोवोल्ट और 220 किलोवोल्ट के मौजूदा नेटवर्क को अपग्रेड कर रही है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना किसी रुकावट के लगातार बिजली मिलती रहे, इसके लिए ट्रांसमिशन क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ एक मजबूत नेटवर्क रिडंडेंसी भी तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, कंपनी नए रिसीविंग स्टेशन बना रही है और एक 400 किलोवोल्ट का ट्रांसमिशन रिंग नेटवर्क तैयार कर रही है, जिससे मुंबई क्षेत्र में आने वाले समय में डेटा सेंटर्स के विकास को पूरा सपोर्ट मिल सके। इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का यह पूरा काम टाटा पावर के ₹15,000 करोड़ के ‘मुंबई ग्रिड अपग्रेडेशन एंड एक्सपेंशन प्लान’ का हिस्सा है।
जैसे-जैसे भारत वैश्विक एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे बिजली की उपलब्धता इस विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुमानों के आधार पर बिजली मंत्रालय का अनुमान है कि एआई-संचालित डेटा सेंटर्स के कारण वित्त वर्ष 2031-32 तक बिजली की मांग में लगभग 26.3 गीगावाट का इजाफा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने भी रेखांकित किया है कि डेटा सेंटर और बिजली की मांग को बढ़ाने में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में टाटा पावर देश के डिजिटल भविष्य को सहारा देने के लिए आवश्यक एकीकृत ऊर्जा बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।



